<rss version="2.0" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"><channel><title>हेल्थ</title><description></description><atom:link href="https://navbharatlive.com/api/v1/collections/health.rss" rel="self" type="application/rss+xml"></atom:link><link>https://navbharatlive.com</link><language>hi-in</language><lastBuildDate>Thu, 24 Sep 2026 22:08:08 +0530</lastBuildDate><item><title>Chips Packaging: चिप्स के पैकेट में चिप्स कम और हवा ज्यादा क्यों होती है? वजह जानकर हैरान रह जाएंगे</title><link>https://navbharatlive.com/ampstories/web-stories/chips-packet-nitrogen-gas-why-filled-protects-chips-from-breaking-stale-asp28</link><comments>https://navbharatlive.com/ampstories/web-stories/chips-packet-nitrogen-gas-why-filled-protects-chips-from-breaking-stale-asp28#comments</comments><guid isPermaLink="false">3a3bc4ac-93c7-429a-a9c8-27c8e9e91d30</guid><pubDate>Thu, 24 Sep 2026 10:46:27 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-24T10:46:27.361+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>अंकिता पटेल</atom:name><atom:uri>/api/author/2548001</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Lifestyle News,Foods,Health News,Food Safety,food processing</media:keywords><media:content height="1280" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-24/w7900bfr/chips-packet-11.jpg" width="720"><media:title type="html"><![CDATA[ चिप्स पैकेट]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Why Chips Packets Have Nitrogen]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-24/w7900bfr/chips-packet-11.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>वेब स्टोरीज़</category><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <h2>पैकेट में इतनी हवा क्यों?</h2><p>चिप्स का पैकेट खोलते ही कम चिप्स देखकर अक्सर लगता है कि पैकेट आधा खाली है। लेकिन यह जगह बेवजह नहीं होती। पैकेट के अंदर की गैस चिप्स की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करती है।</p><figure><img alt="Why is there so much air in the packet?" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-24/xljwqcaf/chips-packet-1.jpg" /><figcaption>पैकेट में इतनी हवा क्यों?</figcaption></figure><h2>इसे सिर्फ हवा समझना गलत है</h2><p>चिप्स के पैकेट में आम हवा के बजाय अक्सर नाइट्रोजन गैस भरी जाती है। इसे नाइट्रोजन फ्लशिंग कहा जाता है और इसका इस्तेमाल पैकेज के अंदर ऑक्सीजन कम रखने के लिए किया जाता है।</p><figure><img alt="It is a mistake to consider this merely hot air" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-24/90ui3j0h/chips-packet-2.jpg" /><figcaption>इसे सिर्फ हवा समझना गलत है</figcaption></figure><h2> चिप्स टूटने से बचते हैं</h2><p>चिप्स बहुत नाजुक होते हैं और पैकेट को रखने या ले जाने के दौरान आसानी से टूट सकते हैं। पैकेट में मौजूद गैस एक तरह का कुशन बनाकर चिप्स को बाहरी दबाव और झटकों से कुछ हद तक बचाती है।</p><figure><img alt="Chips are prevented from breaking" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-24/5n3822cp/chips-packet-3.jpg" /><figcaption>चिप्स टूटने से बचते हैं</figcaption></figure><h2>नाइट्रोजन क्यों इस्तेमाल होती है?</h2><p>नाइट्रोजन अपेक्षाकृत निष्क्रिय गैस है। पैकेट में इसकी मौजूदगी ऑक्सीजन की मात्रा कम करने में मदद करती है, जिससे चिप्स में ऑक्सीकरण की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है।</p><figure><img alt="Why is nitrogen used?" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-24/m3pezqrl/chips-packet-4.jpg" /><figcaption>नाइट्रोजन क्यों इस्तेमाल होती है?</figcaption></figure><h2>चिप्स जल्दी बासी न हों</h2><p>ऑक्सीजन और नमी चिप्स की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं। सही पैकेजिंग और नाइट्रोजन का इस्तेमाल चिप्स को लंबे समय तक कुरकुरा और ताजा बनाए रखने में मदद कर सकता है।</p><figure><img alt="Prevent chips from going stale quickly" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-24/sbkmoqe4/chips-packet-5.jpg" /><figcaption>चिप्स जल्दी बासी न हों</figcaption></figure><h2>पैकेट का फूला होना जरूरी है</h2><p>फूला हुआ पैकेट देखकर ऐसा लग सकता है कि उसमें चिप्स कम भरे गए हैं। असल में अतिरिक्त जगह चिप्स को दबने से बचाने और पैकेजिंग के दौरान सुरक्षा देने में उपयोगी होती है।</p><figure><img alt="The packet must be puffed up" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-24/60p0rhlp/chips-packet-6.jpg" /><figcaption>पैकेट का फूला होना जरूरी है</figcaption></figure><h2>क्या हर पैकेट में बराबर हवा होती है?</h2><p>नहीं। हर पैकेट में खाली जगह की मात्रा एक जैसी नहीं होती। यह चिप्स के आकार, पैकेट के डिजाइन, भरने की प्रक्रिया और उत्पाद की मात्रा जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।</p><figure><img alt="Does every packet contain the same amount of air?" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-24/67mnn401/chips-packet-7.jpg" /><figcaption>क्या हर पैकेट में बराबर हवा होती है?</figcaption></figure><h2>पैकेट खोलते ही गैस क्यों निकलती है?</h2><p>जब पैकेट खोला जाता है, तो अंदर और बाहर के दबाव में अंतर के कारण गैस तेजी से बाहर निकलती है। इसी वजह से पैकेट खोलते समय फुसफुसाहट जैसी आवाज सुनाई दे सकती है।</p><figure><img alt="Why does gas escape as soon as the packet is opened?" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-24/116eluhg/chips-packet-8.jpg" /><figcaption>पैकेट खोलते ही गैस क्यों निकलती है?</figcaption></figure><h2>क्या नाइट्रोजन वाली पैकेजिंग सुरक्षित है?</h2><p>खाद्य पैकेजिंग में नाइट्रोजन का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य पैकेज के अंदर उपयुक्त वातावरण बनाए रखना होता है, ताकि गुणवत्ता और सुरक्षा बेहतर तरीके से बनी रहे।</p><figure><img alt="Is nitrogen packaging safe?" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-24/8lprxyhf/chips-packet-9.jpg" /><figcaption>क्या नाइट्रोजन वाली पैकेजिंग सुरक्षित है?</figcaption></figure><h2>तो पैकेट में चिप्स कम क्यों दिखते हैं?</h2><p>अगली बार फूला हुआ चिप्स का पैकेट देखकर सिर्फ यह न सोचें कि उसमें हवा ज्यादा है। पैकेट की खाली जगह चिप्स को टूटने से बचाने और उनकी ताजगी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।</p><figure><img alt="So, why do the chips in the packet look sparse?" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-24/agq864kn/chips-packet-10.jpg" /><figcaption>तो पैकेट में चिप्स कम क्यों दिखते हैं?</figcaption></figure><figure><img alt="" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-24/youd5zoh/aaj-ka-rashifal-13.jpg" /></figure><a class="cta-anchor" href="https://navbharatlive.com/ampstories/web-stories/aaj-ka-rashifal-24-september-2026-today-horoscope-daily-rashifal-asp28" target="_blank" rel=""><span class="cta-text">Swipe Up</span></a><h3>24 सितंबर 2026 का राशिफल: 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा गुरुवार का दिन? पढ़ें राशिफल</h3>]]></content:encoded></item><item><title>मेथी के पत्तों को क्यों कहा जाता है सेहत का खजाना? जानें खाने से शरीर को मिलने वाले 4 बड़े फायदे</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/why-are-fenugreek-leaves-considered-a-treasure-trove-of-health-discover-4-major-benefits-they-offer-the-bodyssk08</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/why-are-fenugreek-leaves-considered-a-treasure-trove-of-health-discover-4-major-benefits-they-offer-the-bodyssk08#comments</comments><guid isPermaLink="false">e5324bd1-ec4a-4fe2-819a-3482bdfb3a20</guid><pubDate>Wed, 23 Sep 2026 23:22:42 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-23T23:22:42.739+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>सीमा कुमारी</atom:name><atom:uri>/api/author/2547970</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Lifestyle News,Health Tips,Health News</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/nepxe5rz/Methi-Leaves-.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ मेथी के पत्तों के हेल्थ बेनिफिट्स]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[  Methi Leaves Health Benefits]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/nepxe5rz/Methi-Leaves-.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Leaves Health Benefits :</strong> मेथी सर्दियों के मौसम में आने वाली एक ऐसी हरी पत्तेदार सब्जी है जिसे सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता  हैं। मेथी के पत्तों में विटामिन C, विटामिन A, विटामिन K, फोलेट, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और कॉपर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। जो सेहत को कई तरह के फायदे पहुंचाता है। ऐसे में आइए जानते है मेथी के पत्तों के हेल्थ बेनिफिट्स के बारे में-  </p><h3> मेथी साग से सेहत को होने वाले लाभ </h3><h3> खून की कमी से बचाव</h3><p>डाइट  एक्सपर्ट्स के अनुसार,  मेथी साग खाने से  शरीर में <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/how-to-overcome-iron-deficiency-anemia-1572159.html">खून की कमी </a>नहीं  होती  है।  इसके      पत्तों में आयरन और विटामिन C भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह शरीर में हीमोग्लोबिन के लेवल को बढ़ाकर हीमोग्लोबिन की कमी दूर करने में मदद करता है।  </p><h3>ब्लड शुगर करता  है कंट्रोल</h3><p>आपको बता दें,  मेथी साग खाने से शरीर में  खून की कमी  के अलावा ब्लड शुगर भी कंट्रोल करता है। मेथी  के पत्तों में पाया जाने वाला घुलनशील फाइबर और बायो-एक्टिव कंपाउंड्स कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा करते हैं। यह इंसुलिन की संवेदनशीलता में सुधार कर इंसुलिन स्पाइक को रोकता है।</p><h3> स्किन और बालों के लिए बड़ा फायदेमंद</h3><p>यह स्किन और बालों के लिए भी  बड़ा फायदेमंद बताया गया है। मेथी में एंटीऑक्सीडेंट और लेसिथिन होते हैं, जो स्किन की समस्याओं जैसे मुहांसे और दाग-धब्बे को कम करने और बालों के विकास को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। अगर आप मुहांसे और दाग-धब्बे के साथ झड़ते बालों से परेशान है तो  आप अपनी डाइट में मेथी साग जरूर शामिल करें। </p><h3>कोलेस्ट्रॉल और हार्ट हेल्थ के लिए बड़ा असरदार</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/sardi-me-palak-methi-bathua-kaunsa-sag-health-ke-liye-best-1481465.html">मेथी साग का सेवन</a> कोलेस्ट्रॉल और हार्ट हेल्थ के लिए बड़ा असरदार बताया गया है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स और सैपोनिन शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल को कम करने में मदद करते हैं, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा घटता है। </p><h3> मेथी का सेवन कैसे करें?</h3><p>मेथी के पत्तों को ज्यादा उबालने या ज्यादा पकाने से बचें ताकि इसके हीट सेंसिटिविटी विटामिन C और फोलेट बने रहते हैं। इसे हल्की भाजी, दाल, पराठे/रोटी के आटे में मिलाकर, या सूप/स्मूदी के रूप में ले सकते हैं।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/periods-heavy-bleeding-warning-signs-not-to-avoid-rrs05">Heavy Periods: पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग को न करें नजरअंदाज, ये 7 संकेत दिखें तो डॉक्टर से करें बात</a></aside>]]></content:encoded></item><item><title>आयुष्मान भारत योजना: गरीबों के लिए बड़ा सहारा, लेकिन सिस्टम की खामियां अब भी चुनौतीपूर्ण</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/ayushman-bharat-yojana-big-support-for-poor-but-system-flaws-remain-a-challenge-ags10</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/ayushman-bharat-yojana-big-support-for-poor-but-system-flaws-remain-a-challenge-ags10#comments</comments><guid isPermaLink="false">049b6db2-d176-4659-85cd-59cc0b996b7a</guid><pubDate>Wed, 23 Sep 2026 19:10:00 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-23T19:10:00.225+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>आशीष शुक्ला</atom:name><atom:uri>/api/author/2597974</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>PM Narendra Modi,Health Ministry,Ayushman Bharat</media:keywords><media:content height="941" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/xd3pio76/%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE" width="1671"><media:title type="html"><![CDATA[ पीएम मोदी]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ आयुष्मान भारत योजना ]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/xd3pio76/%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><category>देश</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Ayushman Bharat PM-JAY:</strong> 23 सितंबर 2023 को झारखंड के रांची से शुरु हुई स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत योजना को आज 8 साल पूरे हो गए है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह योजना संजीवनी की तरह काम कर रही है। योजना से स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखा गया है। आयुष्मान भारत योजना के दो मुख्य भाग (घटक) हैं-</p><ol><li><p> <strong>आयुष्मान आरोग्य मंदिर</strong></p></li><li><p> <strong>प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY)</strong> </p></li></ol><p>आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के कारण पिछले कुछ सालों में इस योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को हॉस्पिटल में एडमिट होने पर हर साल 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा मुहैया कराया जाता है।</p><p><strong>योजना के मुख्य आंकड़े</strong></p><ul><li><p><strong>कुल कवर किए गए लोग:</strong> 60 करोड़ से अधिक नागरिक</p></li><li><p><strong>जारी आयुष्मान कार्ड:</strong> 48.54 करोड़ से अधिक</p></li><li><p><strong>अस्पताल में भर्ती:</strong> 13.25 करोड़ से अधिक</p></li></ul><p>इस समय इस योजना के अंतर्गत 37,413 सरकारी और निजी अस्पताल शामिल हैं। हालांकि, योजना का दायरा बढ़ने और बड़ी संख्या में लोगों को इलाज की सुविधा मिलने के साथ-साथ इसके क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल भी सामने आए हैं। </p><p>नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की ऑडिट रिपोर्ट में अस्पतालों की निगरानी, फर्जी या संदिग्ध कार्ड, दावों की जांच और अस्पतालों पर कार्रवाई में देरी जैसी कमियों का उल्लेख किया गया था। इसलिए आयुष्मान भारत की कहानी केवल उपलब्धियों की नहीं, बल्कि उसके सामने मौजूद चुनौतियों की भी है।</p><h3>कैसे काम करती है आयुष्मान भारत योजना?</h3><p>PM-JAY के तहत पात्र परिवार को सालाना 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा मिलता है। इस योजना की खासियत यह है कि लाभार्थी को सरकार के द्वारा सूचीबद्ध अस्पताल में इलाज के दौरान कैशलेस सुविधा मिल सकती है। सरकार के अनुसार योजना अब देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। </p><p>साथ ही दूसरे राज्यों में इलाज कराने की सुविधा यानी इंटर-स्टेट पोर्टेबिलिटी भी उपलब्ध है। जुलाई 2026 तक अलग-अलग राज्यों के बीच 29.05 लाख से अधिक अस्पताल दाखिले करीब 8,383.97 करोड़ रुपये की अधिकृत राशि के साथ दर्ज किए गए थे।</p><h3>वृद्धजनों के लिए योजना की सौगात</h3><p>आयुष्मान भारत का दायरा पिछले कुछ वर्षों में बढ़ाया गया है। सरकार के द्वारा अक्टूबर 2024 में 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना योजना के दायरे में शामिल करने का फैसला किया गया। सरकार के मुताबिक इससे करीब 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों और 4.5 करोड़ परिवारों को लाभ मिल सकता है।</p><p>यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ अस्पताल में भर्ती होने और लंबे इलाज की जरूरत बढ़ सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य खर्च का बोझ उठाना बुजुर्ग परिवारों के लिए चुनौती बन सकता है।&nbsp;</p><h3>इलाज के खर्च से सुरक्षा</h3><p>आयुष्मान भारत का सबसे बड़ा फायदा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए महंगे इलाज के खर्च से सुरक्षा को माना जाता है। मौजूदा समय में कैंसर, हृदय रोग, गंभीर सर्जरी और अन्य बिमारियों के इलाज में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। ऐसे में 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य सुरक्षा किसी गरीब परिवार को कर्ज लेने या संपत्ति बेचने की स्थिति से बचाने में मदद कर सकता है।</p><p>सरकार के आंकड़ों के अनुसार जून 2026 तक योजना के तहत 12.69 करोड़ अस्पताल दाखिले अधिकृत हुए और इनकी राशि 1.92 लाख करोड़ रुपये रही। सरकार ने इसे जेब से होने वाले स्वास्थ्य खर्च को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।</p> <h3>सरकारी और निजी अस्पतालों का नेटवर्क</h3><p>योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों को भी इसमें शामिल करना है। इससे लाभार्थियों के पास इलाज के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध होते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में जहां सरकारी अस्पतालों में बड़ी बिमारियों के उपचार के लिए सेवाएं सीमित हैं, वहां सूचीबद्ध निजी अस्पतालों का नेटवर्क उपयोगी साबित हो रहा है।</p> <h3>इंटर-स्टेट पोर्टेबिलिटी की सुविधा</h3><p>इस योजना के अंतर्गत इंटर-स्टेट पोर्टेबिलिटी भी योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। इसका अर्थ है कि पात्र व्यक्ति अपने राज्य से बाहर जाकर भी सूचीबद्ध अस्पताल में योजना का लाभ ले सकता है। प्रवासी मजदूरों, दूसरे राज्यों में काम करने वाले लोगों और यात्रा के दौरान उपचार की जरूरत पड़ने वाले लाभार्थियों के लिए यह सुविधा विशेष महत्व रखती है।</p><h3>योजना की दूसरी तस्वीर </h3><p>जहां एक तरफ योजना से करोड़ों अस्पताल दाखिलों को वित्तीय सुरक्षा मिली है, वहीं इसके क्रियान्वयन को लेकर कई खामियां भी सामने आई हैं। CAG ने 2023 में PM-JAY के प्रदर्शन का ऑडिट किया था। यह ऑडिट सितंबर 2018 से मार्च 2021 तक की अवधि पर आधारित था। इसलिए इसकी सभी टिप्पणियों को 2026 की मौजूदा स्थिति का सीधा चित्र नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन इससे योजना के शुरुआती क्रियान्वयन की चुनौतियों का पता जरूर चलता है।</p><p>&nbsp;CAG ने अस्पतालों पर लगाए गए जुर्माने की वसूली में कमी का मुद्दा उठाया था। रिपोर्ट के मुताबिक 13 राज्यों से जुड़े 184 डिफॉल्टिंग अस्पतालों पर लगाए गए 17.28 करोड़ रुपये के जुर्माने में से केवल 4.96 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी, जबकि 12.32 करोड़ रुपये की राशि वसूल की जानी बाकी थी। इसके अलावा तीन राज्यों में लाभार्थियों की शिकायतों से जुड़े 164 अस्पतालों पर लगाए गए 4.66 करोड़ रुपये के जुर्माने की भी वसूली लंबित थी।</p><h3>फर्जी और संदिग्ध दावों की चुनौती</h3><p>स्वास्थ्य बीमा जैसी बड़ी योजना में फर्जी लाभार्थियों और गलत दावों की संभावना हमेशा रहती है। CAG की बाद की एक राज्य-स्तरीय ऑडिट रिपोर्ट में भी योजना से जुड़े संदिग्ध भुगतान और कार्ड संबंधी गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया।</p><p>&nbsp;बिहार से संबंधित CAG ऑडिट में मार्च 2024 के डेटा का विश्लेषण करते हुए 139 ऐसे आयुष्मान कार्डों के आधार पर 25.25 लाख रुपये के भुगतान का उल्लेख किया गया, जो संबंधित लाभार्थी डेटाबेस में मौजूद नहीं पाए गए। ऑडिट ने इन भुगतानों को संदिग्ध माना और अंतिम स्पष्टीकरण के लिए मामला संबंधित प्राधिकरण के पास भेजे जाने की बात दर्ज की।</p><h3>हॉस्पिटल की निगरानी भी बड़ी चुनौती</h3><p>योजना में सरकारी और निजी अस्पतालों को शामिल करने का फायदा तभी पूरी तरह मिल सकता है जब अस्पतालों की नियमित निगरानी हो। CAG की 2025 की एक ऑडिट रिपोर्ट में बिहार में कुछ अस्पतालों को निलंबित करने और बाद में डी-एम्पैनल करने की प्रक्रिया में देरी का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2020 से मार्च 2024 के बीच 23 निजी अस्पतालों को निलंबित किया गया था। इनमें से 13 को छह महीने की निर्धारित अवधि के बाद काफी देरी से डी-एम्पैनल किया गया।</p><p>&nbsp;इससे यह संकेत मिलता है कि केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। अस्पतालों की गुणवत्ता, मरीजों के साथ व्यवहार, इलाज की वास्तविकता और दावों की सत्यता की लगातार निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।</p><h3>सिर्फ बीमा से नहीं बदलेगी पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था</h3><p>आयुष्मान भारत मुख्य रूप से अस्पताल में भर्ती होने वाले इलाज के खर्च से वित्तीय सुरक्षा देता है। लेकिन देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी चुनौती केवल अस्पताल का खर्च नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति, डॉक्टरों और नर्सों की उपलब्धता, दवाइयों की पहुंच, जांच सुविधाएं और ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।</p><p>&nbsp;यही वजह है कि आयुष्मान भारत के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना भी जरूरी है। सरकार के अनुसार देश में 1.87 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित किए जा चुके हैं, जिनका उद्देश्य व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।</p> <aside><a href="https://navbharatlive.com/india/ayushman-bharat-pmjay-scheme-8-years-benefits-treatment-statistics-2026-aks03">आयुष्मान भारत योजना के 8 साल पूरे, 12.69 करोड़ अस्पताल भर्ती मामलों को मंजूरी, जानें कितनी सफल रही PM-JAY</a></aside><h3>लाभार्थियों के सामने जागरूकता की समस्या</h3><p>किसी भी सरकारी स्वास्थ्य योजना की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि लाभार्थी को अपने अधिकारों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी कितनी है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में कई लोग यह नहीं जानते कि वे योजना के पात्र हैं या किस अस्पताल में योजना के तहत इलाज मिल सकता है।</p><p>&nbsp;कई बार दस्तावेज, कार्ड, पहचान सत्यापन और अस्पताल की प्रक्रिया भी आम व्यक्ति के लिए जटिल हो सकती है। ऐसे में अस्पतालों में प्रशिक्षित सहायता कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।<a href="https://navbharatlive.com/india/89-percent-railway-stations-lack-basic-amenities-reveals-cag-report-explainer"> CAG</a> ने भी कुछ मामलों में लाभार्थियों की सहायता के लिए समर्पित और प्रशिक्षित कर्मियों की जरूरत पर जोर दिया है।</p><h3>योजना को और प्रभावी बनाने के लिए क्या जरूरी?</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/india/ai-technology-gives-wings-to-ayushman-yojana-covering-33-percentage-of-india-population-nkr24">आयुष्मान भारत योजना</a> को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कुछ बिंदुओं पर लगातार काम करने की जरूरत है। सबसे पहले, फर्जी दावों और संदिग्ध अस्पतालों की पहचान के लिए डेटा एनालिटिक्स और रियल टाइम निगरानी को मजबूत किया जाना चाहिए। दूसरा, गलत दावों पर कार्रवाई और जुर्माने की वसूली में देरी नहीं होनी चाहिए।</p><p>तीसरा, अस्पतालों को केवल संख्या के आधार पर सूचीबद्ध करने के बजाय गुणवत्ता के आधार पर लगातार परखा जाना चाहिए। चौथा, लाभार्थियों के लिए शिकायत निवारण व्यवस्था को सरल और तेज बनाया जाना चाहिए। पांचवां, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पताल आधारित बीमा के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Heavy Periods: पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग को न करें नजरअंदाज, ये 7 संकेत दिखें तो डॉक्टर से करें बात</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/periods-heavy-bleeding-warning-signs-not-to-avoid-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/periods-heavy-bleeding-warning-signs-not-to-avoid-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">8fc5a719-36ec-4abc-88fd-0b12fa6e480f</guid><pubDate>Wed, 23 Sep 2026 16:25:38 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-23T16:25:38.659+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health Tips,Health News,Women Health,period</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/z80pna94/Heavy-Bleeding-periods.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ पीरियड्स]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ periods heavy bleeding warning signs not to avoid.]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/z80pna94/Heavy-Bleeding-periods.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Women Menstrual Health:</strong> पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग की मात्रा हर महिला में अलग हो सकती है। कुछ महिलाओं को सामान्य से ज्यादा ब्लीडिंग होती है, लेकिन अगर हर महीने माहवारी के दौरान हैवी ब्लीडिंग होती है, जिससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं, तो यह सामान्य बात नहीं हो सकती है।</p><p>एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि बहुत ज्यादा या असामान्य ब्लीडिंग के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। जानिए इससे जुड़े कुछ लक्षणों के बारे में।</p><h3>7 दिन से ज्यादा चले पीरियड्स</h3><p>आमतौर पर पीरियड्स 2 से 7 दिन तक रह सकते हैं। अगर ब्लीडिंग लगातार 7 दिन से ज्यादा चलती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है। जरूरत से ज्यादा ब्लीडिंग शरीर में किसी अन्य समस्या के लक्षण हो सकते हैं।</p><h3>हर घंटे पैड बदलने की जरूरत पड़े</h3><p>अगर कई दिनों तक हर घंटे एक या उससे ज्यादा पैड पूरी तरह भीग जाए, तो यह हैवी ब्लीडिंग का संकेत है। ऐसी स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।</p><h3>रात में भी बार-बार उठना पड़े</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/home-remedy-for-delay-in-periods-parsley-and-methi-kadha-can-regulate-the-periods-1782107.html">महिलाओं में पीरियड्स</a> के दौरान अगर ब्लीडिंग इतनी ज्यादा है कि रात में बार-बार उठकर पैड बदलना पड़ रहा है या कपड़े और बेड तक दाग लग जाते हैं, तो यह भी हैवी पीरियड्स के लक्षण हैं।</p><h3>बड़े-बड़े ब्लड क्लॉट्स का आना</h3><p>पीरियड्स में छोटे क्लॉट्स का आना सामान्य हो सकता है, लेकिन बार-बार बड़े ब्लड क्लॉट्स निकलना हैवी ब्लीडिंग के साथ जुड़ा हो सकता है। ऐसे बदलाव पर डॉक्टर से बात करने की जरूरत है।</p><h3>पीरियड्स की वजह से डेली लाइफ प्रभावित होना</h3><p>अगर हैवी ब्लीडिंग के कारण ऑफिस, एक्सरसाइज, बाहर जाना या दूसरे सामान्य काम करने में समस्या आ रही है, तो इसे सामान्य मानकर सहते रहना जरूरी नहीं है। इसका कारण पता करने के लिए डॉक्टरी सलाह ली जानी चाहिए।</p><h3>बहुत ज्यादा थकान या सांस फूलना</h3><p>लंबे समय तक ज्यादा ब्लीडिंग होने पर <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/iron-deficiency-symptoms-in-women-hindi-1524266.html">महिलाओं में आयरन की कमी</a> और एनीमिया का खतरा हो सकता है। लगातार थकान या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/restless-legs-awareness-day-symptoms-cause-rrs05">Restless Legs Awareness Day: रात में पैरों को स्थिर रखना क्यों हो जाता है मुश्किल? जानें कारण और लक्षण</a></aside><h3>पीरियड्स के बीच भी ब्लीडिंग हो</h3><p>अगर पीरियड्स खत्म होने के बाद दोबारा ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होने लगे, या सेक्स के बाद ब्लीडिंग हो, तो यह सामान्य पीरियड्स का हिस्सा नहीं है। ऐसी हालत में डॉक्टरी परामर्श लेना जरूरी हो जाता है।</p><h3>इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं?</h3><p>हैवी या असामान्य ब्लीडिंग के कई कारण हो सकते हैं। इनमें हार्मोनल बदलाव, ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्या, फाइब्रॉइड, पॉलिप, एडिनोमायोसिस, एंडोमेट्रियोसिस, कुछ दवाएं और ब्लीडिंग डिसऑर्डर जैसे कारण हो सकते हैं। कुछ महिलाओं में पीसीओएस या थायरॉइड की समस्या भी हैवी ब्लीडिंग का कारण होती है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Monsoon Diet: बरसात में दही खाना सही या गलत? जानें ठंडी चीजों को लेकर क्या रखें सावधानी</title><link>https://navbharatlive.com/ampstories/web-stories/monsoon-curd-cold-foods-eating-tips-rainy-season-asp28</link><comments>https://navbharatlive.com/ampstories/web-stories/monsoon-curd-cold-foods-eating-tips-rainy-season-asp28#comments</comments><guid isPermaLink="false">e8a2bace-15e0-4ee8-b464-70f334d5005c</guid><pubDate>Wed, 23 Sep 2026 10:54:07 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-23T10:54:07.351+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>अंकिता पटेल</atom:name><atom:uri>/api/author/2548001</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Latest Hindi News,Lifestyle News,Health Tips</media:keywords><media:content height="1280" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/ij44luxf/Curd-in-monsoon-11.jpg" width="720"><media:title type="html"><![CDATA[ बरसात में दही]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Curd During Monsoon]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/ij44luxf/Curd-in-monsoon-11.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>वेब स्टोरीज़</category><category>हेल्थ</category><category>लाइफस्टाइल</category><content:encoded><![CDATA[ <h2>बरसात में खान-पान पर दें ध्यान</h2><p>बारिश के मौसम में नमी और तापमान में बदलाव के कारण भोजन को सुरक्षित रखना जरूरी हो जाता है। इसलिए दही और ठंडी चीजों का सेवन सोच-समझकर करें।</p><figure><img alt="Pay attention to your diet during the rainy season" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/zvvok8b8/Curd-in-monsoon.jpg" /><figcaption>बरसात में खान-पान पर दें ध्यान</figcaption></figure><h2>दही पूरी तरह बंद नहीं</h2><p>बरसात में दही खाना सभी के लिए हानिकारक नहीं है। अगर दही ताजा, साफ और सही तरीके से रखा गया है, तो सामान्य मात्रा में इसका सेवन किया जा सकता है।</p><figure><img alt="Curd is not completely stopped" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/7mg0i30s/Curd-in-monsoon-1.jpg" /><figcaption>दही पूरी तरह बंद नहीं</figcaption></figure><h2>खराब दही से बचें</h2><p>लंबे समय तक बाहर रखा या खराब तरीके से रखा दही दूषित हो सकता है। असामान्य गंध, स्वाद या बनावट दिखे तो इसे खाने से बचें।</p><figure><img alt="Avoid spoiled curd" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/pu3vyrku/Curd-in-monsoon-2.jpg" /><figcaption>खराब दही से बचें</figcaption></figure><h2>ठंडी चीजों में रखें सावधानी</h2><p>आइसक्रीम, ठंडे पेय और अन्य ठंडी चीजें अगर सही तापमान पर न रखी जाएं, तो उनमें हानिकारक सूक्ष्मजीव बढ़ सकते हैं।</p><figure><img alt="Exercise caution with cold items" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/kwzk1or3/Curd-in-monsoon-3.jpg" /><figcaption>ठंडी चीजों में रखें सावधानी</figcaption></figure><h2>पाचन पर पड़ सकता है असर</h2><p>कुछ लोगों को बहुत ठंडी चीजें खाने के बाद पेट फूलना, असहजता या पाचन संबंधी परेशानी महसूस हो सकती है। ऐसा हो तो सेवन कम करना बेहतर है।</p><figure><img alt="It could affect digestion" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/vh55senn/Curd-in-monsoon-4.jpg" /><figcaption>पाचन पर पड़ सकता है असर</figcaption></figure><h3>बाहर का खाना सोचकर खाएं</h3><p>बारिश में खुले में रखे खाद्य पदार्थों पर धूल, गंदगी और दूषित पानी का असर पड़ सकता है। इसलिए ताजा और स्वच्छ भोजन चुनना जरूरी है।</p><figure><img alt="Be mindful when eating out" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/qpxos4eh/Curd-in-monsoon-5.jpg" /><figcaption>बाहर का खाना सोचकर खाएं</figcaption></figure><h2>दही सही तरीके से रखें</h2><p>दही को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखने के बजाय उचित तापमान पर रेफ्रिजरेटर में रखना बेहतर है। साफ चम्मच से ही इसे निकालें।</p><figure><img alt="Store curd properly" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/aczgir2a/Curd-in-monsoon-6.jpg" /><figcaption>दही सही तरीके से रखें</figcaption></figure><h2>हर व्यक्ति की जरूरत अलग</h2><p>दही से परेशानी होना व्यक्ति की सहनशीलता और स्वास्थ्य पर निर्भर कर सकता है। किसी खास खाद्य पदार्थ से बार-बार समस्या हो तो विशेषज्ञ से सलाह लें।</p><figure><img alt="Everyone&apos;s needs are different" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/uhtt7eop/Curd-in-monsoon-7.jpg" /><figcaption>हर व्यक्ति की जरूरत अलग</figcaption></figure><h2>ताजा और स्वच्छ भोजन चुनें</h2><p>बरसात में भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। ताजा बना भोजन और सुरक्षित तरीके से रखा खाद्य पदार्थ प्राथमिकता में रखें।</p><figure><img alt="Choose fresh and clean food" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/p9zwc3yn/Curd-in-monsoon-8.jpg" /><figcaption>ताजा और स्वच्छ भोजन चुनें</figcaption></figure><h2>दही छोड़ना जरूरी नहीं</h2><p>बरसात में दही और ठंडी चीजों को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है। असली सावधानी है-ताजगी, स्वच्छता, सही भंडारण और अपनी सेहत के अनुसार सेवन।</p><figure><img alt="It is not necessary to give up curd" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/k4d20vfr/Curd-in-monsoon-9.jpg" /><figcaption>दही छोड़ना जरूरी नहीं</figcaption></figure><figure><img alt="" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/0n4hr9gh/men-wallet-10.jpg" /></figure><a class="cta-anchor" href="https://navbharatlive.com/ampstories/web-stories/mens-wallet-10-unique-designs-bifold-slim-card-holder-travel-wallet-asp28" target="_blank" rel=""><span class="cta-text">Swipe Up</span></a><h3>Men Wallet Designs: पुरुषों के लिए कौन सा वॉलेट रहेगा परफेक्ट? देखें 10 यूनिक डिजाइन</h3>]]></content:encoded></item><item><title>Restless Legs Awareness Day: रात में पैरों को स्थिर रखना क्यों हो जाता है मुश्किल? जानें कारण और लक्षण</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/restless-legs-awareness-day-symptoms-cause-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/restless-legs-awareness-day-symptoms-cause-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">67ed83d5-ed24-4d18-b4c1-b060fef8c76f</guid><pubDate>Wed, 23 Sep 2026 10:13:13 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-23T10:13:13.446+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Good Health,Health Tips,Health News,Today&apos;s Special News</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/lcpg6ndr/Restless-Legs-Day.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ पैरों में दर्द]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Restless legs awareness day symptoms cause.]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/lcpg6ndr/Restless-Legs-Day.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Restless Legs Awareness Day:</strong> कई लोगों को रात में बिस्तर पर लेटते ही पैरों में अजीब सी बेचैनी होने लगती है? कभी पैरों में खिंचाव, झुनझुनाहट या कुछ रेंगने जैसा महसूस होता है और पैर को इधर-उधर चलाने के बाद ही थोड़ा आराम मिलता है?</p><p>अगर ऐसा बार-बार होता है, तो इसे सिर्फ थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (RLS) की वजह से हो सकता है। यह एक <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/sleep-divorce-trends-benefits-for-married-couples-health-india-1637264.html">स्लीप डिसऑर्डर</a> है, जिसमें आराम करते समय पैरों को चलाने की इच्छा होने लगती है।</p><h3>क्या है रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम?</h3><p>रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम में व्यक्ति को पैरों में ऐसी बेचैनी महसूस होती है, जिससे नींद नहीं आती है। इसे कम करने के लिए पैर चलाने, स्ट्रेच करने या उठकर चलने का मन करता है। इसके लक्षण आमतौर पर आराम करने पर और खासकर शाम या रात में ज्यादा महसूस होते हैं। पैर चलाने से कुछ समय के लिए राहत मिलती है।</p><h3>पैरों में कैसी परेशानी महसूस होती है?</h3><p>इस समस्या से जूझ रहे व्यक्ति के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों को पैरों में खिंचाव या दर्द महसूस होता है, तो कुछ को खुजली, जलन, धड़कन या कुछ रेंगने जैसा महसूस होता है। कई बार यह बेचैनी दोनों पैरों में महसूस होती है, तो कई बार केवल एक पैर में।</p><h3>रात में ही क्यों बढ़ जाती है बेचैनी?</h3><p>रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम के लक्षण आमतौर पर तब बढ़ते हैं, जब व्यक्ति लंबे समय तक आराम कर रहा होता है। इसलिए बिस्तर पर लेटने या लंबे समय तक बैठने के दौरान पैरों को चलाने की इच्छा होती है। यह परेशानी नींद आने या पूरी रात सोए रहने में भी समस्या पैदा कर सकती है।</p><h3>इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं?</h3><p>रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम का एक निश्चित कारण हर मामले में पता नहीं होता। इसका कारण आयरन, जेनेटिक कारण और दिमाग में डोपामिन का प्रभाव हो सकता है। <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/iron-deficiency-5-warning-signs-your-body-shows-before-iron-levels-drop-1802211.html">आयरन की कमी</a> से होने वाला एनीमिया, किडनी की बीमारी और प्रेग्नेंसी जैसी स्थितियां भी कुछ लोगों में RLS से जुड़ी हो सकती हैं। कुछ दवाइंया भी इसका कारण हो सकता है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/high-protein-fasting-diet-vrat-food-combinations-rrs05">High Protein Fasting Diet: व्रत में नहीं लगेगी कमजोरी, ये हाई-प्रोटीन फलाहार कॉम्बिनेशन देंगे भरपूर एनर्जी</a></aside><h3>राहत के लिए क्या कर सकते हैं?</h3><p>नियमित एक्सरसाइज, सोने से पहले पैरों की स्ट्रेचिंग, गर्म पानी में पैर डुबोना और पर्याप्त नींद लेने से आराम मिल सकता है। सोने से पहले कैफीन और शराब से बचने की सलाह भी दी जाती है। अगर पैरों की बेचैनी बार-बार हो रही है, नींद प्रभावित हो रही है या दिन में थकान और नींद आने लगी है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। इसके बारे में सटीक रूप से पता लगाने के लिए जांच जरूरी है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>बगैर पर्ची के दवा लेना जोखिम भरा, ड्रग्स कंट्रोलर ने चेतावनी जारी की; हो सकता है किडनी फेल</title><link>https://navbharatlive.com/india/buying-medicines-without-a-prescription-is-risky-drug-controller-issues-warning-could-lead-to-kidney-failure-nkr24</link><comments>https://navbharatlive.com/india/buying-medicines-without-a-prescription-is-risky-drug-controller-issues-warning-could-lead-to-kidney-failure-nkr24#comments</comments><guid isPermaLink="false">ba5edd60-6b34-4baf-a641-08aaf8dc2baf</guid><pubDate>Wed, 23 Sep 2026 09:49:42 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-23T09:49:42.255+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>नितिन कुमार राय</atom:name><atom:uri>/api/author/2590629</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Medical Hospital,Health Ministry,Food and Drug Administration,district health department</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/2fk2c3vz/MEDICAL-SHOP.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ मेडिकल दुकान]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ No Medicines Without Doctor Prescription]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-23/2fk2c3vz/MEDICAL-SHOP.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>देश</category><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>No Medicines Without Doctor Prescription</strong>: देश की सबसे बड़ी दवा नियामक संस्था यानी CDSCO (सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन) ने पेन किलर और एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते उपयोग को लेकर चिंता जाहिर की है। खासकर उन लोगों को लेकर जो हल्का सा सिरदर्द, बदन दर्द या बुखार होने पर मेडिकल स्टोर से सीधे दवा खरीदते हैं। इसके अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए एक सख्त चेतावनी दी। चेतावनी में स्पष्ट कहा गया है कि बिना डॉक्टरी की सलाह के इन दवाओं का लगातार उपयोग से इंसान को क्रोनिक किडनी डिजीज का खतरा बना रहा है।</p><h3>दवाओं का बेहिसाब इस्तेमाल</h3><p>हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स, फार्मेसी, रिटेलर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स और अस्पतालों के लिए एक एडवाइजरी में इन दवाओं के बिना रोक-टोक और बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल से जुड़े गंभीर मेडिकल जोखिमों पर जोर दिया गया है और साफ तौर पर बताया गया है कि इनके बेहिसाब इस्तेमाल से क्रोनिक किडनी डिजीज हो सकती है और यह तेजी से बढ़ सकती है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (<a href="https://navbharatlive.com/india/who-issues-warning-after-children-die-from-cough-syrup-labels-3-indian-cough-syrups-as-dangerous-1391942.html">CDSCO</a>) ने लोगों को इससे बचने की सलाह दी है।</p><h3>पेनकिलर और एंटीबायोटिक्स से सीधा खतरा</h3><p>हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, बिना जरूरत या लंबे समय तक पेनकिलर और हैवी <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/keep-these-5-things-in-mind-while-taking-antibiotics-1472354.html">एंटीबायोटिक्स </a>की डोज लेने से किडनी के टिश्यूज को गंभीर नुकसान पहुंचता है। CDSCO के सर्कुलर में स्पष्ट कहा गया है कि इन दवाओं का अनियंत्रित उपयोग किडनी फेलियर जैसी खतरनाक स्थितियों को निमंत्रण दे रहा है। इसके अलावा, बार-बार बिना वजह एंटीबायोटिक खाने से शरीर में 'एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस' बढ़ जाता है, जिसका सीधा मतलब है कि भविष्य में गंभीर बीमारी होने पर शरीर पर दवाएं असर करना बंद कर देती हैं।</p><figure><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr">The Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) has issued an advisory circular addressed to healthcare professionals, pharmacies, retailers, distributors, and hospitals regarding the indiscriminate use of painkillers, specifically Non-Steroidal Anti-Inflammatory Drugs… <a href="https://t.co/aXQIO1NTbW">pic.twitter.com/aXQIO1NTbW</a></p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://x.com/ANI/status/2102365476877914430?ref_src=twsrc%5Etfw">September 22, 2026</a></blockquote>
<script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>

</figure><h3>मेडिकल स्टोर्स पर भी सख्ती की तैयारी</h3><p>CDSCO ने दवाओं के इस अंधाधुंध दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अब बिना डॉक्टर के वैध पर्चे के मेडिकल स्टोर संचालक पेनकिलर और एंटीबायोटिक्स नहीं बेच सकेंगे। निर्देश में कहा गया है कि इन दवाओं की बिक्री केवल मेडिकल सुपरविजन में ही होनी चाहिए। इसके लिए देश भर के ड्रग इंस्पेक्टरों और राज्य दवा नियंत्रकों को कड़े कदम उठाने और नियमों का पालन न करने वाले मेडिकल स्टोर्स पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/india/who-issues-warning-after-children-die-from-cough-syrup-labels-3-indian-cough-syrups-as-dangerous-1391942.html">WHO ने जारी की चेतावनी, भारत की 3 कफ सिरप को बताया खतरनाक, CDSCO से पूछे सवाल</a></aside><h3>जान को जोखिम में न डालने की सलाह</h3><p>स्वास्थ्य विभाग ने देश के लोगों से कहा है कि वे छोटी-मोटी तकलीफों के लिए खुद से दवाइयां न लें. किसी भी तरह का दर्द या इन्फेक्शन होने पर सबसे पहले किसी काबिल डॉक्टर से दिखाएं. इसके बाद डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा ही तय खुराक में और सही समय तक लें। अपनी मनमर्जी से दवा की खुराक बढ़ाना या आधी-अधूरी छोड़ना लोगों की स्वास्थ्य के लिए बेहतर खतरनाक साबित हो सकता है। &nbsp;</p>]]></content:encoded></item><item><title>High Protein Fasting Diet: व्रत में नहीं लगेगी कमजोरी, ये हाई-प्रोटीन फलाहार कॉम्बिनेशन देंगे भरपूर एनर्जी</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/high-protein-fasting-diet-vrat-food-combinations-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/high-protein-fasting-diet-vrat-food-combinations-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">f3a68888-4dac-4f3e-9fab-7759774a231a</guid><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 12:00:42 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-22T12:00:42.210+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Food Tips,Festival Special,Protein,Vrat Tyohar,Ekadashi Fast</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-22/004fcc55/Protein-Rich-diet-Food.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ HIgh Protein Vrat ki thali]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ High protein fasting diet vrat food combinations. ]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-22/004fcc55/Protein-Rich-diet-Food.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Protein Rich Falahari Foods:</strong> आमतौर पर व्रत के दौरान ज्यादातर लोग पेट भरने के लिए साबूदाना, आलू, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें खाते हैं। इनसे शरीर को एनर्जी तो मिल सकती है, लेकिन अगर पूरे दिन के फलाहार में प्रोटीन की मात्रा कम रह जाए तो बार-बार भूख लगती है और साथ ही कमजोरी या थकान भी अधिक महसूस होने लगती है।</p><p>इसलिए व्रत के दौरान सिर्फ कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों की बजाय दूध, दही, पनीर, मूंगफली, मखाना और ड्राई फ्रूट्स जैसे विकल्पों को सही कॉम्बिनेशन में खाना चाहिए। तरीके से मिलाना उपयोगी हो सकता है। 2026 की नवरात्रि डाइट पर प्रकाशित पोषण संबंधी सुझावों में भी पनीर, मूंगफली, मखाना, दूध और दही को व्रत के दौरान प्रोटीन के स्रोत के तौर पर शामिल किया गया है।</p><h3>पनीर-दही का कॉम्बिनेशन</h3><p>अगर आपके व्रत में डेयरी प्रोडक्ट के सेवन की अनुमति है, तो पनीर और दही एक साथ लेना अच्छा विकल्प हो सकता है। करीब 75-100 ग्राम पनीर के साथ एक कटोरी सादा दही लिया जा सकता है। इसमें खीरा, टमाटर या व्रत में मान्य फल-सब्जियां शामिल कर सकते हैं। पनीर प्रोटीन देता है, जबकि दही से प्रोटीन के साथ कैल्शियम भी मिलता है।</p><h3>दूध-मखाना-मूंगफली</h3><p>मखाने को हल्का भूनकर दूध के साथ लिया जा सकता है। इसमें थोड़ी मात्रा में भुनी मूंगफली और बादाम मिलाने से प्रोटीन और हेल्दी फैट बढ़ जाता है। मखाना अकेले बहुत हाई-प्रोटीन फूड नहीं है, इसलिए इसे दूध और नट्स के साथ लेने से यह एक बैलेंस्ड मील बन जाता है। &nbsp;</p><h3>दही-फल-ड्राई फ्रूट्स</h3><p>एक कटोरी सादा दही में केला, सेब या पपीता जैसे फल और थोड़े बादाम-अखरोट मिलाकर खा सकते हैं। अगर आपको लंबे समय तक पेट भरा रखना है, तो सिर्फ फल खाने के बजाय फल के साथ दही और थोड़े नट्स मिलाने से एक बेहतर कंप्लीट प्रोटीन मील तैयार हो सकता है। &nbsp;</p><h3>कुट्टू या सिंघाड़े की रोटी-पनीर</h3><p>जिन परिवारों में कुट्टू या <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/kuttu-atta-benefits-for-weight-loss-and-bp-control-during-navratri-fast-1623432.html">सिंघाड़े का आटा </a>व्रत में खाने का चलन है, वहां इसकी रोटी के साथ पनीर की सब्जी या सादा पनीर लिया जा सकता है। इससे सिर्फ आटे और आलू पर निर्भर रहने के बजाय भोजन में प्रोटीन भी जुड़ जाता है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/best-fruits-for-blood-sugar-control-rrs05">Blood Sugar Control: इन फलों को खाने से नहीं बढ़ेगा ब्लड शुगर, डाइट में जरूर करें शामिल</a></aside><h3>साबूदाना खिचड़ी में मूंगफली जरूर</h3><p>साबूदाना मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट देता है। इसलिए <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/food/sawan-2026-sabudana-recipes-for-vrat-1899442.html">साबूदाना खिचड़ी</a> बनाते समय मूंगफली डालना इसे ज्यादा संतुलित बनाता है। हालांकि इसे अकेला हाई-प्रोटीन भोजन नहीं कहना चाहिए। साथ में दही लिया जा सकता है।</p><h3>व्रत में ये गलती न करें</h3><p>व्रत में पूरे दिन केवल चाय, फल, आलू या साबूदाना खाने से डाइट बैलेंस नहीं हो सकती है। वहीं तली हुई कुट्टू पूरी, पकौड़े और ज्यादा घी वाली चीजें खाने से कैलोरी काफी बढ़ सकती है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Blood Sugar Control: इन फलों को खाने से नहीं बढ़ेगा ब्लड शुगर, डाइट में जरूर करें शामिल</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/best-fruits-for-blood-sugar-control-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/best-fruits-for-blood-sugar-control-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">576afede-4499-4313-b6aa-2a58a6da0fb9</guid><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 11:20:19 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-22T11:20:19.848+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health Tips,special Diet,Diabetes</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-22/0wtvlppb/Fruit-for-Diabetes.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ फल]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Best fruits for blood sugar control.]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-22/0wtvlppb/Fruit-for-Diabetes.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Fruits For Blood Sugar Control:</strong> अगर आप डायबिटीज के मरीज है या ब्लड शुगर बढ़ने का डर रहता है, तो आमतौर पर लोग फल खाना छोड़ देते हैं। दरअसल, फल पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं होती। फलों में नेचुरल शुगर यानी फ्रूकटोज के साथ फाइबर, विटामिन और मिनरल्स भी होते हैं।</p><p>खास बात यह है कि फल खाना अधिक सुरक्षित है। फलों का जूस डायबिटीज के मरीजों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। फलों में शुगर के साथ फाइबर की मात्रा भी काफी होती है, जब कि जूस में केवल शुगर की मात्रा होती है।</p><h3>अमरूद</h3><p>अमरूद फाइबर वाला फल है और इसे साबुत खाने पर पेट भी ज्यादा देर तक भरा हुआ महसूस होता है। डायबिटीज या ब्लड शुगर की चिंता करने वाले लोग इसे अपनी डाइट में एक लिमिट में शामिल कर सकते हैं।</p><h3>सेब को छिलके के साथ खाएं</h3><p>सेब में फाइबर होता है और इसे साबुत खाना जूस पीने से बेहतर है। अगर आप ब्लड शुगर मैनेज कर रहे हैं तो छोटे आकार का पूरा सेब स्नैक के तौर पर खाया जा सकता है।</p><h3>नाशपाती भी है अच्छा ऑप्शन</h3><p>नाशपाती में फाइबर पाया जाता है और इसे साबुत फल की तरह खना चाहिए। इसे काटकर या इसका जूस निकालकर खाने के बजाय पूरा फल खाने से फाइबर का फायदा मिलता है।</p><h3>बेरीज को भी कर सकते हैं शामिल</h3><p>स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी और ब्लैकबेरी जैसे फलों को भी डाइट में शामिल किया जा सकता है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन ताजे, फ्रोजन या बिना शुगर वाले फलों को बेहतर विकल्प मानता है।</p><h3>संतरा खाएं, जूस नहीं</h3><p>संतरा भी फल के रूप में खाया जा सकता है, लेकिन इसका जूस पीने से बचना चाहिए। साबुत फल में मौजूद फाइबर पाचन को धीमा करता है, जबकि जूस आसानी से ज्यादा मात्रा में पी लिया जाता है और उसमें फाइबर कम हो सकता है और शुगर की मात्रा अधिक होती है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/bad-cholesterol-5-seeds-lower-ldl-how-to-eat-rrs05">Bad Cholesterol: 5 छोटे-छोटे बीज कर सकते हैं बड़ा काम, LDL के लिए ऐसे करें डाइट में शामिल</a></aside><h3>फल खाते समय इन बातों का रखें ध्यान</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/blood-sugar-control-why-blood-sugar-rises-without-eating-sweets-1897355.html">ब्लड शुगर कंट्रोल</a> में रहना शरीर की फंक्शनिंग के लिए जरूरी है। फल हेल्दी होने के बावजूद इनमें कार्बोहाइड्रेट और नेचुरल शुगर होती है। इसलिए फलों की मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार, एक छोटा साबुत फल या लगभग आधा कप फल में सामान्य तौर पर करीब 15 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है, लेकिन सभी फलों में यह मात्रा समान नहीं होती है।</p><p>बल्ड शुगर को कंट्रोल में रखने लिए एक हेल्दी <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/diabetes-me-kaunsi-sabji-kam-khani-chahiye-8-vegetables-blood-sugar-rrs05">डायबिटीज डाइट</a> का ख्याल रखना अधिक जरूरी है। </p>]]></content:encoded></item><item><title>हेल्थकेयर में AI टेक का अचूक इस्तेमाल, भारत ने गाइडबुक के तौर किया पेश; NY में स्वास्थ्य सचिव ने बताया अनुभव </title><link>https://navbharatlive.com/technology/india-presents-a-guidebook-on-the-effective-use-of-ai-technology-in-healthcare-health-secretary-shares-experience-in-new-york-nkr24</link><comments>https://navbharatlive.com/technology/india-presents-a-guidebook-on-the-effective-use-of-ai-technology-in-healthcare-health-secretary-shares-experience-in-new-york-nkr24#comments</comments><guid isPermaLink="false">513c1944-f44e-4ed8-abfa-7091a42b76df</guid><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 08:22:29 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-22T08:22:29.300+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>नितिन कुमार राय</atom:name><atom:uri>/api/author/2590629</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Artificial Intelligence,Health Ministry,Health Center</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-22/juzmyjje/Health-Secy-Punya-Salila.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ न्यूयॉर्क में स्वास्थ्य सचिव]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ AI In Health Service]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-22/juzmyjje/Health-Secy-Punya-Salila.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>टेक्नॉलजी</category><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>AI Use In HealthCare</strong>: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने न्यूयॉर्क में भारत के वाणिज्य दूतावास में "ग्राउंडिंग द फ्रंटियर: ए ग्लोबल साउथ AI फ्रेमवर्क" पर एक चर्चा के दौरान, ग्लोबल साउथ के लिए AI और डिजिटल हेल्थ इनोवेशन का इस्तेमाल करने के भारत के अनुभव के बारे में बात की। मेरिडियन इंटरनेशनल सेंटर और प्राइमस पार्टनर्स द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सत्र में ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल के साथ बातचीत हुई। इस दौरान उन्होंने बताया कि भारत दिखा रहा है कि कैसे मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से बड़े पैमाने पर हेल्थकेयर सर्विस को बदला जा सकता है।</p><h3>हेल्थ-टेक यात्रा पर चर्चा</h3><p>भारत की हेल्थ-टेक यात्रा पर चर्चा करते हुए श्रीवास्तव ने बताया कि कैसे आधार के ज़रिए बनाए गए डिजिटल आधार और बाद में <a href="https://navbharatlive.com/maharashtra/gondia/gondia-ayushman-bharat-751-lakh-beneficiaries-asl01">आयुष्मान भारत</a> डिजिटल मिशन और ABHA ID के जरिए मजबूत किए गए सिस्टम ने भारत को एक स्केलेबल और इंटरऑपरेबल डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम बनाने में सक्षम बनाया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि AI मॉडल को इनसे सीखना चाहिए ताकि वे ऐसे समाधान दे सकें जो उन लोगों के लिए सार्थक और प्रासंगिक हों।</p><figure><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr">    ,         ,      … <a href="https://t.co/axVCYjnIri">pic.twitter.com/axVCYjnIri</a></p>&mdash; Ministry of Health (@MoHFW_INDIA) <a href="https://x.com/MoHFW_INDIA/status/2102219764244644328?ref_src=twsrc%5Etfw">September 22, 2026</a></blockquote>
<script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>

</figure><h3>एआई इनेबल क्लिनिकल फैसला</h3><p>उन्होंने हेल्थकेयर में AI के बढ़ते इस्तेमाल पर प्रकाश डाला, जिसमें AI-इनेबल क्लिनिकल निर्णय सहायता, लंबे समय के स्वास्थ्य रिकॉर्ड और बीमारी के हॉटस्पॉट की पहचान शामिल है। उन्होंने दिखाया कि कैसे तकनीक इनोवेशन से वास्तविक दुनिया में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर डालने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। श्रीवास्तव ने हेल्थकेयर में AI के जिम्मेदार और असरदार इस्तेमाल के लिए 'AI इन <a href="https://navbharatlive.com/uttar-pradesh/lucknow/up-japan-healthcare-partnership-robotics-medical-education-investment">हेल्थकेयर</a>' रणनीति को एक गाइडबुक के तौर पर पेश किया और टेक्नोलॉजी-बेस्ड समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने के भारत के अनुभव पर जोर दिया।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/technology/regulations-needed-for-ais-growing-impact-discussions-underway-with-companies-on-a-techno-legal-framework-nkr24">AI के बढ़ते प्रभाव के लिए नियम की जरूरत, टेक्नो-लीगल फ्रेमवर्क के लिए कंपनियों के साथ बातचीत</a></aside><h3>दुनियाभर के एक्सपर्ट हुए शामिल</h3><p>इस चर्चा में इस बात पर गौर किया गया कि कैसे AI 'ग्लोबल साउथ' में हेल्थकेयर और विकास के नतीजों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, जिसमें 'सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स' की दिशा में तेजी से प्रगति करना भी शामिल है। इस सेशन में AI कंपनियों, मल्टीलेटरल संगठनों, अमेरिकी नीति-निर्माताओं, थिंक टैंक और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने ऐसे AI इकोसिस्टम बनाने पर बातचीत की जो समावेशी, ज़िम्मेदार, संदर्भ के अनुकूल और 'ग्लोबल साउथ' की जरूरतों के हिसाब से हों।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Green Walnut Benefits: हरे अखरोट को हल्के में न लें, जानें कच्चे अखरोट के 5 खास फायदे</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/green-walnut-benefits-raw-walnut-health-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/green-walnut-benefits-raw-walnut-health-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">2da18093-f7b7-4c8a-9530-91fded2010a8</guid><pubDate>Mon, 21 Sep 2026 15:59:41 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-21T15:59:41.833+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health Tips,Health News,Heart Attacks</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-21/acjnz81h/Green-walnut.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ कच्चे अखरोट]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Green walnut benefits raw walnut health.]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-21/acjnz81h/Green-walnut.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Raw Green Walnut Benefits:</strong> अखरोट आपने कई बार खाया होगा, लेकिन क्या आपने ग्रीन वॉलनट यानी कच्चा या अधपका अखरोट देखा है? बाहर से हरे छिलके वाला यह अखरोट पूरी तरह पकने से पहले तोड़ा जाता है। पका हुआ अखरोट हरे अखरोट से अलग होता है।</p><p>इसका स्वाद सामान्य अखरोट से अलग, थोड़ा कसैला और फ्रेश होता है। ग्रीन वॉलनट में पॉलीफेनॉल, एंटीऑक्सीडेंट और दूसरे बायोएक्टिव कंपाउंड्स मौजूद होते हैं।</p><h3>एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है</h3><p>ग्रीन वॉलनट में कई तरह के पॉलीफेनॉल पाए जाते हैं। ये कंपाउंड शरीर में <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/benefits-of-sarvangasana-for-thyroid-and-stress-relief-know-how-to-do-it-1585816.html">ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस</a> से बचाते हैं। कच्चे अखरोट में पकने के साथ पॉलीफेनॉल की मात्रा बदल जाती है।</p><h3>दिल की सेहत के लिए उपयोगी</h3><p>ग्रीन वॉलनट में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं। सामान्य अखरोट पर हुई रिसर्च में इसके सेवन से लिपिड प्रोफाइल बेहतर होने का पता चलता है।</p><h3>पॉलीफेनॉल का अच्छा स्रोत</h3><p>अखरोट के अलग-अलग हिस्सों में पॉलीफेनॉल और दूसरे <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/bad-cholesterol-5-seeds-lower-ldl-how-to-eat-rrs05">बायोएक्टिव कंपाउंड</a> पाए जाते हैं। खासतौर पर अखरोट के छिलके और हरे हिस्से में भी ऐसे कंपाउंड मौजूद होते हैं।</p><h3>पोषण से है भरपूर</h3><p>ग्रीन वॉलनट में फैटी एसिड, विटामिन, मिनरल और दूसरे बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। 2024 की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि इसमें पोषण भरपूर मात्रा में होता है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/ibs-gut-health-phone-screen-time-oral-health-pet-ki-sehat-rrs05">IBS and Gut Health: क्या लंबे समय तक फोन चलाना और Oral Health की अनदेखी भी बिगाड़ सकती है पेट की सेहत?</a></aside><h3>इसे कैसे खाएं?</h3><p>ग्रीन वॉलनट को कई जगह अचार, मिठाइयों और दूसरे पारंपरिक खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल किया जाता है। इसे खाने से पहले देखना जरूरी है कि फल खाने योग्य हो और अच्छी तरह साफ किया गया हो। इसके हरे छिलके को बिना जानकारी के सीधे खाने या घरेलू औषधि की तरह इस्तेमाल न करें।</p><p>बता दें कि फ्रेश हरे अखरोट तब तोड़े जाते हैं, जब उनका बाहरी छिलका भी फ्रेश होता है और अंदरूनी छिलका अभी भी नरम होता है। इस अवस्था में अखरोट में नमी अधिक होती है और अखरोट की गिरी नरम, मलाईदार और स्वाद में हल्की होती है, लेकिन यह बहुत जल्दी खराब हो जाता है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Pregnancy After 40: 40 के बाद प्रेग्नेंसी प्लान कर रहे हैं? जानें रिस्क फैक्टर और जरूरी सावधानियां</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/pregnancy-after-40-risk-factors-precautions-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/pregnancy-after-40-risk-factors-precautions-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">cfccd4c9-aee2-4f0b-95ef-4dbbf6ab4f5d</guid><pubDate>Mon, 21 Sep 2026 09:16:45 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-21T09:16:45.887+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health Tips,Health News,Women Health</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-21/movls0ys/Pregnancy-after-40.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ प्रेग्नेंसी]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Pregnancy after 40 risk factors precautions ]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-21/movls0ys/Pregnancy-after-40.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>High Risk Pregnancy:</strong> पाकिस्तानी एक्ट्रेस माहिरा खान 41 साल की उम्र में दूसरी बार मां बनने वाली हैं। उन्होंने हाल ही में बताया कि उन्होंने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी प्लान नहीं की थी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि 24 साल की उम्र में मां बनना और अब 41 साल की उम्र में मां बनने के अनुभव अलग-अलग हैं। उन्होंने इसे फिजिकली चैलेंजिंग बताया।</p><p>माहिरा का अनुभव भले ही पर्सनल हो, लेकिन 40 के बाद की उम्र में प्रेग्नेंसी को लेकर महिलाओं के मन में कई तरह के सवाल उठते हैं। उम्र के साथ प्रेग्नेंसी में क्या बदलाव आते हैं और किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।</p><h3>40 के बाद प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ता है रिस्क?</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/women-suffer-from-a-serious-disease-called-endometriosis-1245625.html">महिलाओं की फर्टिलिटी</a> की एक उम्र होती है, जो बढ़ती उम्र के साथ कम होने लगती है। अंडों की संख्या और क्वालिटी कम होने लगती है और इसी वजह से प्रेग्नेंसी होने में समय अधिक लगता है। American Society for Reproductive Medicine के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ प्रेग्नेंसी की संभावना घटती है और मिसकैरेज और बच्चे में एब्नॉर्मिलिटी के रिस्क बढ़ जाते हैं।</p><h3>क्या होता है मिसकैरेज और एब्नॉर्मिलिटी रिस्क</h3><p>40 के बाद बच्चा नहीं ठहरना एक समस्या है और इसका कारण है इंब्रायो में क्रोमोजोमल एब्नॉर्मिलिटी का बढ़ना। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि 40 की उम्र के बाद हेल्दी बेबी नहीं हो सकते हैं।</p><h3>प्रेग्नेंसी रिस्क फैक्टर</h3><p>उम्र 35 वर्ष या उससे अधिक होने पर प्रेग्नेंसी को एडवर्स मैटरनल, फीटल और नियोनैटल के लिए रिस्की माना जाता है। साथ ही 40 की उम्र के बाद हाई ब्लड प्रेशर, प्रीक्लेमसिया, जेस्टेशनल डायबिटीज, मिसकैरेज और स्टिलबर्थ जैसी समस्याएं बढ़ जाती है। कुछ प्रेग्नेंसी में बेबी का बहुत छोट या बड़ा होना भी एक समस्या हो जाती है।</p><h3>प्रेग्नेंसी प्लानिंग कब करें?</h3><p>अगर 40 के बाद प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं, तो डॉक्टर से कंसल्टेशन लेना बेहद जरूरी है। इस दौरान आपकी मेडिकल हिस्ट्री, पहली प्रेग्नेंसी, मेडिसिन, वैक्सिनेशन और कोई हेल्थ प्रॉब्लम की समीक्षा की जानी चाहिए। अगर पीरियड्स की समस्या है, तो इसे भी इवैल्यूएट किया जाना चाहिए। &nbsp;&nbsp;</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/bad-cholesterol-5-seeds-lower-ldl-how-to-eat-rrs05">Bad Cholesterol: 5 छोटे-छोटे बीज कर सकते हैं बड़ा काम, LDL के लिए ऐसे करें डाइट में शामिल</a></aside><p>प्रेग्नेंसी की प्लानिंग कर रही महिलाओं को फॉलिक एसिड के बारे में भी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। महिलाओं को <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/women-health-important-test-women-should-have-done-time-to-time-1769179.html">फॉलिक एसिड रिच फूड </a>या गोलियां जरूर लेनी चाहिए। NHS के अनुसार, सामान्य तौर पर प्रेग्नेंसी के पहले 12 हफ्तों तक रोजाना 400 mg फॉलिक एसिड लेने की सलाह दी जाती है। बता दें कि इसकी डोज डॉक्टर द्वारा तय की जाती है।</p><h3>प्रेग्नेंस होने के बाद इन टेस्ट को जरूर कराएं</h3><p>40+ प्रेग्नेंसी में नियमित रूप से प्रेग्नेंसी की मॉनिटरिंग जरूरी हो जाती है। जरूरत के अनुसार बीपी, ब्लड शुगर और फीटर ग्रोथ की जांच की जाती है। 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र में प्रेग्नेंसी के थर्ड ट्राइमेस्टर में फीटल ग्रोथ एसेसमेंट और एंटीनेटल फीटल सर्विलांस पर विचार करने की सलाह डॉक्टर द्वारा दी जाती है। जेनेटिक स्क्रीनिंग भी लेट प्रेग्नेंसी में जरूरी होती है।</p><h3>40 के बाद प्रेग्नेंसी का मतलब सिर्फ रिस्क नहीं</h3><p>40 के बाद प्रेग्नेंसी हाई रिस्क हो, ऐसा जरूरी नहीं। हर महिला की हेल्थ, फर्टिलिटी, पहली प्रेग्नेंसी और मेडिकल हिस्ट्री अलग होती है और इसी आधार पर दूसरी प्रेग्नेंसी महत्वपूर्ण होती है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>World Alzheimer’s Day 2026: कहीं आप भी तो नहीं हो रहे अल्जाइमर के शिकार? इन आदतों से परखें अपनी मेंटल हेल्थ</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/world-alzheimers-day-2026-symptoms-causes-prevention-brain-health-tips-awm08</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/world-alzheimers-day-2026-symptoms-causes-prevention-brain-health-tips-awm08#comments</comments><guid isPermaLink="false">f90ba607-c2f4-47e3-a550-c0ec096d7d3f</guid><pubDate>Mon, 21 Sep 2026 06:02:00 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-21T06:02:00.000+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>विजय कुमार तिवारी</atom:name><atom:uri>/api/author/2547956</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Lifestyle News,Health Tips,Health News</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-19/11vro2h0/world-alzheimers-day-2026.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ विश्व अल्जाइमर दिवस]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Alzheimer Symptoms and Causes]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-19/11vro2h0/world-alzheimers-day-2026.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><category>लाइफस्टाइल</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Alzheimer Symptoms and Causes:</strong> हर साल की तरह इस साल भी 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस  मनाया जा रहा है। यह दिन अल्जाइमर और डिमेंशिया के बारे में जागरूकता बढ़ाने और समय रहते इसके संकेत पहचानने के लिए महत्वपूर्ण है। अक्सर लोग भूलने की समस्या को उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर भूलने की यह समस्या लगातार बढ़ती जाए, सोचने-समझने में दिक्कत हो और रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी होने लगे, तो इसे मामूली बात नहीं समझना चाहिए। यह किसी दिमागी बीमारी का संकेत हो सकता है, इसलिए तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए</p><p>विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से मिली जानकारी के अनुसार, 2021 में दुनिया भर में करीब 5.7 करोड़ लोग डिमेंशिया के साथ जी रहे थे और हर साल करीब 1 करोड़ नए मामले सामने आते हैं। </p><p>डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि कई तरह की मस्तिष्क संबंधी बीमारियों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है। इनमें अल्जाइमर सबसे आम कारण है और अनुमानतः डिमेंशिया के 60-70 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। WHO के मुताबिक उम्र इसका सबसे बड़ा ज्ञात जोखिम कारक है, लेकिन डिमेंशिया उम्र बढ़ने की सामान्य प्रक्रिया नहीं है।</p><h3>आखिर क्या है अल्जाइमर?</h3><p>अल्जाइमर एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जिसमें समय के साथ याददाश्त, सोचने-समझने, निर्णय लेने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। शुरुआत में इसके लक्षण बहुत सामान्य लग सकते हैं। कोई व्यक्ति हाल की बात भूल सकता है, एक ही सवाल बार-बार पूछ सकता है या किसी परिचित को पहचााने से मना कर सकता है।</p><p>इसके साथ ही साथ यह जानने की जरुरत है कि हर भूलने को अल्जाइमर समझना भी सही नहीं है। कभी-कभार नाम भूल जाना, चाबी रखकर भूल जाना या किसी तारीख को याद न रखना सामान्य उम्र-संबंधी बदलाव भी हो सकता है। चिंता तब बढ़ती है जब बदलाव बार-बार होने लगें, बढ़ते जाएं और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे।</p><p><strong>कहीं आप तो नहीं हो रहे अल्जाइमर के शिकार? इन आदतों से परखें अपनी मेंटल हेल्थ</strong></p><ul><li><p><strong>क्या आप हाल की बातें बार-बार भूल रहे हैं?</strong></p></li></ul><p>सुबह हुई बातचीत, हाल में मिली जानकारी या कुछ देर पहले तय की गई बात याद नहीं रहना और उसी सवाल को दोबारा पूछना ध्यान देने योग्य संकेत हो सकता है। खासकर तब, जब यह पहले की तुलना में लगातार बढ़ रहा हो।</p><ul><li><p><strong>क्या रोज के काम मुश्किल लगने लगे हैं?</strong></p></li></ul><p>जिस काम को आप वर्षों से आसानी से करते आए हैं, उसमें अचानक परेशानी होने लगे तो इसे नजरअंदाज न करें। खाना बनाने की सामान्य प्रक्रिया, मोबाइल या किसी उपकरण का इस्तेमाल, खरीदारी की सूची बनाना जैसे परिचित काम कठिन लगना एक चेतावनी संकेत हो सकता है।</p><figure><img alt="alzheimers symptoms and prevention" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-19/pnlsmmkc/alzheimers-symptoms-and-prevention.jpg" /><figcaption>अल्जाइमर के लक्षण और बचाव</figcaption></figure><ul><li><p><strong>क्या पैसे और हिसाब-किताब में परेशानी हो रही है?</strong></p></li></ul><p>बिल भरना, खर्च का हिसाब रखना या सामान्य आर्थिक फैसले लेने में पहले की तुलना में ज्यादा परेशानी होना भी संज्ञानात्मक बदलाव का संकेत हो सकता है।</p><ul><li><p><strong>क्या आप तारीख और जगह को लेकर भ्रमित होते हैं?</strong></p></li></ul><p>कभी-कभी दिन भूल जाना सामान्य है और थोड़ी देर बाद याद भी आ जाता है। लेकिन बार-बार तारीख, मौसम, समय या अपनी जगह को लेकर भ्रम होना ज्यादा गंभीर संकेत हो सकता है।</p><ul><li><p><strong>क्या सही शब्द याद करने में लगातार दिक्कत होती है?</strong></p></li></ul><p>बात करते समय बार-बार रुक जाना, सामान्य चीजों के नाम याद न आना, एक ही बात दोहराना या बातचीत को बीच में छोड़ देना भी ध्यान देने योग्य बदलाव हैं।</p><ul><li><p><strong>क्या सामान गलत जगह रखने की आदत बढ़ गई है?</strong></p></li></ul><p>चाबी, मोबाइल, चश्मा जैसी चीजें कभी-कभार गलत जगह रखना आम बात है। लेकिन सामान ऐसी असामान्य जगह रखना और फिर अपने कदम पीछे करके भी उसे खोज न पाना अलग तरह का संकेत हो सकता है।</p><ul><li><p><strong>क्या फैसले लेने की क्षमता बदल रही है?</strong></p></li></ul><p>पैसों से जुड़े मामलों में असामान्य फैसले लेना, व्यक्तिगत देखभाल में लापरवाही बढ़ना या ऐसी परिस्थितियों में गलत निर्णय लेना जिनमें पहले आसानी से फैसला कर लेते थे, संज्ञानात्मक बदलाव की ओर इशारा कर सकता है।</p><ul><li><p><strong>क्या आप लोगों से मिलना-जुलना कम कर रहे हैं?</strong></p></li></ul><p>अगर कोई व्यक्ति अचानक अपने पसंदीदा काम, सामाजिक गतिविधियों, दोस्तों या परिवार से दूरी बनाने लगे तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। लगातार ऐसा होने के साथ दूसरी याददाश्त या सोच संबंधी समस्याएं भी दिखाई दें तो चिकित्सकीय सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।</p><ul><li><p><strong>क्या मूड और व्यवहार में बदलाव आया है?</strong></p></li></ul><p>बिना स्पष्ट कारण ज्यादा चिड़चिड़ापन, डर, चिंता, शक, उदासी या व्यक्तित्व में बदलाव भी अल्जाइमर और अन्य डिमेंशिया में दिखाई दे सकते हैं। हालांकि ऐसे बदलाव कई अन्य मानसिक और शारीरिक कारणों से भी हो सकते हैं, इसलिए केवल इस आधार पर अल्जाइमर का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।</p><ul><li><p><strong>क्या आप शारीरिक और मानसिक गतिविधियों से दूर हो रहे हैं?</strong></p></li></ul><p>WHO की 2026 की नई गाइडलाइन के अनुसार शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, सामाजिक अलगाव, वायु प्रदूषण तथा हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसे कुछ जोखिम कारक डिमेंशिया के जोखिम से जुड़े हैं। WHO का मानना है कि डिमेंशिया के जोखिम का 45% तक हिस्सा इन्हीं वजहों से जुड़ा हो सकता है, जिन्हें आसानी से बदला या कम किया जा सकता है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/world-bamboo-day-uses-health-benefits-nutritional-value-guide-awm08">World Bamboo Day Special: सिर्फ सजावट नहीं, सेहत का खजाना भी है बांस, जानें इसके अनोखे औषधीय गुण</a></aside><h3>मेंटल हेल्थ और ब्रेन हेल्थ के लिए क्या करें?</h3><p>अल्जाइमर को रोकने की कोई गारंटी वाली आदत नहीं है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली से जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित खान-पान, धूम्रपान से दूरी, शराब का सेवन कम करना, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रित रखना, सामाजिक रूप से सक्रिय रहना और दिमाग को सक्रिय रखने वाली गतिविधियां उपयोगी हो सकती हैं। <a href="https://navbharatlive.com/world/nepal-flood-2026-india-who-disaster-relief-medical-team-kathmandu">विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)</a> ने कुछ जरुरी गतिविधियों और सामाजिक भागीदारी के बारे में अपनी सलाह दी है, जिससे ऐसे जोखिम कम किए जा सकते हैं।</p><h3>कब करें डॉक्टर से संपर्क</h3><p>अगर भूलने या व्यवहार में बदलाव लगातार बढ़ रहे हैं और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हैं, तो इसे सिर्फ उम्र का असर मानकर न छोड़ें। डॉक्टर जरूरत के अनुसार याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता, अन्य स्वास्थ्य स्थितियों और दवाओं का मूल्यांकन कर सकते हैं। हर भूलने की समस्या अल्जाइमर नहीं होती, इसलिए सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Childhood Cancer: बच्चों में दिखें ये 5 लक्षण तो न करें नजरअंदाज, हो सकते हैं कैंसर के संकेत</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/childhood-cancer-5-warning-signs-symptoms-in-children-pjs00</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/childhood-cancer-5-warning-signs-symptoms-in-children-pjs00#comments</comments><guid isPermaLink="false">c4d045b2-459f-4644-8556-038150622ce0</guid><pubDate>Sat, 19 Sep 2026 08:46:19 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-19T08:46:19.095+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>प्रिया जैस</atom:name><atom:uri>/api/author/2547964</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Lifestyle News,Health News,Cancer</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-19/seiokq0u/children-cancer-symptoms.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ बच्चों में कैंसर के लक्षण]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ children cancer symptoms]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-19/seiokq0u/children-cancer-symptoms.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><category>लाइफस्टाइल</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Cancer Warning Signs in Children: </strong>भागदौड़ भरी जिंदगी में कैंसर का खतरा इन दिनों बहुत बढ़ गया है। ऐसे में बच्चों में कैंसर होने बेहद चिंता का विषय बना हुआ है। बच्चों में कैंसर का पता चलते ही माता-पिता के मन में डर बैठ जाता है, लेकिन समय रहते अगर इसकी पहचान हो जाए, तो इलाज की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।</p><p>बड़ों के मुकाबले बच्चों में होने वाले कैंसर के लक्षण भी आम बीमारियों जैसे लगते हैं, जिस वजह से इन पर ध्यान नहीं दिया जाता। इसलिए जरूरी है कि माता-पिता, शिक्षक और परिवार के लोग बच्चों में दिखने वाले छोटे-छोटे बदलावों को भी गंभीरता से लें।</p><h3>बच्चों में कैंसर के शुरुआती संकेत</h3><p>लगातार बुखार आना, बिना कारण वजन कम होना, शरीर पर नीले निशान, गांठ बनना, आंखों में चमक या सिरदर्द और उल्टी जैसे कुछ शुरुआती चेतावनी संकेत हैं जो शरीर हमें पहले ही दे देता है। इन संकेतों को समझना और समय पर डॉक्टर से संपर्क करना ही बच्चे की जिंदगी बचा सकता है।</p><p><a href="https://navbharatlive.com/world/nepal-flood-2026-india-who-disaster-relief-medical-team-kathmandu">वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन</a> (WHO) के अनुसार, बच्चों में होने वाले कैंसर का जल्दी पता चलना उनके बचने की संभावना को काफी हद तक बढ़ा देता है, चूंकि बचपन के कैंसर के कई लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम या वायरल संक्रमण जैसे दिखते हैं, इसलिए माता-पिता और डॉक्टरों के लिए इसके शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है तो चलिए आपको बच्चों में कैंसर के कुछ प्रमुख शुरुआती संकेत के बारे में बताते हैं, जो इस प्रकार होते हैं।</p><h3>बिना वजह लगातार बुखार</h3><p>यह बच्चों में सबसे आम कैंसर है। कैंसर सेल्स बोन मैरो में नॉर्मल सेल्स की जगह ले लेते हैं। इससे शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और शरीर संक्रमण से लड़ नहीं पाता, इसलिए लगातार बुखार बना रहता है। साथ ही कैंसर सेल्स खुद ऐसे केमिकल्स (पायरोजन) छोड़ते हैं जो दिमाग के टेम्परेचर सेंटर को बढ़ा देते हैं।</p><h3>असामान्य गांठ या सूजन</h3><p>लसिका ग्रंथियों में कैंसर सेल्स जमा होने से बिना दर्द वाली गिल्टियां बन जाती हैं। अगर 2 हफ्ते से ज्यादा है, बुखार और वजन कम होने के साथ है, तो तुरंत जांच जरूरी है। गांठ का मतलब है कैंसर सेल्स एक जगह इकट्ठा हो रहे हैं। समय पर इलाज न मिलने पर ये खून के जरिए फेफड़े, लीवर, दिमाग तक फैल सकते हैं।</p><h3>हड्डियों और जोड़ों में दर्द</h3><p>ये कैंसर 10 से 18 साल के टीनएजर्स में सबसे ज्यादा होता है, जब हड्डियां तेजी से बढ़ रही होती हैं। कैंसर सेल्स हड्डी के अंदर तेजी से बढ़कर हड्डी को अंदर से कमजोर और खोखला कर देते हैं।</p><h3>बिना कारण वजन कम होना और थकान</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/vellore-doctors-have-cured-blood-cancer-in-nine-days-1228253.html">कैंसर सेल्स</a> बच्चों के खाने से मिलने वाली सारी कैलोरी और प्रोटीन खुद खा लेते हैं। बच्चा खा तो रहा है, लेकिन वजन बढ़ने की जगह घट रहा है। अगर बच्चे में यह लक्षण देखने को मिले, तो तुरंत जांच करवाएं। बच्चा खा तो रहा है, लेकिन वजन बढ़ने की जगह घट रहा है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/world-bamboo-day-uses-health-benefits-nutritional-value-guide-awm08">World Bamboo Day Special: सिर्फ सजावट नहीं, सेहत का खजाना भी है बांस, जानें इसके अनोखे औषधीय गुण</a></aside><h3>आसानी से चोट लगना, खून बहना</h3><p>बच्चों में रक्त कैंसर (ल्यूकेमिया) या अन्य गंभीर बीमारियों के शुरुआती लक्षणों में आसानी से चोट लगना और खून बहना बहुत आम हैं। बोन मैरो (अस्थि मज्जा) में कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने के कारण स्वस्थ प्लेटलेट्स का निर्माण रुक जाता है। प्लेटलेट्स खून का थक्का जमाने का काम करती हैं। इनकी कमी से शरीर में खून का थक्का नहीं बन पाता।</p><p>कैंसर शरीर में ऐसे केमिकल्स छोड़ता है जिससे भूख मर जाती है, जी मिचलाता है और मसल्स तेजी से टूटने लगते हैं। यदि इस तरह के लक्षण 2 सप्ताह से अधिक समय तक बने रहते हैं या फिर और ज्यादा बिगडने लगते हैंस तो तुरंत जांच करवाएं और डॉक्टर से संपर्क करें।</p><p><strong>(एजेंसी इनपुट के साथ)</strong></p>]]></content:encoded></item><item><title>World Bamboo Day Special: सिर्फ सजावट नहीं, सेहत का खजाना भी है बांस, जानें इसके अनोखे औषधीय गुण</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/world-bamboo-day-uses-health-benefits-nutritional-value-guide-awm08</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/world-bamboo-day-uses-health-benefits-nutritional-value-guide-awm08#comments</comments><guid isPermaLink="false">aa44cd81-9f4f-43af-8121-99a3b44460fb</guid><pubDate>Fri, 18 Sep 2026 15:40:51 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-18T15:40:51.722+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>विजय कुमार तिवारी</atom:name><atom:uri>/api/author/2547956</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Maharashtra News,Lifestyle News,Health News</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-18/hg8azrwd/world-bamboo-day.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ विश्व बांस दिवस]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ World Bamboo Day]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-18/hg8azrwd/world-bamboo-day.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><category>महाराष्ट्र</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>World Bamboo Day Special:</strong> आमतौर पर गांवों या कस्बों में बांस को केवल घर की बाड़, टोकरी, चटाई, फर्नीचर या फिर निर्माण कार्य से जुड़ा एक पौधा ही माना जाता है। लेकिन असल में बांस की उपयोगिता इससे कहीं ज्यादा बड़ी है। बांस केवल लकड़ी का विकल्प नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ खेती, ग्रामीण रोजगार, भोजन और हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का एक अहम हिस्सा भी है। भारत में, खासकर पूर्वोत्तर के राज्यों में, बांस की नई कोपलों को भोजन में शामिल करने की एक बहुत पुरानी और समृद्ध परंपरा रही है।</p><p>आपको बता दें कि प्रत्येक वर्ष 18 सितंबर को विश्व बांस दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य बांस के लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके उपयोग को बढ़ावा देना है। आज के दिन जानने की कोशिश करते हैं कि बांस केवल लकड़ी नहीं है, बल्कि हमारे जीवन में काफी उपयोगी है। </p><h3>पर्यावरण और आजीविका की मजबूत रीढ़ है बांस</h3><p>बांस की सबसे बड़ी खूबी इसका तेजी से बढ़ना और इसका बहुउपयोगी होना है। इससे बने फर्नीचर, कागज, सजावटी सामान और घरेलू उत्पादों की मांग बाजार में लगातार बनी रहती है। ग्रामीण इलाकों में यह छोटे किसानों और कारीगरों की आजीविका का बड़ा जरिया बनता है। पर्यावरण के लिहाज से देखा जाए तो बांस की खेती मिट्टी के कटाव को रोकती है और जैव विविधता को बढ़ावा देती है। शोधकर्ताओं का भी मानना है कि बांस आधारित कृषि मॉडल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है।</p><h3>पोषक तत्वों का खजाना हैं बांस की कोपलें</h3><p>बांस की कोपलों को अगर सही तरीके से खाया जाए तो यह सेहत के लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं हैं। इनमें भरपूर मात्रा में डायटरी फाइबर, प्रोटीन, खनिज (मिनरल्स) और जरूरी विटामिन पाए जाते हैं, जबकि फैट (वसा) की मात्रा बेहद कम होती है। पूर्वोत्तर भारत में इन्हें उबालकर, सुखाकर,</p><figure><img alt="World Bamboo Day" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-18/trser2z0/bamboo-cultivation.jpg" /><figcaption>बांस की खेती</figcaption></figure><h3>घर से लेकर थाली तक है बांस का जादू</h3><p>गांवों में आपने बांस का इस्तेमाल घर बनाने, टोकरी बुनने या चटाई तैयार करने में देखा होगा। अक्सर लोग इसे केवल लकड़ी की तरह ही देखते हैं। लेकिन सच तो यह है कि बांस सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि हमारी पूरी जीवनशैली का अहम हिस्सा है। यह पर्यावरण को साफ रखने, खेती सुधारने और ग्रामीण लोगों को रोजगार देने में बड़ी भूमिका निभाता है। भारत में, खासतौर पर पूर्वोत्तर के राज्यों में, बांस की नई कोपलों को बड़े चाव से खाने में इस्तेमाल किया जाता है।</p><h3>पोषक तत्वों का खजाना है बांस की कोपल</h3><p>बांस की नई और नरम कोपलों को सब्जी की तरह खाया जाता है। ये खाने में जितनी स्वादिष्ट होती हैं, सेहत के लिए भी उतनी ही फायदेमंद होती हैं। इनमें फाइबर, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि बांस की कोपलों में फैट बहुत कम होता है। पूर्वोत्तर भारत में लोग इसे उबालकर, सुखाकर या अचार बनाकर सालों से खाते आ रहे हैं।</p><figure><img alt="bamboo shoot" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-18/wac1c0m8/bamboo-shoot.jpg" /><figcaption>बांस की कोपल</figcaption></figure><h3>पेट और पाचन के लिए बेहद फायदेमंद</h3><p>अगर आपको पेट से जुड़ी परेशानियां रहती हैं, तो बांस की कोपलें आपके काम आ सकती हैं। इनमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है। अपने रोजाना के खाने में फाइबर वाली चीजें शामिल करने से कब्ज जैसी दिक्कत दूर रहती है। हालांकि, इसे किसी बीमारी की दवा मानने के बजाय संतुलित खाने का हिस्सा बनाना ज्यादा बेहतर है।</p><h3>शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार</h3><p>वैज्ञानिकों के मुताबिक, बांस की कोपलों और पत्तियों में खास किस्म के एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। ये तत्व शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करते हैं। रिसर्च में पाया गया है कि बांस में सूजन कम करने और बैक्टीरिया से लड़ने वाले गुण भी होते हैं। यह हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।</p><h3>पारंपरिक इलाज में बांसलोचन का महत्व</h3><p>सदियों से भारत और एशिया के कई देशों में बांस का इस्तेमाल जड़ी-बूटी की तरह किया जाता रहा है। बांस से मिलने वाले 'बांसलोचन' का आयुर्वेद और पुरानी चिकित्सा पद्धतियों में काफी नाम है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/food/maharashtrian-puran-poli-recipe-chana-dal-jaggery-easy-method-with-tips-and-tricks-rrs05">पारंपरिक नुस्खे</a> और डॉक्टरी इलाज में फर्क होता है। इसलिए किसी गंभीर बीमारी में सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें और डॉक्टर की सलाह जरूर लें।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/amla-reetha-shikakai-shampoo-recipe-at-home-traditional-hair-care-rrs05">Amla Reetha Shikakai Shampoo: दादी-नानी के जमाने का ये देसी शैंपू घर पर ऐसे बनाएं, बालों में आएगी नेचुरल शाइन</a></aside><h3>कच्चा बांस खाने की भूल कभी न करें</h3><p>बांस की ताजी कोपलों को कभी भी सीधा या कच्चा नहीं खाना चाहिए। इनमें टैक्सिफिलिन नाम का एक प्राकृतिक तत्व होता है, जो पेट में जाकर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए बांस की कोपलों को पकाने से पहले अच्छी तरह छीलकर और काटकर पानी में उबालना बहुत जरूरी है। सही तरीके से उबालने और पकाने से इसका नुकसानदेह असर पूरी तरह खत्म हो जाता है।</p><figure><img alt="World Bamboo Day" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-18/n2pxudtv/bamboo.jpg" /><figcaption>बांस</figcaption></figure><h3>घर पर इस्तेमाल करते समय रखें इन बातों का ध्यान</h3><p>अगर आप बांस की कोपलों का इस्तेमाल करने जा रहे हैं, तो कुछ सावधानियां बरतना बहुत जरूरी है। हमेशा खाने योग्य प्रजाति के बांस की कोपल ही चुनें। इन्हें पकाने से पहले अच्छी तरह साफ करें और पूरी तरह उबाल लें। किसी भी अनजान प्रजाति के बांस का सेवन करने से बचें और इसे गंभीर बीमारियों का इलाज न समझें।</p><p>बांस एक ऐसा प्राकृतिक संसाधन है जो खेत से लेकर रसोई तक हर जगह काम आता है। यह न सिर्फ हमारी सेहत का ख्याल रखता है, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका का साधन भी है। विश्व बांस दिवस हमें याद दिलाता है कि यह साधारण सा दिखने वाला पौधा असल में हमारे जीवन, पर्यावरण और सेहत के लिए कितना अनमोल है।</p><h3>महाराष्ट्र बांस उत्पादन में तीसरे स्थान पर</h3><p>महाराष्ट्र राज्य में <a href="https://navbharatlive.com/maharashtra/mumbai/the-government-is-providing-a-subsidy-of-up-to-rs-7-lakh-per-hectare-for-bamboo-cultivation-1359898.html">बांस की खेती</a> किसानों के लिए हरा सोना साबित हो रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण रोजगार और बंपर कमाई के अवसर मिल रहे हैं। वर्तमान में महाराष्ट्र बांस की खेती के क्षेत्र में देश में तीसरे स्थान पर है। अमरावती, भंडारा, सिंधुदुर्ग और कोंकण क्षेत्र बांस उत्पादन के मुख्य केंद्र हैं।</p>]]></content:encoded></item><item><title>IBS and Gut Health: क्या लंबे समय तक फोन चलाना और Oral Health की अनदेखी भी बिगाड़ सकती है पेट की सेहत?</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/ibs-gut-health-phone-screen-time-oral-health-pet-ki-sehat-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/ibs-gut-health-phone-screen-time-oral-health-pet-ki-sehat-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">5bc2908d-af92-4fa7-8348-0b38a48a5c48</guid><pubDate>Fri, 18 Sep 2026 13:19:46 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-18T13:19:46.865+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health Tips,Health News,Nutrition,Oral Care</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-18/5qxiyzzv/Gut-Health.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ पेट की सेहत]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Ibs gut health phone screen time oral health pet ki sehat.]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-18/5qxiyzzv/Gut-Health.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Screen Time and Gut Health:</strong> आजकल पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन इसका कारण केवल खान-पान तक सीमित नहीं रह गया हैं। बार-बार पेट फूलना, गैस, पेट दर्द, कब्ज या दस्त जैसी दिक्कतें कई लोगों की डेली लाइफ का हिस्सा बनती जा रही हैं। खासकर IBS यानी irritable bowel syndrome में पेट और दिमाग के बीच का कनेक्शन अधिक महत्वपूर्ण होता है।</p><p>दरअसल, मशहूर न्यूट्रिशनिस्ट ऋजुता दिवेकर ने हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिसमें वह रोजमर्रा की कुछ ऐसी आदतों पर बात करती हैं, जो हमारे पेट की सेहत पर बुरा असर डालता है। बता दें कि ऋजुता दिवेकर जानी-मानी न्यूट्रिशन और वेलनेस एक्सपर्ट हैं और उनके क्लाइंट्स में बॉलीवुड की कई हस्तियां शामिल हैं।</p><figure><blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/reel/DdYtXvtOPUW/?utm_source=ig_embed&amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; border:0; border-radius:3px; box-shadow:0 0 1px 0 rgba(0,0,0,0.5),0 1px 10px 0 rgba(0,0,0,0.15); margin: 1px; max-width:540px; min-width:326px; padding:0; width:99.375%; width:-webkit-calc(100% - 2px); width:calc(100% - 2px);"><div style="padding:16px;"> <a href="https://www.instagram.com/reel/DdYtXvtOPUW/?utm_source=ig_embed&amp;utm_campaign=loading" style=" background:#FFFFFF; line-height:0; padding:0 0; text-align:center; text-decoration:none; width:100%;" target="_blank"> <div style=" display: flex; flex-direction: row; align-items: center;"> <div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 40px; margin-right: 14px; width: 40px;"></div> <div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center;"> <div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 100px;"></div> <div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 60px;"></div></div></div><div style="padding: 19% 0;"></div> <div style="display:block; height:50px; margin:0 auto 12px; width:50px;"><svg width="50px" height="50px" viewBox="0 0 60 60" version="1.1" xmlns="https://www.w3.org/2000/svg" xmlns:xlink="https://www.w3.org/1999/xlink"><g stroke="none" stroke-width="1" fill="none" fill-rule="evenodd"><g transform="translate(-511.000000, -20.000000)" fill="#000000"><g><path d="M556.869,30.41 C554.814,30.41 553.148,32.076 553.148,34.131 C553.148,36.186 554.814,37.852 556.869,37.852 C558.924,37.852 560.59,36.186 560.59,34.131 C560.59,32.076 558.924,30.41 556.869,30.41 M541,60.657 C535.114,60.657 530.342,55.887 530.342,50 C530.342,44.114 535.114,39.342 541,39.342 C546.887,39.342 551.658,44.114 551.658,50 C551.658,55.887 546.887,60.657 541,60.657 M541,33.886 C532.1,33.886 524.886,41.1 524.886,50 C524.886,58.899 532.1,66.113 541,66.113 C549.9,66.113 557.115,58.899 557.115,50 C557.115,41.1 549.9,33.886 541,33.886 M565.378,62.101 C565.244,65.022 564.756,66.606 564.346,67.663 C563.803,69.06 563.154,70.057 562.106,71.106 C561.058,72.155 560.06,72.803 558.662,73.347 C557.607,73.757 556.021,74.244 553.102,74.378 C549.944,74.521 548.997,74.552 541,74.552 C533.003,74.552 532.056,74.521 528.898,74.378 C525.979,74.244 524.393,73.757 523.338,73.347 C521.94,72.803 520.942,72.155 519.894,71.106 C518.846,70.057 518.197,69.06 517.654,67.663 C517.244,66.606 516.755,65.022 516.623,62.101 C516.479,58.943 516.448,57.996 516.448,50 C516.448,42.003 516.479,41.056 516.623,37.899 C516.755,34.978 517.244,33.391 517.654,32.338 C518.197,30.938 518.846,29.942 519.894,28.894 C520.942,27.846 521.94,27.196 523.338,26.654 C524.393,26.244 525.979,25.756 528.898,25.623 C532.057,25.479 533.004,25.448 541,25.448 C548.997,25.448 549.943,25.479 553.102,25.623 C556.021,25.756 557.607,26.244 558.662,26.654 C560.06,27.196 561.058,27.846 562.106,28.894 C563.154,29.942 563.803,30.938 564.346,32.338 C564.756,33.391 565.244,34.978 565.378,37.899 C565.522,41.056 565.552,42.003 565.552,50 C565.552,57.996 565.522,58.943 565.378,62.101 M570.82,37.631 C570.674,34.438 570.167,32.258 569.425,30.349 C568.659,28.377 567.633,26.702 565.965,25.035 C564.297,23.368 562.623,22.342 560.652,21.575 C558.743,20.834 556.562,20.326 553.369,20.18 C550.169,20.033 549.148,20 541,20 C532.853,20 531.831,20.033 528.631,20.18 C525.438,20.326 523.257,20.834 521.349,21.575 C519.376,22.342 517.703,23.368 516.035,25.035 C514.368,26.702 513.342,28.377 512.574,30.349 C511.834,32.258 511.326,34.438 511.181,37.631 C511.035,40.831 511,41.851 511,50 C511,58.147 511.035,59.17 511.181,62.369 C511.326,65.562 511.834,67.743 512.574,69.651 C513.342,71.625 514.368,73.296 516.035,74.965 C517.703,76.634 519.376,77.658 521.349,78.425 C523.257,79.167 525.438,79.673 528.631,79.82 C531.831,79.965 532.853,80.001 541,80.001 C549.148,80.001 550.169,79.965 553.369,79.82 C556.562,79.673 558.743,79.167 560.652,78.425 C562.623,77.658 564.297,76.634 565.965,74.965 C567.633,73.296 568.659,71.625 569.425,69.651 C570.167,67.743 570.674,65.562 570.82,62.369 C570.966,59.17 571,58.147 571,50 C571,41.851 570.966,40.831 570.82,37.631"></path></g></g></g></svg></div><div style="padding-top: 8px;"> <div style=" color:#3897f0; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:550; line-height:18px;">View this post on Instagram</div></div><div style="padding: 12.5% 0;"></div> <div style="display: flex; flex-direction: row; margin-bottom: 14px; align-items: center;"><div> <div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(0px) translateY(7px);"></div> <div style="background-color: #F4F4F4; height: 12.5px; transform: rotate(-45deg) translateX(3px) translateY(1px); width: 12.5px; flex-grow: 0; margin-right: 14px; margin-left: 2px;"></div> <div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(9px) translateY(-18px);"></div></div><div style="margin-left: 8px;"> <div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 20px; width: 20px;"></div> <div style=" width: 0; height: 0; border-top: 2px solid transparent; border-left: 6px solid #f4f4f4; border-bottom: 2px solid transparent; transform: translateX(16px) translateY(-4px) rotate(30deg)"></div></div><div style="margin-left: auto;"> <div style=" width: 0px; border-top: 8px solid #F4F4F4; border-right: 8px solid transparent; transform: translateY(16px);"></div> <div style=" background-color: #F4F4F4; flex-grow: 0; height: 12px; width: 16px; transform: translateY(-4px);"></div> <div style=" width: 0; height: 0; border-top: 8px solid #F4F4F4; border-left: 8px solid transparent; transform: translateY(-4px) translateX(8px);"></div></div></div> <div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center; margin-bottom: 24px;"> <div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 224px;"></div> <div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 144px;"></div></div></a><p style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; line-height:17px; margin-bottom:0; margin-top:8px; overflow:hidden; padding:8px 0 7px; text-align:center; text-overflow:ellipsis; white-space:nowrap;"><a href="https://www.instagram.com/reel/DdYtXvtOPUW/?utm_source=ig_embed&amp;utm_campaign=loading" style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:normal; line-height:17px; text-decoration:none;" target="_blank">A post shared by Rujuta Diwekar (@rujuta.diwekar)</a></p></div></blockquote>
<script async src="//www.instagram.com/embed.js"></script></figure><h3>खाने के समय फोन से बनाएं दूरी</h3><p>अपनी फिटनेस गाइडलाइंस में खाना खाते समय फोन, टीवी या दूसरे गैजेट्स से दूरी बनाने की सलाह देती हैं। इससे आपके और आपके खाने के बीच एक कनेक्शन बनता है। खाने के समय लगातार स्क्रीन देखने से आपका ध्यान भोजन से हट जाता है। ऐसे में खाना कितनी तेजी से खा रहे हैं, कितना खा चुके हैं और कितनी भूख बची है, जरूरत से ज्यादा खा लेना, जैसी बातों का ध्यान नहीं रहता है। इसलिए शुरुआत में कोशिश करें कि कम से कम एक मील पूरी तरह बिना फोन के खाएं।</p><h3>लंबे समय तक फोन और पेट की परेशानी का कनेक्शन</h3><p>सिर्फ फोन चलाना IBS का सीधा कारण नहीं है। IBS एक जटिल समस्या है, जिसमें आंतों की संवेदनशीलता, आंतों की एक्टिविटी, गट माइक्रोबायोम, खान-पान, तनाव और नींद जैसे कई कारक भूमिका निभाते हैं, लेकिन लंबे समय तक स्क्रीन पर रहना आपकी दिनचर्या, नींद, खाने की आदतों और तनाव को प्रभावित कर सकता है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/pregnancy-cravings-meaning-and-reason-iron-deficiency-rrs05">Pregnancy Cravings: क्या सच में होती है प्रेग्नेंसी क्रेविंग या सिर्फ ध्यान खींचने की बात? जानें असली वजह</a></aside><h3>ओरल हेल्थ को न करें नजरअंदाज</h3><p>हम डेंटिस्ट के पास तब जाते हैं, जब दांतों में दर्द हो या कोई बड़ी समस्या हो। बता दें कि हमारे दांत हमारे पाचन में बड़ी भूमिका निभाते हैं। हमारा मुंह शरीर के पाचन तंत्र का शुरुआती हिस्सा है और यहां मौजूद माइक्रोब्स का संबंध आगे के गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल माइक्रोबायोम से होता है।</p><h3>पेट को स्वस्थ रखने के लिए इन आदतों पर दें ध्यान</h3><p>अगर आपको अक्सर पेट फूलना, गैस, कब्ज, दस्त या पेट दर्द जैसी समस्या रहती है, तो खाने के समय फोन दूर रखें, भोजन धीरे-धीरे और चबाकर खाएं, नींद पूरी करें और स्ट्रेस को कम करें। इसके अलावा दिन में दो बार ब्रश करना और नियमित रूप से ओरल हाइजीन को बनाए रखना जरूरी है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Bad Cholesterol: 5 छोटे-छोटे बीज कर सकते हैं बड़ा काम, LDL के लिए ऐसे करें डाइट में शामिल</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/bad-cholesterol-5-seeds-lower-ldl-how-to-eat-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/bad-cholesterol-5-seeds-lower-ldl-how-to-eat-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">54d120cd-133d-406c-b282-fe44d184c600</guid><pubDate>Tue, 15 Sep 2026 15:16:33 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-15T15:16:33.194+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health Tips,Health News,Pumpkin Seeds</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-15/v05zqh0y/seeds-for-cholesterol.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ सीड्स फॉर कोलेस्ट्रॉल ]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Bad cholesterol 5 seeds lower ldl how to eat.]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-15/v05zqh0y/seeds-for-cholesterol.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p>Seeds For Cholesterol: बदलती जीवनशैली और खानपान के कारण बैड कोलेस्ट्रॉल की समस्या बढ़ती जा रही है। इसके लिए डाइट में कुछ ऐसे फूड्स शामिल किए जा सकते हैं, जिनमें फाइबर, हेल्दी फैट, ओमेगा-3 और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। अलसी, चिया, पंपकिन, तिल और सनफ्लावर ऐसे ही बीज हैं, जिन्हें रोज की डाइट का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।</p><h3>अलसी के बीज</h3><figure><img alt="Alsi Seeds" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-15/dm1vzror/Alsi-seeds.jpg" /><figcaption>अलसी के बीज</figcaption></figure><p>अलसी के बीजों में ALA ओमेगा-3 फैटी एसिड और फाइबर पाया जाता है। अलसी को पीसकर डाइट में शामिल करना चाहिए। आप इसे दही, ओट्स, स्मूदी या आटे में मिलाकर खा सकते हैं। साबुत अलसी की तुलना में पिसी हुई अलसी शरीर के लिए अधिक फायदेमंद है।</p><h3>चिया सीड्स</h3><figure><img alt="Chia Seeds" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-15/qf7ixhwh/chia-seeds.jpg" /><figcaption>चिया सीड्स</figcaption></figure><p>छोटे से दिखने वाले चिया सीड्स में फाइबर और हेल्दी फैट भरपूर मात्रा में होती है। इन्हें खाने से पहले पानी में भिगोना बेहतर होता है। सुबह इन्हें दही, ओट्स या स्मूदी में मिलाकर लिया जा सकता है। अगर आप पहली बार चिया ले रहे हैं, तो कम मात्रा से शुरुआत करना बेहतर है।</p><h3>कद्दू के बीज</h3><figure><img alt="Pumpkin Seeds" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-15/kyvlo34q/pumpkin-seeds.jpg" /><figcaption>कद्दू के बीज</figcaption></figure><p>पंपकिन के बीज में <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/protein-breakfast-for-women-25-30g-protein-morning-meal">प्रोटीन</a>, फाइबर, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इन्हें डाइट में शामिल करने का सबसे आसान तरीका है कि इन्हें हल्का रोस्ट करके स्नैक की तरह खाना।</p><h3>तिल</h3><figure><img alt="sesame Seeds" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-15/84uutcfi/til-seeds.jpg" /><figcaption>तिल</figcaption></figure><p>तिल यानी में <a href="https://navbharatlive.com/photos/low-calorie-snacks-for-fat-loss-best-healthy-snacks-weight-loss-1886823.html">हेल्दी फैट</a> के साथ कुछ ऐसे प्लांट कंपाउंड पाए जाते हैं, जो संतुलित डाइट का हिस्सा है। आप तिल को चटनी, सब्जी, सलाद या घर की दूसरी डिश में मिलाकर खा सकते हैं। सर्दियों में तिल का इस्तेमाल भारतीय खाने में हमेशा से किया जाता रहा है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/mehendi-hair-pack-7-ingredients-soft-shiny-hair-rrs05">Mehendi for Soft & Shiny Hair: मेहंदी में मिलाएं ये 7 चीजें, रूखे-बेजान बाल दिखेंगे सॉफ्ट और शाइनी</a></aside><h3>सूरजमुखी के बीज</h3><figure><img alt="Sunflower Seeds" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-15/xc5r68c4/Sunflower-seeds.jpg" /><figcaption>सूरजमुखी के बीज</figcaption></figure><p>सूरजमुखी के बीजों में विटामिन E, हेल्दी फैट और फाइटोस्टेरॉल जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन्हें बिना नमक के स्नैक की तरह खाया जा सकता है। आप इन्हें सलाद, ओट्स या सब्जी की टॉपिंग के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे रोज की डाइट में बीजों को शामिल करना आसान हो जाता है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Hartalika Teej 2026 Paran: निर्जला व्रत खोलते समय न करें ये गलती, पहले इन तरीके से करें शरीर को हाइड्रेट</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/hartalika-teej-paran-nirjala-vrat-after-fasting-health-tips-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/hartalika-teej-paran-nirjala-vrat-after-fasting-health-tips-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">a85f6d12-9e09-4289-afa3-82d94f4a5c1e</guid><pubDate>Sun, 13 Sep 2026 13:36:20 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-13T13:36:20.924+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Good Health,Health Tips,Health News,Hartalika Teej</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-13/670ce95f/Hartalika-Teej-Paran.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ तीज व्रत पारण]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Hartalika teej paran nirjala vrat after fasting health tips rrs05]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-13/670ce95f/Hartalika-Teej-Paran.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>लाइफस्टाइल</category><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Hartalika Teej Vrat ka Paran 2026:</strong> हरतालिका तीज का व्रत महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। इसमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। लेकिन इस व्रत के दौरान स्वंय का भी ख्याल रखना उतना ही जरूरी है। पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद जैसे ही पारण का समय आता है, तो सबसे पहले प्यास लगता है और मन करता है कि खूब पानी पिएं और सामने जो भी खाना हो, खा लें।</p><p>लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रहने के बाद शरीर को अचानक बहुत ज्यादा पानी या भारी खाना देने के बजाय धीरे-धीरे सामान्य रूटीन पर लाने की कोशिश करनी चाहिए। लंबे निर्जला व्रत के बाद बहुत बड़ामील लेने से बचना चाहिए। इससे पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।</p><h3>सबसे पहले धीरे-धीरे पानी लें</h3><p>पारण के बाद पानी पीना जरूरी है, लेकिन एक ही बार में बहुत ज्यादा पानी पीने की जरूरत नहीं है। कुछ देर में धीरे-धीरे पानी लें और शरीर को फ्लूड्स एब्जॉर्ब करने का समय दें। बहुत कम समय में जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी सही नहीं है, क्योंकि अत्यधिक पानी से शरीर का सोडियम बैलेंस बिगड़ सकता है। &nbsp;</p><h3>तुरंत प्लेट भरकर खाना न खाएं</h3><p>पूरे दिन कुछ नहीं खाने के बाद गरमा-गरम पूरी, पकौड़े, मिठाई और नमकीन जैसी चीजें न खाएं। शुरुआत में बहुत ज्यादा तला-भुना या भारी खाना पेट पर भारी पड़ सकता है। पहले थोड़ा हल्का भोजन लें और फिर अपनी भूख और डाइजेशन के हिसाब से नॉर्मल मील की तरफ जाएं।</p><h3>मिठाई खाएं, लेकिन संभलकर</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/religion/what-are-the-essentials-for-the-hartalika-teej-puja-make-sure-nothing-is-missednote-down-the-complete-listssk08">हरतालिका तीज</a> में मिठाई और प्रसाद का अपना महत्व है। इसलिए इसे पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन पूरे दिन के व्रत के बाद एक साथ बहुत सारी मिठाई खाने से बचें। पहले सामान्य खाना लें और मिठाई को छोटी मात्रा में एंजॉय करें।</p><h3>बहुत ज्यादा चाय-कॉफी से बचें</h3><p>व्रत खुलते ही कई लोगों को चाय या कॉफी की ललक होती है। लेकिन अगर शरीर पहले से डिहाइड्रेटेड है, तो लगातार <a href="https://navbharatlive.com/ampstories/web-stories/tea-coffee-benefits-common-questions-caffeine-facts-asp28">चाय-कॉफी</a> पीना हाइड्रेशन का विकल्प नहीं होना चहिए। पहले पानी और सामान्य भोजन पर ध्यान दें। उसके बाद अपनी डेली रूटीन पर लौटें।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/hartalika-teej-nirjala-vrat-sargi-health-tips-hydration-rrs05">Teej Health Tips: अगर आप भी तीज में निर्जला व्रत रखने वाली हैं तो इन बातों का रखें ध्यान, नहीं होगी कमजोरी</a></aside><h3>पारण में ये 6 गलतियां न करें</h3><ul><li><p>एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीना। प्यास लगी है तो पानी धीरे-धीरे लें।</p></li><li><p>तुरंत भारी खाना न खाएं। पूरी, पकौड़े और बहुत ज्यादा तला खाना शुरुआत के लिए सही नहीं होता है।</p></li><li><p>मिठाई को खाने का रिप्लेसमेंट समझकर न खाएं। सीमित मात्रा में खाएं।</p></li><li><p>जरूरत से ज्यादा चाय-कॉफी पीने से बचें। इससे डिहाइड्रेशन बढ़ सकता है।</p></li><li><p>शरीर के संकेतों को समझना। चक्कर या बहुत ज्यादा कमजोरी हो तो ध्यान दें।</p></li><li><p>तुरंत भारी रूटीन शुरू करना। पारण के बाद थोड़ा आराम भी दें। शरीर को सामान्य खान-पान पर लौटने का समय दें।</p></li></ul>]]></content:encoded></item><item><title>Teej Health Tips: अगर आप भी तीज में निर्जला व्रत रखने वाली हैं तो इन बातों का रखें ध्यान, नहीं होगी कमजोरी</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/hartalika-teej-nirjala-vrat-sargi-health-tips-hydration-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/hartalika-teej-nirjala-vrat-sargi-health-tips-hydration-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">833a202f-cbef-47d3-a43d-5fc8ef6145ae</guid><pubDate>Sun, 13 Sep 2026 12:53:42 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-13T12:53:42.292+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Good Health,Health Tips,Hartalika Teej,Vrat Tyohar</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-13/etpyb7nh/Teeh-Health-Tips.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ तीज व्रत]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Hartalika teej nirjala vrat sargi health tips hydration.]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-13/etpyb7nh/Teeh-Health-Tips.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>लाइफस्टाइल</category><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Hartalika Teej Sargi Tips:</strong> हरतालिका तीज पर कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं यानी पूरे दिन खाना और पानी वर्जित होता है। इसके पीछे उद्येश्य पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि होती है। इस व्रत में पूरे दिन अन्न के साथ पानी भी नहीं लिया जाता। धार्मिक रूप से यह कठिन संकल्प है और साथ ही पूरे दिन पानी न पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन का खतरा बना रहता है।</p><p>इसलिए अगर आप निर्जला व्रत रखने वाली हैं, तो व्रत शुरू होने से पहले की सरगी को सिर्फ पेट भरने का समय न समझें। इस दौरान पूरे दिन के हिसाब से खाएं और पिएं।</p><h3>सरगी में सबसे पहले पानी पर दें ध्यान</h3><p>व्रत शुरू होने से पहले शरीर को अच्छी तरह हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सरगी के समय एक साथ कई गिलास पानी पी जाएं। सरगी के लिए सूर्योदय से पहले उठकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना शुरु कर दें। हालांकि एक साथ बहुत सारा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है। हाइड्रेशन एक दिन पहले से ही शुरू कर दें, आखिरी 10 मिनट की तैयारी न करें।</p><h3>नारियल पानी और पानी वाले फल हो सकते हैं अच्छा विकल्प</h3><p>अगर आपकी व्रत परंपरा में सरगी के दौरान ये चीजें लेना उचित है, तो नारियल पानी, संतरा, तरबूज, खरबूजा या खीरा जैसे पानी से भरपूर फल लिए जा सकते हैं। नारियल पानी में कुछ इलेक्ट्रोलाइट्स भी होते हैं, जो आपको लंबे समय तक हाइड्रेट रखेंगे। व्रत के एक दिन पहले आप पूरे दिन ग्लूकोज वॉटर ले सकती हैं।</p><h3>सरगी में बहुत ज्यादा तला-भुना खाने का सेवन न करें</h3><p>कई बार सुबह जल्दी उठकर महिलाएं सोचती हैं कि दिनभर कुछ नहीं खाना है, इसलिए सरगी में पूरी-सब्जी, मिठाई, नमकीन और दूसरी भारी चीजें ज्यादा खा लें। यही गलती बाद में ब्लोटिंग, गैस, एसिडिटी या सुस्ती जैसी समस्या पैदा कर सकती है। सरगी में सिर्फ मात्रा बढ़ाने के बजाय संतुलित खाना रखें। कार्बोहाइड्रेट के साथ प्रोटीन, फल और पर्याप्त तरल लेना बेहतर है।</p><h3>सिर्फ मीठा खाकर न निकालें पूरा दिन</h3><p>मिठाई, फल या मीठी चीजें सरगी का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन सिर्फ चीनी वाली चीजों के भरोसे पूरा दिन निकालना सही नहीं है। ऐसा खाना चुनें जो आपको कुछ समय तक पेट भरा रखने में मदद करे। दही, दूध, पनीर, सूखे मेवे, फल या आपकी रोज की डाइट में शामिल कोई हल्का प्रोटीन भी लिया जाना चाहिए।</p><h3>चाय-कॉफी भी सोच-समझकर लें</h3><p>अगर आपको सुबह चाय या कॉफी पीने की आदत है, तो सरगी में इसे लेकर भी थोड़ा ध्यान रखें। बहुत ज्यादा कैफीन लेने से कुछ लोगों में बार-बार पेशाब आने या पेट में परेशानी हो सकती है।</p><h3>व्रत वाले दिन शरीर को ज्यादा थकाएं नहीं</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/religion/kajari-teej-2026-nirjala-vrat-precautions">निर्जला व्रत</a> के दौरान शरीर को पानी और भोजन नहीं मिल रहा होता, ऐसे में शरीर में एनर्जी की कमी होती है। ऐसे में तेज एक्सरसाइज, लंबे समय तक धूप में रहना, बहुत ज्यादा घरेलू काम या बेवजह भागदौड़ करने से थकान और चक्कर आ सकते हैं। पूजा की तैयारी जरूरी है, लेकिन जहां संभव हो काम पहले निपटा लें और व्रत वाले दिन आराम के लिए भी समय रखें।</p><h3>व्रत की कमजोरी समझकर न टालें</h3><p>प्यास लगना, मुंह सूखना, बहुत कम पेशाब आना, पेशाब का रंग बहुत गहरा होना, थकान, सिरदर्द और चक्कर डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं। अगर चक्कर बहुत ज्यादा हो, बेहोशी आए, भ्रम की स्थिति बने या कमजोरी तेजी से बढ़ रही हो, तो इसे सिर्फ व्रत का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज न करें।</p><p>अगर आपको <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/diabetes-me-kaunsi-sabji-kam-khani-chahiye-8-vegetables-blood-sugar-rrs05">डायबिटीज</a>, किडनी या हृदय से जुड़ी बीमारी है, आप गर्भवती हैं या ऐसी दवाएं लेती हैं जिनका खाना-पानी से संबंध है, तो निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/hartalika-teej-hairstyle-trendy-hair-styles-for-saree-lehenga-rrs05">Hartalika Teej Hairstyle: तीज पर साड़ी के साथ ट्राई करें ये 5 स्टाइलिश हेयरस्टाइल, लुक लगेगा एकदम परफेक्ट</a></aside><h3>सरगी में इन बातों का रखें ख्याल</h3><ul><li><p>व्रत से पहले दिनभर पर्याप्त पानी लें।</p></li><li><p>सरगी में एक साथ बहुत ज्यादा पानी न पिएं।</p></li><li><p>पानी वाले फल और लिक्विड को शामिल करें।</p></li><li><p>बहुत तला-भुना और भारी खाना कम रखें।</p></li><li><p>सिर्फ मिठाई या मीठी चीजों पर निर्भर न रहें।</p></li><li><p>व्रत वाले दिन फिजिकल एक्टिविटी से बचें।</p></li><li><p>चक्कर या बहुत ज्यादा कमजोरी को नजरअंदाज न करें।</p></li></ul>]]></content:encoded></item><item><title>मेंटल हेल्थ के लिए ट्रेनिंग हब बनेगा बेंगलुरु स्थित NIMHANS, ब्रिक्स बैठक में बनी सहमति</title><link>https://navbharatlive.com/india/nimhans-bengaluru-to-become-a-training-hub-for-mental-health-brics-meeting-nkr24</link><comments>https://navbharatlive.com/india/nimhans-bengaluru-to-become-a-training-hub-for-mental-health-brics-meeting-nkr24#comments</comments><guid isPermaLink="false">71447e05-31e8-4f98-b669-0110a7bb3be8</guid><pubDate>Sun, 13 Sep 2026 10:13:15 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-13T10:13:15.570+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>नितिन कुमार राय</atom:name><atom:uri>/api/author/2590629</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Physical and Mental Health,Health News,BRICS Summit,Mental Hospital</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-13/98qhvlt4/NIMHANS-Bengaluru.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ NIMHANS, बेंगलुरु]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[  The New Delhi Declaration 2026]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-13/98qhvlt4/NIMHANS-Bengaluru.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>देश</category><category>विदेश</category><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>BRICS On Mental Wellbeing</strong>: भारत मंडपम में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एकजुट होकर 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को स्वीकार किया गया है। घोषणा में मानसिक स्वास्थ्य के लिए ट्रेनिंग हब और 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का नेटवर्क बनाने में सहयोग करने पर सहमति बनी है। इसके अनुसार बेंगलुरु स्थित 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज' को कोऑर्डिनेटिंग सेंटर बनाया जाएगा।</p><h3>ब्रिक्स घोषणापत्र में मानसिक स्वास्थ्य का जिक्र</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/india/brics-summit-2026-new-delhi-declaration-global-south-gaza-un-wto-ai-key-points-ars24">नई दिल्ली घोषणापत्र</a> में कहा गया है कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का यह नेटवर्क ब्रिक्स देशों के बीच मिलकर रिसर्च करने, पॉलिसी पर बातचीत करने, बेहतरीन तरीकों के एक्सचेंज और सबूतों पर आधारित मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली रणनीतियों पर मिलकर काम करेगा। इससे मानसिक स्वास्थ्य पर मिलकर काम करने के लिए एक मंच मिल पाएगा।</p><h3>खास समूह चलाएगा नेटवर्क</h3><p>घोषणापत्र के अनुसार, <a href="https://navbharatlive.com/delhi/12th-brics-environment-ministers-meeting-delhi-climate-action-plan">BRICS के हर सदस्य </a>देश के प्रतिनिधियों का एक खास समूह मिलकर इस नेटवर्क को चलाएगा। यह समूह यह तय करेगा कि प्राइमरी हेल्थकेयर में मानसिक स्वास्थ्य को टिकाऊ और बड़े पैमाने पर शामिल करने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग हासिल करने की दिशा में "संतुलित फ़सले लेने और साझा जवाबदेही" बनी रहे। इसमें संकटों के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर से निपटने के महत्व पर जोर दिया गया है।</p><figure><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr"><a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | BRICS Summit: Prime Minister Narendra Modi says, &quot;The draft of the BRICS New Delhi Declaration 2026 is before us. It encapsulates the essence of our discussions and reflects our perspectives on key global and regional issues. It also outlines priorities for further… <a href="https://t.co/qZeAfoqpxy">pic.twitter.com/qZeAfoqpxy</a></p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://x.com/ANI/status/2098727102321431037?ref_src=twsrc%5Etfw">September 12, 2026</a></blockquote>
<script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>

</figure><h3>बच्चों और कमजोर लोगों के लिए करेगा काम</h3><p>घोषणापत्र के अनुसार मानसिक रूप से अस्वस्थ्य लोग विषेकर बच्चों और किशोरों जैसे कमजोर हालात वाले लोगों को समय पर, आसानी से उपलब्ध होने वाली और लगातार मानसिक स्वास्थ्य और मनो-सामाजिक सहायता दिया जाएगा। इसके अलावा, यह घोषणा गैर-संचारी रोगों (<a href="https://navbharatlive.com/entertainment/alka-yagnik-disease-disease-sensorineural-hearing-loss-sudden-deafness-reason-and-health-update-1818302.html">non-communicable diseases</a>) से जुड़ी उभरती चुनौतियों पर भी ध्यान देती है और 'स्वस्थ जीवन शैली के लिए ब्रिक्स मिशन' तथा 'स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने की संयुक्त पहल के लिए ब्रिक्स रोडमैप (2026-29)' की शुरुआत का समर्थन करती है।</p><h3>पारंपरिक मेडिसिन को दिया महत्व</h3><p>घोषणापत्र में पारंपरिक और इंटीग्रेटिव मेडिसिन की बढ़ती अहमियत के बारे में भी बात की गई है। ब्रिक्स देशों का कहना है कि हम सदस्य देशों के बीच बातचीत, सहयोग और आदान-प्रदान के लिए एक मंच के तौर पर, BRICS हेल्थ ट्रैक के तहत TCIM पर BRICS एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप बनाने के प्रस्ताव का स्वागत करते हैं। यह मंच इलाज और बीमारी से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाले औषधीय पौधों और हर्बल उत्पादों पर रिसर्च में तालमेल बिठाएगा।</p>]]></content:encoded></item><item><title>World First Aid Day: जलने, कटने या मोच आने पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, जानिए क्या हैं सही फर्स्ट एड</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/first-aid-mistakes-cuts-burns-nosebleed-sprain-injuries-asp28</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/first-aid-mistakes-cuts-burns-nosebleed-sprain-injuries-asp28#comments</comments><guid isPermaLink="false">0ff81de1-4c3c-4c20-803f-d09592fefb49</guid><pubDate>Sat, 12 Sep 2026 11:47:56 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-12T11:47:56.259+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>अंकिता पटेल</atom:name><atom:uri>/api/author/2548001</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Lifestyle News,Health Tips,Health News</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-12/cq8cm0k2/first-aid-tips-1.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ फर्स्ट एड बॉक्स]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ First Aid for Injuries]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-12/cq8cm0k2/first-aid-tips-1.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>First Aid for Injuries:</strong> रोजमर्रा की जिंदगी में कट लगना, जल जाना, अचानक गिरना या किसी की तबीयत बिगड़ जाना आम स्थिति है। ऐसे समय में डॉक्टर या अस्पताल तक पहुंचने से पहले दी जाने वाली शुरुआती मदद को प्राथमिक उपचार (First Aid) कहा जाता है। सही समय पर दिया गया उचित प्राथमिक उपचार न सिर्फ स्थिति को गंभीर होने से रोक सकता है, बल्कि कई मामलों में व्यक्ति की जान बचाने में भी अहम भूमिका निभाता है।</p><h3>कट या घाव होने पर क्या करें?</h3><p>छोटे-मोटे कट या घाव होने पर सबसे पहले अपने हाथों को अच्छी तरह धोएं। इसके बाद घाव को साफ बहते पानी से धीरे-धीरे साफ करें। यदि खून निकल रहा हो, तो साफ कपड़े या गॉज पैड से हल्का दबाव बनाएं। खून लगातार निकलता रहे या घाव ज्यादा गहरा हो, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल में चिकित्सकीय मदद लें।</p><h3>जलने पर टूथपेस्ट या बर्फ न लगाएं</h3><p>त्वचा जलने पर प्रभावित हिस्से को तुरंत ठंडे बहते पानी के नीचे करीब 15 से 20 मिनट तक रखें। जले हुए स्थान पर सीधे बर्फ, टूथपेस्ट, तेल, मक्खन या घी लगाने से बचें। गंभीर जलन होने पर बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें।</p><figure><img alt="Avoid these mistakes in first aid" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-12/onjj64qj/first-aid-tips-2.jpg" /><figcaption>प्राथमिक उपचार में न करें ये गलती</figcaption></figure><h3>प्राथमिक उपचार में न करें ये गलतियां</h3><ul><li><p><strong>नाक से खून आने पर:</strong> व्यक्ति को बैठाकर सिर थोड़ा आगे की ओर झुकाएं और नाक के मुलायम हिस्से को कुछ मिनट तक दबाकर रखें। सिर पीछे की ओर झुकाना सही तरीका नहीं है, क्योंकि इससे खून गले में जा सकता है। </p></li></ul><ul><li><p><strong>मोच या चोट लगने पर:</strong> प्रभावित हिस्से को आराम दें और कपड़े में लपेटकर ठंडी सिकाई करें। चोट लगने के तुरंत बाद प्रभावित स्थान की मालिश करने से बचें। तेज दर्द या फ्रैक्चर की आशंका होने पर डॉक्टर से जांच कराएं।</p></li></ul><figure><img alt="First Aid for Injuries" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-12/duyi0fur/first-aid-tips.jpg" /><figcaption>प्राथमिक चिकित्सा</figcaption></figure><h3>इन बातों का रखें खास ध्यान</h3><ul><li><p>बेहोश व्यक्ति को जबरदस्ती पानी, भोजन या दवा न दें।</p></li></ul><ul><li><p>घाव पर मिट्टी, राख या किसी अप्रमाणित घरेलू चीज का इस्तेमाल न करें।</p></li></ul><ul><li><p>शरीर में धंसी किसी नुकीली वस्तु को खुद निकालने की कोशिश न करें।</p></li></ul><ul><li><p>गंभीर चोट, ज्यादा खून बहने या गंभीर जलन की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।</p></li></ul>]]></content:encoded></item><item><title>Calcium Foods: क्या सिर्फ दूध पीने से शरीर को पर्याप्त कैल्शियम मिल जाता है? जानें रोज की डाइट में क्या खाएं</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/calcium-ki-kami-kaise-puri-kare-doodh-ke-alawa-calcium-rich-foods-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/calcium-ki-kami-kaise-puri-kare-doodh-ke-alawa-calcium-rich-foods-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">384810ad-cbf8-4fb2-8a71-0a51b2faa99f</guid><pubDate>Thu, 10 Sep 2026 09:33:00 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-10T09:33:00.763+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health Tips,Health News,calcium deficiency,Calcium Rich Food</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-10/mammzq2w/Calcium-rich-foods.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ कैल्शियम रिच फूड]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Calcium ki kami kaise puri kare doodh ke alawa calcium rich foods rrs05]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-10/mammzq2w/Calcium-rich-foods.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p>Calcium Rich Foods: कैल्शियम के लिए दूध को सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है, लेकिन क्या रोज एक गिलास दूध पीना शरीर में कैल्शियम की जरूरत को पूरा कर सकता है। ऐसा जरूरी नहीं है। जानिए डाइट में किन चीजों को शामिल करके कैल्शियम की जरूरत पूरी की जा सकती है।</p><p>कैल्शियम का नाम आते ही सबसे पहले दूध का ख्याल आता है। बचपन से ही हमें हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने के लिए दूध पीने की सलाह दी जाती है। दूध और डेयरी प्रोडक्ट जैसे दही, पनीर और छाछ कैल्शियम के अच्छे स्रोत जरूर हैं, लेकिन सिर्फ दूध पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता। शरीर के लिए कैल्शियम की जरूरत का पता उस व्यक्ति की उम्र और उसकी शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करता है। ICMR-NIN की 2020 RDA के मुताबिक 18 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों और महिलाओं को रोजाना 100 mg कैल्शियम की जरूरत होती है।</p><h3>सिर्फ दूध क्यों नहीं है काफी?</h3><p>मसलन आप रोज एक गिलास दूध पीते हैं। इससे कैल्शियम जरूर मिलता है, लेकिन पूरे दिन की जरूरत केवल इसी एक चीज से पूरी नहीं हो सकती है। इसके अलावा दही, पनीर, छाछ, रागी, बाजरा, सोया, टोफू, तिल, दाल, चना और कुछ हरी सब्जियां भी आपके डाइट का हिस्सा होना चाहिए।</p><h3>तिल है में है भरपूर कैल्शियम</h3><p>अगर आपकी डाइट में दूध या डेयरी उत्पाद कम है तो तिल एक अच्छा विकल्प हो सकता है। 100 ग्राम तिल में calcium की मात्रा दूध और पनीर की तुलना में अधिक होती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि रोज 100 ग्राम तिल खाया जाए। आप तिल को सब्जी, चटनी, सलाद, रोटी के आटे या <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/5-ways-to-eat-sesame-seeds-in-winter-1506556.html">तिल के लड्डू</a> की तरह अपने डाइट में शामिल कर सकते हैं।</p><h3>कैसे बढ़ाएं कैल्शियम का एब्जॉर्बशन</h3><p>शरीर के लिए <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/calcium-rich-foods-higher-than-milk-indian-foods-for-strong-bones-1855767.html">कैल्शियम रिच फूड </a>खाना ही अनिवार्य नहीं है, उसका एब्जॉर्बशन भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए विटामिन D की भूमिका अहम होती है। एक वयस्क के लिए विटामिन D 600 IU प्रतिदिन होनी चाहिए। इसके लिए बैलेंस फूड, फिजिकल एक्टिविटी और धूप बेहद जरूरी है।</p><h3>रोज की थाली में क्या रखें?</h3><p>अगर आप अपने शरीर में कैल्शियम की मात्रा को सही रखना चाहते हैं, तो दिनभर की डाइट को इस तरीके से बैलेंस कर सकते हैं।</p><ul><li><p>सुबह: दूध या दही</p></li><li><p>नाश्ते में: रागी/बाजरा आधारित चीजें जैसे चीला</p></li><li><p>दोपहर: दाल, सब्जी और रोटी/चावल के साथ दही</p></li><li><p>शाम: तिल, चना या कुछ नट्स</p></li><li><p>रात: पनीर, टोफू या सोया के साथ सब्जियां</p></li></ul><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/banana-in-morning-khana-khali-pet-sahi-hai-rrs05">Banana in Morning Benefits: सुबह केला खाना कितना फायदेमंद है? जानिए खाली पेट खाना सही है या नहीं </a></aside><h3>कैल्शियम की कमी को नजरअंदाज न करें</h3><p>कैल्शियम सिर्फ हड्डियों के लिए ही नहीं बल्कि यह मांसपेशियों के काम, नर्व सिग्नलिंग और कई दूसरे शारीरिक फंक्शन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर का अधिकांश कैल्शियम हड्डियों और दांतों में जमा होता है। कैल्शियम की कमी होने पर हड्डियां कमजोर होती हैं, जिससे आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। अगर आपके शरीर में कैल्शियम बहुत ज्यादा कम है, तो मांसपेशियों में ऐंठन और कमजोरी भी हो सकती है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Banana in Morning Benefits: सुबह केला खाना कितना फायदेमंद है? जानिए खाली पेट खाना सही है या नहीं </title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/banana-in-morning-khana-khali-pet-sahi-hai-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/banana-in-morning-khana-khali-pet-sahi-hai-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">b42f9381-80a2-4b38-9b58-d891347a1f4c</guid><pubDate>Tue, 08 Sep 2026 08:40:10 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-08T08:40:10.886+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health News,Diabetes,Breakfast meal</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-08/gn929x9k/Eating-Banana-in-Morning.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ केला]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Banana in morning khana khali pet sahi hai]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-08/gn929x9k/Eating-Banana-in-Morning.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Benefits Of Eating Banana In Morning Empty Stomach:</strong> ज्यादातर भारतीय अपने सुबह की शुरुआत चाय-कॉफी से करते हैं, तो कुछ लोग दिन की शुरुआत किसी फल से करना पसंद करते हैं। इनमें केला सबसे आसान चॉइस है, लेकिन क्या सुबह खाली पेट केला खाना सही है या केले को नाश्ते के साथ खाना ज्यादा बेहतर है?</p><p>सुबह केला खाना बिल्कुल सेफ है, लेकिन इसे नाश्ते के विकल्प के रूप में खाना सही नहीं हैं। केले के साथ प्रोटीन और हेल्दी फैट वाले खाद्य पदार्थों को भी शामिल किया जाना चाहिए।</p><h3>सुबह केला खाने के फायदे</h3><p>केला में फाइबर, पोटैशियम, विटामिन B6 और विटामिन C जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। एक सामान्य केले में लगभग 3 ग्राम फाइबर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है और डाइजेस्टिव सिस्टम को सपोर्ट करता है।</p><p>केले में मौजूद पोटैशियम शरीर में फ्लूइड बैलेंस और मसल्स को सपोर्ट करता है। यही वजह है कि सुबह या वर्कआउट से पहले केला लेना कई लोगों के लिए एनर्जी का अच्छा सोर्स होता है।</p><h3>केले के साथ क्या खाएं?</h3><p>केले को नाश्ते में शामिल करने के लिए इसे इन तरीकों से शामिल कर सकते हैं-</p><ul><li><p>केला और दही</p></li><li><p>केला, ओट्स और चिया सीड्स</p></li><li><p>केला और नट्स</p></li><li><p>ओटमील में कटा हुआ केला</p></li><li><p>केला और पीनट बटर</p></li><li><p>केला और दूध के साथ संतुलित नाश्ता</p></li></ul><p><a href="https://navbharatlive.com/photos/blueberry-oats-recipe-protein-rich-snacks-soha-ali-khan-diet">प्रोटीन और हेल्दी फैट </a>के साथ केला खाने से नाश्ता ज्यादा संतुलित बनता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/diabetes-me-kaunsi-sabji-kam-khani-chahiye-8-vegetables-blood-sugar-rrs05">Diabetes Diet: डायबिटीज में सेहतमंद समझकर न खाएं ये 8 सब्जियां, बढ़ सकता है ब्लड शुगर </a></aside><h3>डायबिटीज वालों को ध्यान देने की आवश्यकता</h3><p>अगर आपको डायबिटीज है, तो <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/blood-sugar-control-vegetables-to-avoid-1847732.html">ब्लड शुगर को कंट्रोल</a> करने के लिए उसकी मात्रा पर ध्यान देना चाहिए। शुगर के मरीजों को पके हुए केले खाने की सलाह दी जाती है। पके हुए केले में कार्बोहाइड्रेट और शुगर ब्लड ग्लूकोज को प्रभावित करते हैं। फाइबर इस प्रभाव को कुछ हद तक धीमा करता है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Diabetes Diet: डायबिटीज में सेहतमंद समझकर न खाएं ये 8 सब्जियां, बढ़ सकता है ब्लड शुगर </title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/diabetes-me-kaunsi-sabji-kam-khani-chahiye-8-vegetables-blood-sugar-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/diabetes-me-kaunsi-sabji-kam-khani-chahiye-8-vegetables-blood-sugar-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">5eb53813-deb8-4a1e-a52a-6bc0c004a504</guid><pubDate>Mon, 07 Sep 2026 08:39:47 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-07T08:39:47.558+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health Tips,Health News,Protein,Diabetes</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-07/rztytuhk/vegetables-in-Diabetes.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ डायबिटीज डाइट]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Diabetes me kaunsi sabji kam khani chahiye 8 vegetables blood sugar RRS05]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-07/rztytuhk/vegetables-in-Diabetes.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Vegetables To Avoid In Diabetes:</strong> डायबिटीज में खानपान और लाइफस्टाइल का सीधा संबंध ब्लड शुगर के बढ़ने-घटने से होता है। ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए अपने खानपान का विशेष ध्यान रखना होता है।</p><p>कई ऐसी सब्जियां होती है, जिनमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है। जिन सब्जियों में स्टार्च कम होता है, वो डायबिटीज रोगियों के लिए सही माना जाता है, क्योंकि इनमें कार्बोहाइड्रेट अपेक्षाकृत कम और फाइबर अधिक होते हैं। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार, प्लेट का लगभग आधा हिस्सा नॉन स्टार्च वाली सब्जियों का होना चाहिए। स्टार्च वाली सब्जियों का सेवन पूरी तरह से बंद करने की बजाय इसकी मात्रा का ध्यान रखना अनिवार्य होता है। &nbsp;</p><h3>आलू की मात्रा रखें सीमित</h3><p>आलू में बहुत अधिक मात्रा में स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट होता है। इसलिए डायबिटीज में आलू की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है। खासकर फ्रेंच फ्राइज या ज्यादा तेल में बने आलू नियमित रूप से खाना सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके बजाय उबला या कम तेल में बना आलू खाया जा सकता है।</p><h3>हरी मटर भी सोच-समझकर खाएं</h3><p>हरी मटर पौष्टिक होती है और इसमें फाइबर समेत कई पोषक तत्व होते हैं, लेकिन इसे भी स्टार्च वाली सब्जियों की कैटेगरी में रखा गया है। इसलिए डायबिटीज में मटर को असीमित मात्रा में खाने के बजाय पोर्शन कंट्रोल रखना बेहतर है।</p><h3>मक्का यानी कॉर्न</h3><p>मक्का भी कार्बोहाइड्रेट वाली सब्जियों में शामिल है। कॉर्न को क्वालिटी कार्बोहाइड्रेट के हिस्से के तौर पर लिया जा सकता है। मकई को मक्खन, ज्यादा नमक या मीठे सॉस के साथ खाने के बजाय साधारण तरीके से लेना बेहतर विकल्प है।</p><h3>शकरकंद</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/7-easy-healthy-sweet-potato-snacks-recipes-for-weight-loss-and-taste-1572213.html">शकरकंद </a>का स्वाद मीठा होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि डायबिटीज में इसे हमेशा पूरी तरह प्रतिबंधित करना चाहिए। शकरकंद में कार्ब्स की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसे खाते समय मात्रा को ध्यान में रखा जाना चाहिए।</p><h3>कद्दू</h3><p>कद्दू और ठंड में मिलने वाले कुछ स्कवॉश में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है। इन्हें भी पूरी तरह बंद करने के बजाय भोजन में इनकी मात्रा को संतुलित रखना चाहिए।</p><h3>सब्जी से ज्यादा जरूरी है उसे बनाने का तरीका</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/inhaled-insulin-vs-injection-diabetes-treatment-benefits-side-effects-rrs05">डायबिटीज</a> में सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कौन-सी सब्जी खाई जा रही है। सब्जियों के पकाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। यदि सब्जियों को बहुत ज्यादा तेल में तलने या उनमें भारी बहुत ज्यादा मक्खन, क्रीम या सॉस का इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे कैलोरी औऱ फैट दोनों बढ़ सकते हैं।</p><h3>डायबिटीज में कौन-सी सब्जियां खाएं</h3><ul><li><p>पालक और अन्य हरी सब्जियां</p></li><li><p>ब्रोकली</p></li><li><p>फूलगोभी</p></li><li><p>पत्तागोभी</p></li><li><p>खीरा</p></li><li><p>भिंडी</p></li><li><p>बैंगन</p></li><li><p>शिमला मिर्च</p></li><li><p>टमाटर</p></li><li><p>मशरूम</p></li><li><p>हरी बीन्स</p></li><li><p>मूली</p></li><li><p>लौकी</p></li><li><p>करेला</p></li><li><p>तोरी</p></li></ul><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/running-vs-cycling-which-is-better-for-weight-loss-fitness-rrs05">Running या Cycling? वजन घटाने और फिटनेस के लिए कौन सी एक्सरसाइज है ज्यादा असरदार, जानें फायदे और अंतर</a></aside><h3>डायबिटीज में सब्जी खाने का आसान नियम</h3><p>डायबिटीज के मरीजों के प्लेट में लगभग आधा हिस्सा नॉन स्टार्च वाली सब्जियां, एक-चौथाई हिस्सा प्रोटीन और एक-चौथाई हिस्सा गुड कार्ब्स वाले खाने का होना चाहिए। इसका मतलब है कि खाने की पूरी प्लेट को आलू, मटर या मक्का जैसी सब्जियों से भरने के बजाय उनके साथ हरी पत्तेदार सब्जियां, फूलगोभी, खीरा, भिंडी, लौकी जैसी सब्जियों को शामिल किया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Running या Cycling? वजन घटाने और फिटनेस के लिए कौन सी एक्सरसाइज है ज्यादा असरदार, जानें फायदे और अंतर</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/running-vs-cycling-which-is-better-for-weight-loss-fitness-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/running-vs-cycling-which-is-better-for-weight-loss-fitness-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">45b27b8f-50a0-489a-aef7-a22782000f17</guid><pubDate>Sun, 06 Sep 2026 16:57:12 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-06T16:57:12.977+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Good Health,Health Tips,Fitness Tips</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-06/ugghfo34/Running-vs-Cycling.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ रनिंग और साइकलिंग]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Running vs cycling which is better for weight loss fitness RRS05]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-06/ugghfo34/Running-vs-Cycling.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Running VS Cycling Calories Burned:</strong> अगर आप फिट रहने, स्टैमिना बढ़ाने या वजन कम करने के लिए कार्डियो एक्सरसाइज शुरू करना चाहते हैं, तो रनिंग और साइक्लिंग दो बेहतरीन एक्टिविटी हो सकते हैं, लेकिन इनमें से कौन ज्यादा असरदार है?</p><p>यह आपके फिटनेस गोल, वर्कआउट की इंटेंसिटी औऱ शरीर की जरूरत पर निर्भर करता है। दोनों ही एक्टिविटी हमारे कार्डियो वैस्कुलर हेल्थ के लिए अच्छी मानी जाती है।</p><h3>वेटलॉस के लिए रनिंग या साइकलिंग?</h3><p>अगर आपका गोल कैलोरी बर्न करना या वजन कम करना है, तो रनिंग अधिक कैलोरीज बर्न करती है। इसकी वजह यह है कि इसमें शरीर की ज्यादा मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और एक्सरसाइज का प्रभाव अधिक होता है। हालांकि <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/what-are-the-benefits-of-cycling-1133058.html">साइकलिंग</a> को लंबे समय तक करना आसान हो सकता है, इसलिए लंबे वर्कआउट में इससे भी अच्छी कैलोरीज बर्न की जा सकती है।</p><p>कोई भी शारीरिक गतिविधि कितनी देर और कितनी इंटेंसिटी से किया जा रहा है, यह भी महत्वपूर्ण है।</p><h3>जॉइंट्स के लिए कौन बेहतर?</h3><p>आपके शरीर के जॉइंट्स के लिए साइकलिंग अच्छा विकल्प है। रनिंग के दौरान पैर बार-बार जमीन पर पड़ते हैं, इससे शरीर पर अधिक प्रभाव पड़ता है। साथ ही साइकलिंग रनिंग की तुलना में लो-इंपैक्ट एक्सरसाइज है, इसलिए कई लोगों के लिए इसे लंबे समय तक करना आसान होता है। हालांकि साइकलिंग में सही पॉश्चर व बाइक सेटअप भी जरूरी है। गलत पोजिशन से लोअर बैकपेन बढ़ सकता है।</p><h3>मसल्स के लिए कौन बेहतर?</h3><p>साइकलिंग खासतौर पर पैरों और लोअर बॉडी मसल्स को मजबूत करने का करती है। लगातार पैडल चलाने से पैरों की मांसपेशियां इंगेज होती है, इसलिए यह लोअर बॉडी को मजबूत करने में मदद करती है। जब कि रनिंग पूरे शरीर की कई मांसपेशियों को एक्टिव करती है और मसल्स को मजबूत व टोन बनाने में मदद करती है।</p><h3>कार्डियो के लिए दोनों अच्छे</h3><p>अगर आपका उद्देश्य दिल की सेहत और स्टैमिना को सुधारना है, तो <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/how-to-protect-lung-health-during-winter-running-safety-tips-1513698.html">रनिंग</a> और साइकलिंग दोनों ही अच्छे विकल्प है। दोनों को एक साथ इन-कार्पोरेट भी किया जा सकता है। नियमित एरोबिक एक्सरसाइज कार्डियो वैस्कुलर हेल्थ को सपोर्ट करती है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/intestines-colon-cleanse-overnight-pet-saaf-karne-ke-tarike-rrs05">Gut Cleansing Tips: आंतों में जमा सारा कचरा एक ही रात में कैसे दूर करें? रात को सोने से पहले करें ये आसान उपाय</a></aside><h3>तो किसे चुनें?</h3><p>अगर आप ज्यादा कैलोरी बर्न करने की सोच रहें हैं या आप इंटेंस वर्कआउट करना चाहते हैं, तो दौड़ना बेहतर है। दूसरी ओर, यदि आप लो इंपैक्ट कार्डियो करना चाहते हैं, तो साइकलिंग बेहतर होगा। उस एक्टिविटी का चयन करना चाहिए, जो आपके लिए आसान हो और जिसमें आप कंसिस्टेंट रह सके।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Gut Cleansing Tips: आंतों में जमा सारा कचरा एक ही रात में कैसे दूर करें? रात को सोने से पहले करें ये आसान उपाय</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/intestines-colon-cleanse-overnight-pet-saaf-karne-ke-tarike-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/intestines-colon-cleanse-overnight-pet-saaf-karne-ke-tarike-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">1b8a269f-5694-426c-8eef-2d0646e9b7d2</guid><pubDate>Sun, 06 Sep 2026 10:39:34 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-06T10:39:34.314+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Good Health,Health Tips,Health News,Clean Water</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-06/wgr8b284/Gut-Cleaning-Tips.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ गट हेल्थ]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Intestines colon cleanse overnight pet saaf karne ke tarike RRS05]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-06/wgr8b284/Gut-Cleaning-Tips.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Pet Saaf Karne Ke Tarike:</strong> दिनभर का अनहेल्दी खाना, कम पानी पीना, फाइबर की कमी और घंटों बैठे रहने की आदत का असर सीधे हमारे गट हेल्थ पर पड़ता है। पेट भारी लगना, गैस, ब्लोटिंग या कई दिनों तक ठीक से पेट साफ न होना आपके ओवर ऑल हेल्थ को परेशान कर सकता है।</p><p>हमारा डाइजेस्टिव सिस्टम खुद से ही क्लीन करने की क्षमता रखता है। हमारा पूरा सिस्टम हमारे शरीर से वेस्ट को खुद ही बाहर निकालता है, लेकिन यदि आपको पेट संबंधी कोई भी समस्या है, तो यह पूरा सिस्टम डिस्टर्ब हो जाता है।</p><h3>रात में पर्याप्त पानी पिएं</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/these-9-yoga-poses-will-relieve-everything-from-constipation-to-stress-1529845.html">कब्ज की समस्या</a> में पानी का महत्वपूर्ण रोल है। पर्याप्त पानी पीना आपके पूरे डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए जरूरी है। इसलिए दिनभर पानी पीते रहें और रात में भी अपनी प्यास के अनुसार पानी लें। लेकिन सोने से ठीक पहले पानी पीना आपके रातों की नींद को खराब कर सकता है और नींद की कमी भी आपके गट हेल्थ को खराब कर सकती है।</p><h3>रात का खाना हल्का और फाइबर से भरपूर होना चाहिए</h3><p>अगर आप रात में बहुत ज्यादा तला-भुना या भारी खाना खाते हैं और फिर तुरंत सो जाते हैं, तो पेट में भारीपन महसूस होता है। रात के खाने में सब्जियां, दाल, ओट्स या दूसरे फाइबर वाले खाद्य पदार्थ शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है। फल, सब्जियां, बीन्स और साबुत अनाज <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/high-protein-diet-creates-risk-of-cancer-and-heart-disease-1726014.html">फाइबर के अच्छे स्रोत</a> हैं। फाइबर को रोजाना खाने में शामिल करने से पेट साफ होने में मदद मिलती है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/chia-seeds-with-water-or-yogurt-gut-health-benefits-right-way-to-eat-rrs05">Chia Seeds With Water or Yogurt: पानी में भिगोकर खाएं या दही में? हेल्थ के लिए जानें कौन सा तरीका है बेहतर</a></aside><h3>खाने के बाद थोड़ी देर जरूर टहलें</h3><p>रात का खाना खाने के बाद सीधे बिस्तर पर जाने के बजाय कुछ देर हल्की वॉक लें। शरीर को एक्टिव रखना आपके गट हेल्थ को बेहतर बनाता है। इसके लिए घंटों वर्कआउट की जरूरत नहीं है। खाना खाने के बाद हल्की वॉक को अपनी डेली रूटीन में शामिल करें। &nbsp;</p><h3>नेचुरल फाइबर को अपनाएं</h3><p>अगर कब्ज की वजह से आपको समस्या होती है, तो फाइबर रिच फूड मददगार हो सकते हैं। फल, सब्जियां, दाल, ओट्स और साबुत अनाज को रोज के भोजन का हिस्सा बनाना बेहतर है। कुछ लोगों के लिए प्रून्स यानी सूखे हुए आलूबुखारे भी कब्ज में मदद करते हैं। इनमें फाइबर के साथ-साथ ऐसे नेचुरल कंपाउंड होते हैं जो आंत में पानी सोंखने में मदद करते हैं। सभी का डाइजेशन अलग होता है। किसी चीज से आपको फायदा हो सकता है, जबकि दूसरे व्यक्ति को उससे ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Chia Seeds With Water or Yogurt: पानी में भिगोकर खाएं या दही में? हेल्थ के लिए जानें कौन सा तरीका है बेहतर</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/chia-seeds-with-water-or-yogurt-gut-health-benefits-right-way-to-eat-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/chia-seeds-with-water-or-yogurt-gut-health-benefits-right-way-to-eat-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">706bf53e-7b87-41a1-87d6-9d2d95f849dc</guid><pubDate>Tue, 01 Sep 2026 11:02:04 +0530</pubDate><atom:updated>2026-09-01T11:02:04.621+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health News,Protein,Calcium Rich Food</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-01/3hd0a9bu/Chai-Seeds-Benefits.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ चिया सीड्स]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Chia seeds with water or yogurt gut health benefits right way to eat rrs05]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-09-01/3hd0a9bu/Chai-Seeds-Benefits.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Chia Seeds With Water or Yogurt:</strong> चिया सीड्स को आजकल हेल्दी डाइट का हिस्सा माना जाता है। चिया सीड्स में सभी प्रकार के जरूरी अमीनो एसिड पाए जाते हैं। इन्हें रात भर पानी में भिगोकर या सुबह चिया वॉटर के फॉर्म में लिया जाता है।</p><p>लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चिया सीड्स को पानी के बजाय दही के साथ लेना अधिक फायदेमंद हो सकता है? एक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के अनुसार, दोनों तरीकों के अपने फायदे हैं, लेकिन दही के साथ चिया सीड्स लेने से फाइबर और प्रोबायोटिक्स का कॉम्बिनेशन मिलता है।</p><h3>पानी में चिया सीड्स लेने पर क्या मिलता है?</h3><p>चिया सीड्स फाइबर से भरपूर होते हैं। पानी में भिगोने पर इनके घुलनशील फाइबर पानी सोखकर जेल जैसा टेक्स्चर ले लेते हैं। इससे डाइट में फाइबर बढ़ाने और हाइड्रेशन में मदद मिलती है। इसलिए अगर आपको दही पसंद नहीं हैया आपको डेयरी प्रोडक्ट से एलर्जी है, तो पानी में भिगोया हुआ चिया सीड्स आपके लिए बेहतर विकल्प है। &nbsp;</p><h3>दही के साथ क्यों बेहतर हो सकता है?</h3><p>चिया सीड्स में मौजूद फाइबर आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया के लिए प्रीबायोटिक की तरह काम करता है। वहीं, दही से प्रोबायोटिक्स मिलते हैं यानी दोनों को साथ लेने पर प्रीबायोटिक और प्रोबायोटिक दोनों का कॉम्बिनेशन मिलता है, जो गट हेल्थ को सपोर्ट करके उसे बेहतर बनाता है।</p><p>दही इस कॉम्बिनेशन में प्रोटीन और <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/calcium-rich-foods-8-best-foods-to-overcome-calcium-deficiency-without-milk-1864412.html">कैल्शियम की कमी </a>को भी पूरा करता है। इसलिए पोषण विशेषज्ञ चिया सीड्स को दही के साथ खाने की सलाह देते हैं।</p><h3>कैसे खाएं चिया सीड्स?</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/health-benefit-and-side-effects-of-chia-seeds-1746893.html">चिया सीड्स</a> को सीधे सूखा खाने के बजाय पहले पर्याप्त पानी में अच्छी तरह भिगोए। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट ने 4–5 घंटे तक भिगोने की सलाह दी जाती है। दही में चिया सीड् को भिगो कर उसके ऊपर कुछ नट्स और सीजनल फ्रूट डाल कर खानी चाहिए।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/national-nutrition-week-2026-5-colour-healthy-plate-balanced-diet-rrs05">National Nutrition Week: खाना पेट भरने के लिए नहीं, शरीर को पोषण देने के लिए खाएं; थाली में जरूर हों ये 5 रंग</a></aside><h3>किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?</h3><p>कुछ लोगों में चिया सीड्स खाने से ब्लोटिंग और कॉन्सटिपेशन की समस्या बढ़ सकती है। &nbsp;इसलिए शुरुआत कम मात्रा से करना बेहतर है और साथ ही पर्याप्त पानी पीना चाहिए। जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्या या निगलने में परेशानी है, उन्हें अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।</p>]]></content:encoded></item><item><title>इंजेक्शन से अलग कैसे है ‘इंसुलिन इनहेलर’? जानें किस डायबिटीज मरीज को दिया जाता है Insulin Inhaler</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/inhaled-insulin-vs-injection-diabetes-treatment-benefits-side-effects-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/inhaled-insulin-vs-injection-diabetes-treatment-benefits-side-effects-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">05eade3b-0338-4dc3-b2cd-164521ce1a37</guid><pubDate>Sun, 30 Aug 2026 16:35:58 +0530</pubDate><atom:updated>2026-08-30T16:35:58.892+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health News,Diabetes</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-30/bpjanbn4/Insulin-Inhaler.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ इंसुलिन इंहेलर]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Inhaled insulin vs injection diabetes treatment benefits side effects RRS05]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-30/bpjanbn4/Insulin-Inhaler.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Inhaled Insulin VS Injection:</strong> डायबिटीज के मरीज को जरूरत पड़ने पर इंसुलिन का इंजेक्शन लगाया जाता है, लेकिन अब एक ऐसा इंसुलिन ईजाद किया गया है, जो सांस के जरिए शरीर में जाता है और जल्दी असर करता है। इसे सोशल मीडिया पर इंसुलिन वेप कहा जाता है, लेकिन यह कोई वेपिंग डिवाइस नहीं, बल्कि इंसुलिन पाउडर देने वाला मेडिकल इनहेलर की तरह है।</p><h3>क्या है Inhaled Insulin?</h3><p>इनहेल्ड इंसुलिन में इंसुलिन को इंजेक्शन की तरह त्वचा के नीचे देने के बजाय एक खास इंहेलर के जरिए फेफड़ों तक पहुंचाया जाता है। वहां से यह तेजी से ब्लड स्ट्रीम में एब्जॉर्ब होता है। इंसुलिन इंहेलर मुख्य रूप से खाने के बाद बढ़ने वाली ब्लड शुगर को कंट्रोल में करने के लिए इस्तेमाल होने वाला रैपिड एक्टिंग इंसुलिन है।</p><h3>इंजेक्शन से कैसे अलग है?</h3><p>आम तौर पर लगाया जाने वाला <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/pmos-diet-best-indian-foods-for-insulin-resistance-and-blood-sugar-control-1877515.html">इंसुलिन इंजेक्शन</a> त्वचा के नीचे मौजूद फैटी टिश्यू के जरिए शरीर में पहुंचता है, जबकि इंसुलिन इंहेलर फेफड़ों के जरिए ब्लड स्ट्रीम में पहुंचता है। इसकी खासियत इसका तेजी से एब्जॉर्ब हो जाना है। इसका एक फायदा नीडल फ्री होना भी है।</p><h3>कितनी देर में करता है असर?</h3><p>इंसुलिन इंहेलर लगभग 10–15 मिनट में काम करना शुरू कर देता है, जबकि रैपिड एक्टिंग इंसुलिन को असर करने में अधिक समय लगता है। इसलिए इसे आमतौर पर भोजन से पहले इस्तेमाल किया जाता है, ताकि खाने के बाद होने वाले ब्लड शुगर स्पाइक को कंट्रोल किया जा सके।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/tea-side-effects-5-foods-to-avoid-with-tea-health-tips-rrs05">Tea Side Effects: चाय के साथ भूलकर भी न खाएं ये 6 चीजें, शरीर को हो सकता है भारी नुकसान!</a></aside><h3>किन लोगों के लिए हो सकता है विकल्प?</h3><p>यह बुजुर्ग मरीज, जिन्हें टाइप 1 और टाइप 2 <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/benefits-of-drinking-hibiscus-tea-1434972.html">डायबिटीज की समस्या</a> है, उनके लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें रोजाना इंसुलिन का इंजेक्शन लेने में समस्या होती है। इसे शुरू करने से पहले डायबिटीज ट्रीटमेंट, इंसुलिन की जरूरत और फेफड़े की सेहत को ध्यान में रखा जाता है। इसका फैसला पूरी तरह से डॉक्टर की निगरानी में होती है।</p><h3>इंसुलिन इंहेलर के साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं?</h3><p>इंसुलिन इंहेलर लेने पर शुरुआत मेंखांसी, गले में खरासया छाती में ड्राईनेस की समस्या महसूस हो सकती है। इसके डोज की बात करें, तो यह इंजेक्टेड इंसुलिन की तुलना में कम फ्लेक्सिकबल होती है। इसलिए इसे डॉक्टर की निगरानी में ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Tea Side Effects: चाय के साथ भूलकर भी न खाएं ये 6 चीजें, शरीर को हो सकता है भारी नुकसान!</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/tea-side-effects-5-foods-to-avoid-with-tea-health-tips-rrs05</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/tea-side-effects-5-foods-to-avoid-with-tea-health-tips-rrs05#comments</comments><guid isPermaLink="false">c8a53376-ec94-46ab-8b9c-76dcb75d6127</guid><pubDate>Sun, 30 Aug 2026 12:09:08 +0530</pubDate><atom:updated>2026-08-30T12:09:08.143+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health Tips,Tea Benefits</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-30/q90u55oy/Tea-Benefits.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ चाय]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ tea side effects 5 foods to avoid with tea health tips RRS05 ]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-30/q90u55oy/Tea-Benefits.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p>Tea And Food Combination: चाय के बिना दिन की शुरुआत या शाम की चुस्की अधूरी लगती है। लेकिन चाय के साथ खाई जाने वाली कई ऐसी चीजें हैं, जो सेहत के लिए समस्या पैदा कर सकती है। खासकर आयरन से भरपूर खाने के साथ चाय पीने से पोषक तत्वों का एब्जॉर्बशन प्रभावित होता है। वहीं कुछ ऐसे स्नैक्स ज्यादा चीनी, तेल और कैफीन का सेवन बढ़ाते हैं। आइए जानते हैं चाय के साथ किन 5 चीजों को खाने से बचना बेहतर है।</p><h3>आयरन रिच फूड के साथ चाय से बचें</h3><figure><img alt="Tea And Food Combination" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-30/4sydi03w/Tea-and-food-combination.jpg" /><figcaption>चाय</figcaption></figure><p>क्या आपकी थाली में दाल, चना, राजमा या पालक है, तो उसके साथ चाय पीने की आदत बदल दें। चाय में मौजूद पॉलीफेनोल और टैनिस प्लांट बेस्ड फूड्स से मिलने वाले नॉन हिम आयरन के एबेजॉर्बशन को कम करता है। खाने और चाय के बीच कुछ समय का गैप होना चाहिए।</p><h3>चाय के साथ समोसा-पकौड़ा रोजाना न खाएं</h3><figure><img alt="Tea And Food Combination" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-30/jpqp115r/Chai-Pakode.jpg" /><figcaption>चाय</figcaption></figure><p>गरमा-गरम चाय के साथ समोसा, पकौड़ा या कचौरी का स्वाद भले ही शानदार लगता हो, लेकिन यह कॉम्बिनेशन रोज की आदत बनाना सही नहीं है। इन नाश्तों में अक्सर तेल, नमक और कैलोरी ज्यादा होती हैं। बार-बार खाने से आपकी ओवरऑल डाइट की न्यूट्रिशनल क्वालिटी प्रभावित होती है। रोज के नाश्ते के लिए <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/roasted-vs-soaked-vs-cooked-gram-protein-benefits-ayurvedic-tips-1610857.html">भुना हुआ चना</a>, नट्स या होममेड स्नैक बेहतर ऑप्शन है।</p><h3>चाय के साथ ज्यादा स्पाइसी फूड कर सकता है परेशान</h3><figure><img alt="Tea And Food Combination" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-30/4iqd5bhs/chai-Namkeen.jpg" /><figcaption>चाय</figcaption></figure><p>चाय के साथ <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/food/healthy-peanut-chaat-recipe-evening-snack">तीखी चाट</a>, तीखे चटाकेदार नमकीन या बहुत मसालेदार खाना कुछ लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। अगर आपको पहले से एसिटिडी, हार्टबर्न या डाइजेशन की समस्या है, तो चाय और बहुत तीखा खाने का कॉम्बिनेशन ट्रिगर करता है। ऐसे में चाय के साथ तीखा नाश्ता करने से बचने की सलाह दी जाती है।</p><h3>चाय के साथ मीठा</h3><figure><img alt="Tea And Food Combination" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-30/y2a6t6xm/Chai-Biscuit.jpg" /><figcaption>चाय</figcaption></figure><p>एक कप चाय और दो बिस्किट से शुरू हुई आदत कब कई बिस्किट, केक या मिठाई तक पहुंच जाती है, पता ही नहीं चलता। अगर चाय में पहले से चीनी है और साथ में कोई मीठा स्नैक लिया जाए, तो मीठे और हाई कैलोरी का सेवन बढ़ जाता है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/blue-turmeric-benefits-curcuma-caesia-black-turmeric-health-uses">Blue Turmeric Benefits: पीली हल्दी से अलग है नीली हल्दी, जानें इस दुर्लभ जड़ के 5 संभावित फायदे</a></aside><h3>चाय के साथ चॉकलेट भी सोच-समझकर खाएं</h3><figure><img alt="Tea And Food Combination" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-30/u661haa8/Chai-and-chocolate.jpg" /><figcaption>चाय</figcaption></figure><p>चॉकलेट और चाय दोनों में कैफीन होता है। अगर इनका सेवन ज्यादा मात्रा में किया जाए, तो कुछ संवेदनशील लोगों में बेचैनी, तेज धड़कन या नींद में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर अगर आप शाम या रात में चाय पीते हैं, तो चॉकलेट की मात्रा पर कंट्रोल करना चाहिए।</p>]]></content:encoded></item><item><title>खून की जरूरत पड़ते ही न हों परेशान, घर बैठे ऐसे चेक करें किस ब्लड बैंक में है आपका Blood Group</title><link>https://navbharatlive.com/technology/need-blood-check-from-the-comfort-of-your-home-e-raktkosh-portal-srs13</link><comments>https://navbharatlive.com/technology/need-blood-check-from-the-comfort-of-your-home-e-raktkosh-portal-srs13#comments</comments><guid isPermaLink="false">034439cf-34b4-4f9e-a6c7-05dbd4826fbb</guid><pubDate>Sun, 30 Aug 2026 04:00:00 +0530</pubDate><atom:updated>2026-08-30T04:00:00.000+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>सिमरन सिंह</atom:name><atom:uri>/api/author/2547971</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health News,Emergency,Tech News</media:keywords><media:content height="699" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-29/yf2irua2/e-RaktKosh-Portal.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ e-RaktKosh Portal में कैसे पता चलती है खून की जानकारी।]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ need blood check from the comfort of your home e-RaktKosh Portal srs13]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-29/yf2irua2/e-RaktKosh-Portal.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>टेक्नॉलजी</category><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>How To Check Online Blood Stock:</strong> मेडिकल इमरजेंसी में हर सेकंड बेहद अहम होता है। खासकर जब किसी मरीज को तुरंत खून की जरूरत पड़ जाए तब सही ब्लड ग्रुप की तलाश में अलग-अलग अस्पतालों और ब्लड बैंकों के चक्कर लगाना परेशानी बढ़ा सकता है। लेकिन अब इस काम के लिए हर जगह फोन करने की जरूरत नहीं है। भारत सरकार का e-RaktKosh डिजिटल प्लेटफॉर्म घर बैठे आसपास के ब्लड बैंकों में उपलब्ध ब्लड और दूसरे ब्लड कंपोनेंट्स की जानकारी हासिल करने में मदद करता है।</p><p>इस सुविधा को उन लोगों के लिए काफी उपयोगी बताया जा रहा है जो इमरजेंसी में जल्दी से सही ब्लड बैंक तक पहुंचना चाहते है। लेकिन उपलब्धता देखने के बाद भी अस्पताल या ब्लड बैंक से फोन पर स्टॉक की पुष्टि करना जरूरी है।</p><h3>क्या है e-RaktKosh पोर्टल?</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/maharashtra/nashik/e-raktkosh-mandatory-registration-blood-banks-india-transparency-1666589.html">e-RaktKosh</a> के बारे में बताए तो यह एक केंद्रीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो देशभर के ब्लड बैंकों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने का काम करता है। इसके जरिए यूजर्स अलग-अलग जगहों पर उपलब्ध ब्लड, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स समेत अन्य कंपोनेंट्स की जानकारी तलाश कर सकते है। वहीं इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा है कि आपको एक-एक ब्लड बैंक में जाकर या कई जगह फोन करके उपलब्धता पूछने में समय बर्बाद नहीं करना पड़ता। आप एक ही प्लेटफॉर्म पर जरूरत के हिसाब से जानकारी देख सकते है।</p><h3>घर बैठे ऐसे चेक करें Blood Stock</h3><p>e-RaktKosh पर ब्लड की जानकारी देखना काफी आसान है। इसके लिए सबसे पहले पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट खोलें। इसके बाद होमपेज पर मौजूद Blood Availability Search विकल्प चुनें। वहीं अब आपको अपनी जरूरत के मुताबिक राज्य, जिला, ब्लड ग्रुप और ब्लड कंपोनेंट जैसी जानकारी दर्ज करनी होगी। सारी डिटेल भरने के बाद Search पर क्लिक करें। इसके बाद स्क्रीन पर संबंधित इलाके के ब्लड बैंकों की सूची दिखाई दे सकती है। यहां उपलब्ध स्टॉक से जुड़ी जानकारी देखकर आप अपनी जरूरत के हिसाब से नजदीकी विकल्प तलाश सकते हैं।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/technology/meta-decision-for-children-using-instagram-and-facebook-inactive-from-12-am-to-6-am-srs13">Instagram-Facebook चलाने वाले बच्चों के लिए Meta का बड़ा फैसला, रात 12 से सुबह 6 बजे तक ऐप रहेगा बंद</a></aside><h3>स्टॉक दिखे तो पहले फोन पर करें कंफर्म</h3><p>जानकारी मिलने के बाद कहा जाता है कि कॉल कर के बात जरूर करें क्योंकि अस्पतालों में ब्लड की मांग लगातार बदलती रहती है। इसलिए पोर्टल पर स्टॉक उपलब्ध दिखाई देने के बावजूद <a href="https://navbharatlive.com/technology/no-more-rushing-to-the-blood-bank-check-blood-stock-on-your-mobile-a-new-life-saving-method-1639782.html">ब्लड बैंक</a> या अस्पताल को फोन करके उपलब्धता की पुष्टि कर लेना बेहतर रहता है। ऐसे में अगर जरूरत का ब्लड उपलब्ध है तो बिना अनावश्यक देरी किए संबंधित ब्लड बैंक या अस्पताल से संपर्क करें। साथ ही ब्लड लेने के लिए जरूरी प्रक्रिया, डॉक्यूमेंट और अस्पताल की जरूरतों की जानकारी पहले ही पूछ लें।</p><p>पहले जानकारी लेने से इमरजेंसी के समय सही जानकारी और कुछ मिनटों की बचत हो सकती है। इसलिए e-RaktKosh जैसी सरकारी डिजिटल सुविधा के बारे में पहले से पता होना आपके और आपके परिवार के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Blue Turmeric Benefits: पीली हल्दी से अलग है नीली हल्दी, जानें इस दुर्लभ जड़ के 5 संभावित फायदे</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/blue-turmeric-benefits-curcuma-caesia-black-turmeric-health-uses</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/blue-turmeric-benefits-curcuma-caesia-black-turmeric-health-uses#comments</comments><guid isPermaLink="false">0321f4e4-6571-4295-92bb-6d90a14ad0aa</guid><pubDate>Fri, 28 Aug 2026 10:31:12 +0530</pubDate><atom:updated>2026-08-28T10:31:12.282+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Lifestyle News,Health News</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-28/8b3ew9zw/Blue-turmeric-Benefits.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ नीली हल्दी]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Blue turmeric benefits curcuma caesia black turmeric health uses]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-28/8b3ew9zw/Blue-turmeric-Benefits.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Blue Turmeric Health Benefits:</strong> हल्दी भारतीय रसोई का ऐसा मसाला है, जिसका इस्तेमाल सदियों से खाने के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में भी किया जाता रहा है। आमतौर पर हम सभी पीली हल्दी यानी Curcuma longa के बारे में जानते हैं, लेकिन हल्दी की एक दुर्लभ प्रजाति ऐसी भी है जिसका रंग अंदर से नीला-काला दिखाई देता है। इसे नीली हल्दी या काली हल्दी कहा जाता है। इसका वानस्पतिक नाम Curcuma caesia है।</p><p>पीली हल्दी के मुकाबले नीली हल्दी की जड़ का रंग भी गहरा नीला या नीला-काला होता है और इसकी खुशबू भी काफी अलग होती है। इसमें कपूर जैसी तेज और हल्की कड़वी सी सुगंध होती है। इस हल्दी का इस्तेमाल रोजाना खाना पकाने के लिए नहीं किया जाता, बल्कि नीली हल्दी का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में किया जाता है।</p><h3>सूजन और जोड़ों की परेशानी में संभावित मदद</h3><p>नीली हल्दी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से शरीर में इंफ्लेमेशन और जोड़ों की समस्या में किया जाता रहा है। हालांकि <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/lakadong-turmeric-benefits-curcumin-mission-golden-spice">पीली हल्दी</a> में मौजूद करक्यूमिन पर कहीं अधिक शोध उपलब्ध हैं, नीली हल्दी में भी कई प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं जिनमें मुख्य रूप से एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं।</p><h3>रोगाणुरोधी गुणों पर हो रही है रिसर्च</h3><p>नीली हल्दी में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिक में प्रयोगशाला अध्ययन के दौरान रोगाणुरोधी गुण पाए गए है। इसी वजह से पारंपरिक उपचारों में हल्दी की विभिन्न प्रजातियों का इस्तेमाल त्वचा की छोटी-मोटी समस्या और घाव के लिए किया जाता रहा है।</p><h3>पाचन से जुड़ी परेशानी में पारंपरिक उपयोग</h3><p>पारंपरिक चिकित्सा में नीली हल्दी का इस्तेमाल गैस, <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/pre-wedding-detox-plan-for-glowing-skin-1826553.html">ब्लोटिंग</a> और पाचन संबंधी असहजता के लिए किया जाता रहा है। इसके सुगंधित यौगिक पाचन तंत्र पर प्रभाव डालते हैं।</p><h3>खांसी-जुकाम और सांस से जुड़ी परेशानी</h3><p>नीली हल्दी का पारंपरिक उपयोग खांसी, कफ और सांस से जुड़ी कुछ परेशानियों में भी किया जाता है। इसका तेज सुगंध और प्राकृतिक तेलों के कारण इसका इस्तेमाल पारंपरिक उपचार में किया जाता रहा है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/menopause-yoga-5-yoga-poses-sheetkari-pranayama-hot-flashes">Menopause Yoga: मेनोपॉज के दौरान शरीर को सपोर्ट करेंगे ये 5 योगासन और शीतकारी प्राणायाम</a></aside><h3>इस्तेमाल से पहले इन बातों का रखें ध्यान</h3><p>खासकर गर्भावस्था, स्तनपान, किसी गंभीर बीमारी या नियमित दवाओं के सेवन की स्थिति में नीली हल्दी का सेवन करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Menopause Yoga: मेनोपॉज के दौरान शरीर को सपोर्ट करेंगे ये 5 योगासन और शीतकारी प्राणायाम</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/menopause-yoga-5-yoga-poses-sheetkari-pranayama-hot-flashes</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/menopause-yoga-5-yoga-poses-sheetkari-pranayama-hot-flashes#comments</comments><guid isPermaLink="false">86723532-f262-418c-badc-5e157ac40c62</guid><pubDate>Thu, 27 Aug 2026 10:42:38 +0530</pubDate><atom:updated>2026-08-27T10:42:38.313+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Yoga Day,Yoga Tips,Health News,Fitness Tips</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-27/qjrnh4a4/Yoga-for-menopause.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ योगा]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Menopause yoga 5 yoga poses sheetkari pranayama hot flashes]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-27/qjrnh4a4/Yoga-for-menopause.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Yoga For Menopause:</strong> मेनोपॉज के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण कई प्रकार की समस्याएं होती है, जो हर महिला के लिए अलग होती है। इस दौरान हॉट फ्लैशेज, नींद की परेशानी, तनाव, थकान और शरीर में जकड़न जैसी परेशानी महसूस हो सकती हैं। ऐसे समय में बहुत कठिन अभ्यास करने के बजाय हल्के और सहायक योगासन शरीर को आराम देने में मदद करते हैं।</p><p>सेलिब्रिटी योगा इंस्ट्रक्टर अंशुका परवानी मेनोपॉज के दौरान आराम देने वाले आसनों और शीतकारी जैसे ठंडक देने वाले प्राणायाम के नियमित अभ्यास के बारे में बताती है।</p><figure><img alt="Bridge Pose" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-27/p32mqied/Bridge-Pose.jpg" /><figcaption>ब्रिज पोज</figcaption></figure><h3>सपोर्टेड ब्रिज पोज</h3><p>इसे करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं और घुटनों को मोड़कर पैर जमीन पर रखें। कूल्हों को थोड़ा ऊपर उठाकर उनके नीचे योगा ब्लॉक या बोल्स्टर रखें। अब शरीर का भार सहारे पर छोड़ दें और हाथों को शरीर के पास रखें। आराम से सांस लेते हुए कुछ देर इसी स्थिति में रहें। फिर सपोर्ट हटाकर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं।</p><figure><img alt="Reclined Bound Pose" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-27/09f4kfbw/Reclined-Bound-angle-pose.jpg" /><figcaption>रीक्लाइंड बाउंड एंगल पोज</figcaption></figure><h3>रीक्लाइंड बाउंड एंगल पोज</h3><p>इस <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/pelvic-floor-yoga-after-delivery-1826743.html">योगासन</a> को करने के लिए पीठ के बल आराम से लेट जाएं और दोनों पैरों के तलवों को आपस में मिला लें। अब घुटनों को धीरे-धीरे दोनों तरफ खुलने दें। अगर खिंचाव ज्यादा महसूस हो तो दोनों घुटनों के नीचे तकिया रखें। हाथों को पेट या शरीर के दोनों ओर रखकर आंखें बंद करें। धीमी और गहरी सांस लेते हुए कुछ मिनट इसी अवस्था में आराम करें।</p><figure><img alt="Reclined twist" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-27/x7me3qib/reclined-twist.jpg" /><figcaption>रीक्लाइंड ट्विस्ट</figcaption></figure><h3>रीक्लाइंड ट्विस्ट</h3><p>पीठ के बल लेटकर दोनों घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखें। दोनों घुटनों को धीरे-धीरे एक तरफ झुकाएं, जबकि कंधे जमीन पर टिके रहें। सिर को चाहें तो घुटनों की विपरीत दिशा में हल्का घुमा सकते हैं। कुछ गहरी सांस लें और फिर घुटनों को वापस बीच में लाएं।<br>इसी तरह दूसरी तरफ से भी दोहराएं।</p><figure><img alt="Legs Up on the wall" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-27/zk12m68z/legs-up-the-wall.jpg" /><figcaption>लेग्स अप द वॉल</figcaption></figure><h3>लेग्स अप द वॉल</h3><p>दीवार के पास पीठ के बल लेट जाएं और कूल्हों को दीवार के करीब रखें। दोनों पैरों को ऊपर उठाकर दीवार पर टिका दें। हाथों को शरीर के दोनों ओर आराम से रखें। आंखें बंद करके धीरे-धीरे सांस लें और शरीर को ढीला छोड़ दें। कुछ मिनट इसी स्थिति में रहकर फिर घुटनों को मोड़ते हुए धीरे से बाहर आएं।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/healthiest-indian-breakfast-5-healthy-protein-rich-breakfast-options">Healthy Indian Breakfast: रोज सुबह खाने के लिए सबसे हेल्दी नाश्ता कौन सा है? जानें एक्सपर्ट की राय</a></aside><figure><blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/reel/DchwJ2UIDLJ/?utm_source=ig_embed&amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; border:0; border-radius:3px; box-shadow:0 0 1px 0 rgba(0,0,0,0.5),0 1px 10px 0 rgba(0,0,0,0.15); margin: 1px; max-width:540px; min-width:326px; padding:0; width:99.375%; width:-webkit-calc(100% - 2px); width:calc(100% - 2px);"><div style="padding:16px;"> <a href="https://www.instagram.com/reel/DchwJ2UIDLJ/?utm_source=ig_embed&amp;utm_campaign=loading" style=" background:#FFFFFF; line-height:0; padding:0 0; text-align:center; text-decoration:none; width:100%;" target="_blank"> <div style=" display: flex; flex-direction: row; align-items: center;"> <div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 40px; margin-right: 14px; width: 40px;"></div> <div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center;"> <div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 100px;"></div> <div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 60px;"></div></div></div><div style="padding: 19% 0;"></div> <div style="display:block; height:50px; margin:0 auto 12px; width:50px;"><svg width="50px" height="50px" viewBox="0 0 60 60" version="1.1" xmlns="https://www.w3.org/2000/svg" xmlns:xlink="https://www.w3.org/1999/xlink"><g stroke="none" stroke-width="1" fill="none" fill-rule="evenodd"><g transform="translate(-511.000000, -20.000000)" fill="#000000"><g><path d="M556.869,30.41 C554.814,30.41 553.148,32.076 553.148,34.131 C553.148,36.186 554.814,37.852 556.869,37.852 C558.924,37.852 560.59,36.186 560.59,34.131 C560.59,32.076 558.924,30.41 556.869,30.41 M541,60.657 C535.114,60.657 530.342,55.887 530.342,50 C530.342,44.114 535.114,39.342 541,39.342 C546.887,39.342 551.658,44.114 551.658,50 C551.658,55.887 546.887,60.657 541,60.657 M541,33.886 C532.1,33.886 524.886,41.1 524.886,50 C524.886,58.899 532.1,66.113 541,66.113 C549.9,66.113 557.115,58.899 557.115,50 C557.115,41.1 549.9,33.886 541,33.886 M565.378,62.101 C565.244,65.022 564.756,66.606 564.346,67.663 C563.803,69.06 563.154,70.057 562.106,71.106 C561.058,72.155 560.06,72.803 558.662,73.347 C557.607,73.757 556.021,74.244 553.102,74.378 C549.944,74.521 548.997,74.552 541,74.552 C533.003,74.552 532.056,74.521 528.898,74.378 C525.979,74.244 524.393,73.757 523.338,73.347 C521.94,72.803 520.942,72.155 519.894,71.106 C518.846,70.057 518.197,69.06 517.654,67.663 C517.244,66.606 516.755,65.022 516.623,62.101 C516.479,58.943 516.448,57.996 516.448,50 C516.448,42.003 516.479,41.056 516.623,37.899 C516.755,34.978 517.244,33.391 517.654,32.338 C518.197,30.938 518.846,29.942 519.894,28.894 C520.942,27.846 521.94,27.196 523.338,26.654 C524.393,26.244 525.979,25.756 528.898,25.623 C532.057,25.479 533.004,25.448 541,25.448 C548.997,25.448 549.943,25.479 553.102,25.623 C556.021,25.756 557.607,26.244 558.662,26.654 C560.06,27.196 561.058,27.846 562.106,28.894 C563.154,29.942 563.803,30.938 564.346,32.338 C564.756,33.391 565.244,34.978 565.378,37.899 C565.522,41.056 565.552,42.003 565.552,50 C565.552,57.996 565.522,58.943 565.378,62.101 M570.82,37.631 C570.674,34.438 570.167,32.258 569.425,30.349 C568.659,28.377 567.633,26.702 565.965,25.035 C564.297,23.368 562.623,22.342 560.652,21.575 C558.743,20.834 556.562,20.326 553.369,20.18 C550.169,20.033 549.148,20 541,20 C532.853,20 531.831,20.033 528.631,20.18 C525.438,20.326 523.257,20.834 521.349,21.575 C519.376,22.342 517.703,23.368 516.035,25.035 C514.368,26.702 513.342,28.377 512.574,30.349 C511.834,32.258 511.326,34.438 511.181,37.631 C511.035,40.831 511,41.851 511,50 C511,58.147 511.035,59.17 511.181,62.369 C511.326,65.562 511.834,67.743 512.574,69.651 C513.342,71.625 514.368,73.296 516.035,74.965 C517.703,76.634 519.376,77.658 521.349,78.425 C523.257,79.167 525.438,79.673 528.631,79.82 C531.831,79.965 532.853,80.001 541,80.001 C549.148,80.001 550.169,79.965 553.369,79.82 C556.562,79.673 558.743,79.167 560.652,78.425 C562.623,77.658 564.297,76.634 565.965,74.965 C567.633,73.296 568.659,71.625 569.425,69.651 C570.167,67.743 570.674,65.562 570.82,62.369 C570.966,59.17 571,58.147 571,50 C571,41.851 570.966,40.831 570.82,37.631"></path></g></g></g></svg></div><div style="padding-top: 8px;"> <div style=" color:#3897f0; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:550; line-height:18px;">View this post on Instagram</div></div><div style="padding: 12.5% 0;"></div> <div style="display: flex; flex-direction: row; margin-bottom: 14px; align-items: center;"><div> <div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(0px) translateY(7px);"></div> <div style="background-color: #F4F4F4; height: 12.5px; transform: rotate(-45deg) translateX(3px) translateY(1px); width: 12.5px; flex-grow: 0; margin-right: 14px; margin-left: 2px;"></div> <div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(9px) translateY(-18px);"></div></div><div style="margin-left: 8px;"> <div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 20px; width: 20px;"></div> <div style=" width: 0; height: 0; border-top: 2px solid transparent; border-left: 6px solid #f4f4f4; border-bottom: 2px solid transparent; transform: translateX(16px) translateY(-4px) rotate(30deg)"></div></div><div style="margin-left: auto;"> <div style=" width: 0px; border-top: 8px solid #F4F4F4; border-right: 8px solid transparent; transform: translateY(16px);"></div> <div style=" background-color: #F4F4F4; flex-grow: 0; height: 12px; width: 16px; transform: translateY(-4px);"></div> <div style=" width: 0; height: 0; border-top: 8px solid #F4F4F4; border-left: 8px solid transparent; transform: translateY(-4px) translateX(8px);"></div></div></div> <div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center; margin-bottom: 24px;"> <div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 224px;"></div> <div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 144px;"></div></div></a><p style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; line-height:17px; margin-bottom:0; margin-top:8px; overflow:hidden; padding:8px 0 7px; text-align:center; text-overflow:ellipsis; white-space:nowrap;"><a href="https://www.instagram.com/reel/DchwJ2UIDLJ/?utm_source=ig_embed&amp;utm_campaign=loading" style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:normal; line-height:17px; text-decoration:none;" target="_blank">A post shared by Anshuka Parwani (@anshukayoga)</a></p></div></blockquote>
<script async src="//www.instagram.com/embed.js"></script></figure><figure><img alt="Sheetkari Pranayam" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-27/sejruxfk/Sheetkari-Pranayam.jpg" /><figcaption>शीतकारी प्रणायाम</figcaption></figure><h3>शीतकारी प्राणायाम</h3><p>शीतकारी <a href="https://navbharatlive.com/photos/benefits-of-pranayama-for-health-1860199.html">प्रणायाम</a> को करने के लिए आराम से बैठ जाएं और रीढ़ को सीधा रखें। दांतों को हल्का-सा पास रखते हुए होंठों को खोलें। दांतों के बीच से धीरे-धीरे सांस अंदर लें, फिर मुंह बंद करके नाक से सांस बाहर छोड़ें। कुछ चक्र आराम से करें और चक्कर या असहजता महसूस होने पर तुरंत रुक जाएं।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Healthy Indian Breakfast: रोज सुबह खाने के लिए सबसे हेल्दी नाश्ता कौन सा है? जानें एक्सपर्ट की राय</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/healthiest-indian-breakfast-5-healthy-protein-rich-breakfast-options</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/healthiest-indian-breakfast-5-healthy-protein-rich-breakfast-options#comments</comments><guid isPermaLink="false">3fb46dae-b0bc-4fb2-bf83-ed8dd5b7df92</guid><pubDate>Tue, 25 Aug 2026 14:19:43 +0530</pubDate><atom:updated>2026-08-25T14:19:43.167+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health Tips,Health News,Protein</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-25/5h8kav7o/healthy-Indian-breakfast.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ हेल्दी ब्रेकफास्ट]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Healthiest indian breakfast 5 healthy protein rich breakfast options]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-25/5h8kav7o/healthy-Indian-breakfast.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Best Indian Breakfast:</strong> सुबह का नाश्ता ऐसा होना चाहिए, जो पेट भरने के साथ शरीर को प्रोटीन, फाइबर, अच्छे कार्बोहाइड्रेट और जरूरी पोषक तत्व दे। सिर्फ स्वाद या कैलोरी कम होना किसी नाश्ते को हेल्दी नहीं बनाता। विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित नाश्ता वह है, जिसमें अनाज के साथ प्रोटीन, सब्जियां, फल और थोड़ी मात्रा में हेल्दी फैट शामिल हो।</p><h3>रोज खाने के लिए सबसे हेल्दी भारतीय नाश्ता कौन सा है?</h3><p>अगर एक विकल्प चुनना हो, तो इडली-सांभर सबसे संतुलित भारतीय नाश्तों में से एक माना जा सकता है। इडली, चावल और उड़द दाल के फर्मेंटेड घोल से बनाई जाती है, जबकि सांभर दाल और सब्जियों से तैयार होता है। इस तरह एक ही प्लेट में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर और कई विटामिन-मिनरल मिल जाते हैं।</p><p>फर्मेंटेड होने के कारण इडली को पचाना आसान होता है। सांभर में दाल और सब्जियां जोड़ने से नाश्ता और ज्यादा पौष्टिक हो जाता है।</p><h3>बेसन चीला भी है शानदार विकल्प</h3><p>बेसन प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत है। इसमें प्याज, टमाटर, पालक, गाजर जैसी सब्जियां मिलाकर चीला बनाया जा सकता है। इसे दही या पनीर के साथ खाने से नाश्ते में प्रोटीन की मात्रा को बढ़ाया जा सकता है।</p><p><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/importance-of-protein-in-morning-breakfast-health-tips-and-benefits-1657241.html">बेसन चीला</a> में पनीर ऐड करने से यह ज्यादा प्रोटीन वाला नाश्ता बन जाता है। इसके एक सर्विंग में लगभग 15-18 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है, हालांकि वास्तविक मात्रा रेसिपी और मात्रा पर निर्भर करती है।</p><h3>मूंग दाल चीला: हल्का भी, प्रोटीन से भरपूर भी</h3><p>मूंग दाल से बना चीला रोज के नाश्ते के लिए एक और अच्छा विकल्प है। इसमें प्याज, टमाटर, हरी मिर्च और धनिया जैसी सब्जियां मिलाई जा सकती हैं। इसे दही या पनीर के साथ खाने से भोजन ज्यादा संतुलित हो जाता है।</p><figure><img alt="Chilla For Breakfast
" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-25/6zvf55h6/Chilla-for-Breakfast.jpg" /><figcaption>मूंग दाल चीला</figcaption></figure><h3>पोहा खा रहे हैं, तो इसे ऐसे बनाएं</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/travel/indore-chhappan-dukan-food-guide-best-street-food-shops-56-dukan-1686030.html">पोहा </a>एक हेल्दी ब्रेकफास्ट ऑप्शन है, इसके लिए इसे सिर्फ चावल के पोहे और आलू तक सीमित रखने के बजाय मूंगफली, मटर, सब्जियां और अंकुरित दालें मिलाकर ज्यादा पौष्टिक बनाया जा सकता है। इससे फाइबर और प्रोटीन दोनों बढ़ेंगे।</p><h3>उपमा को भी बना सकते हैं ज्यादा हेल्दी</h3><p>उपमा में सूजी के साथ ढेर सारी सब्जियां, मटर और मूंगफली शामिल करें। अगर आप प्रोटीन बढ़ाना चाहते हैं, तो इसके साथ दही या अंकुरित दाल की छोटी कटोरी ले सकते हैं।</p><h3>नाश्ते में प्रोटीन क्यों जरूरी है?</h3><p>सुबह के भोजन में पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर शामिल करने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है और भोजन के बाद ब्लड शुगर में तेज उतार-चढ़ाव को कम करने में मदद मिलती है। प्रोटीन मांसपेशियों को बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है।</p><figure><img alt="Upma" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-25/ks0okljn/Upma.jpg" /><figcaption>उपमा</figcaption></figure><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/vitamin-b12-rich-fruits-sources-foods-deficiency">Vitamin B12: क्या फलों से पूरी हो सकती है इस विटामिन की कमी? जानें असली B12 के सोर्सेज</a></aside><h3>रोज के नाश्ते में किन गलतियों से बचें?</h3><ul><li><p>सिर्फ चाय-बिस्कुट: इससे पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर नहीं मिलते।</p></li><li><p>बहुत ज्यादा तला हुआ खाना: पूरी, कचौरी या पकौड़े कभी-कभार ठीक हैं, लेकिन रोज का नाश्ता बनाने से कैलोरी और वसा काफी बढ़ सकती है।</p></li><li><p>मीठे पेय: नाश्ते के साथ मीठी चाय, पैकेज्ड जूस या मीठे पेय लेने से अतिरिक्त चीनी बढ़ सकती है।</p></li><li><p>सिर्फ कार्बोहाइड्रेट: ब्रेड, पोहा या इडली को अकेले खाने के बजाय दाल, दही, पनीर, अंडा या अन्य प्रोटीन स्रोत जोड़ें। &nbsp;</p></li></ul>]]></content:encoded></item><item><title>Vitamin B12: क्या फलों से पूरी हो सकती है इस विटामिन की कमी? जानें असली B12 के सोर्सेज</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/vitamin-b12-rich-fruits-sources-foods-deficiency</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/vitamin-b12-rich-fruits-sources-foods-deficiency#comments</comments><guid isPermaLink="false">1ff9763d-661f-4712-9887-482f0d298c2f</guid><pubDate>Tue, 25 Aug 2026 12:11:39 +0530</pubDate><atom:updated>2026-08-25T12:11:39.405+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health Tips,Health News</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-25/6ts9q7bj/Vitamin-B12.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ विटामिन बी 12]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Vitamin b12 rich fruits sources foods deficiency]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-25/6ts9q7bj/Vitamin-B12.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Health Benefits Of Vitamin B12:</strong> विटामिन B12 शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, तंत्रिका तंत्र के सामान्य कामकाज और डीएनए बनाने के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है। लेकिन अगर आप B12 की कमी पूरी करने के लिए फलों पर निर्भर रहना चाहते हैं, तो एक जरूरी बात जानना बेहद जरूरी है- आम तौर पर फलों में प्राकृतिक रूप से विटामिन B12 नहीं पाया जाता है।</p><h3>क्या किसी फल में विटामिन B12 होता है?</h3><p>इस सवाल का सीधा जवाब है प्राकृतिक रूप से कोई भी सामान्य फल विटामिन B12 का अच्छा स्रोत नहीं है। केला, स्ट्रॉबेरी जैसे फलों में भी B12 की मात्रा नगण्य या शून्य के बराबर होती है। NIH के आंकड़ों में एक मध्यम केले और आधा कप स्ट्रॉबेरी में B12 की मात्रा 0.0 माइक्रोग्राम बताई गई है। इसलिए सोशल मीडिया पर बताए जाने वाले कुछ फलों को B12 का समृद्ध स्रोत मानना सही नहीं है।</p><h3>फिर फलों में B12 होने की बात क्यों सुनने को मिलती है?</h3><p>कुछ खाद्य पदार्थों में B12 की मात्रा फोर्टिफिकेशन यानी बाहर से विटामिन मिलाने के कारण हो सकती है। इसलिए अगर किसी फल से बने ड्रिंक, जूस या दूसरे पैक्ड खाद्य पदार्थ पर B12 लिखा हुआ पाए, तो उसका लेबल जरूर देखें। पौधों से मिलने वाले सामान्य खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक B12 नहीं होता, जब तक उन्हें B12 से फोर्टिफाइड न किया गया हो।</p><h3>शाकाहारी लोग B12 के लिए क्या खाएं?</h3><p>अगर आप शाकाहारी हैं, तो दूध, दही और पनीर जैसे डेयरी प्रोडक्ट में B12 के स्रोत होते हैं। NIH के अनुसार एक कप दूध में लगभग 1.3 माइक्रोग्राम और छह औंस सादे दही में करीब 1 माइक्रोग्राम B12 हो सकता है। अंडे में भी <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/vitamin-b12-deficiency-symptoms-causes-treatment-1834934.html">विटामिन B12</a> पाया जाता है। वहीं, पूरी तरह शाकाहारी या वीगन आहार लेने वालों के लिए B12 से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ और डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट उपयोगी विकल्प हो सकते हैं।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/protein-breakfast-for-women-25-30g-protein-morning-meal">Protein Breakfast: सुबह उठते ही खाना जरूरी नहीं, लेकिन नाश्ते में प्रोटीन की मात्रा बदल सकती है आपका पूरा दिन</a></aside><h3>रोज कितने B12 की जरूरत होती है?</h3><p>वयस्कों के लिए विटामिन B12 की रोजाना की मात्रा 2.4 माइक्रोग्राम है। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान जरूरत थोड़ी अधिक होती है। फल आपकी <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/high-protein-diet-creates-risk-of-cancer-and-heart-disease-1726014.html">डाइट में फाइबर</a>, विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट जोड़ सकते हैं, लेकिन B12 की जरूरत पूरी करने के लिए दूसरे फूड सोर्स पर ध्यान देना जरूरी है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>जहरीला धतूरा बेच रहे थे अमेजन, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट, FSDA ने सस्पेंड किया फूड लाइसेंस, हड़कंप</title><link>https://navbharatlive.com/india/amazon-swiggy-instamart-bigbasket-food-license-suspended-datura-seeds-online-sale-karnataka</link><comments>https://navbharatlive.com/india/amazon-swiggy-instamart-bigbasket-food-license-suspended-datura-seeds-online-sale-karnataka#comments</comments><guid isPermaLink="false">6a090218-f660-4445-8fe1-b030a12bdda0</guid><pubDate>Tue, 25 Aug 2026 10:47:45 +0530</pubDate><atom:updated>2026-08-25T10:47:45.227+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>अक्षय साहू</atom:name><atom:uri>/api/author/2547990</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Karnataka,Amazon,Swiggy Instamart,Food Safety</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-25/pic5kle3/FSDA-Action-on-Datura-Seeds-Online-Sale.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ धतूरे के फल और बीजों की ऑनलाइन बिक्री पर FSDA की कार्रवाई]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ FSDA Action on Datura Seeds Online Sale]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-25/pic5kle3/FSDA-Action-on-Datura-Seeds-Online-Sale.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>देश</category><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Karnataka FDA Suspends Amazon, Swiggy Instamart And BigBasket Food Licence: </strong>कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने देश के तीन बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के फूड लाइसेंस को निलंबित कर दिया है। विभाग ने यह फैसला इन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म द्वारा जहरीले धतूरे के फल और बीजों को ऑनलाइन बेचने की शिकायत के बाद लिया है। इन तीनों प्लेटफॉर्म के फूड लाइसेंस को अगले आदेश तक के लिए&nbsp; निलंबित करने का निर्देश दिए हैं।&nbsp;</p><p>जानकारी के मुताबिक, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को धतूरे के फल और बीज इंसानी इस्तेमाल के लिए ऑनलाइन बेचे जाने की शिकायत मिली थी। विभाग ने मामले की जांच में पाया कि अमेजन, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट पर लगे आरोप सही हैं। इसके बाद विभाग ने तीनों प्लेटफॉर्म के खिलाफ यह कार्रवाई की है।&nbsp;</p><p><strong>ऑनलाइन बेचा जा रहा था फल और बीजों</strong></p><p>खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हमें शिकायत मिली थी कि कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धतूरे के फल और बीजों की बिक्री की जा रही है। शिकायत मिलने पर हमने तुरंत मामले की जांच की जिसमें शिकायत को सही पाया गया। अधिकारी ने बताया कि इनमें से कुछ पैकेटों पर FSSAI लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नंबर भी दर्ज थे।</p><p>धतूरा जहरीला होता है और इसके सेवन से लोगों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इसे एक गंभीर मामला मानते हुए इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के फूड लाइसेंस को अगले आदेश तक के लिए निलंबित कर दिया है। इसके अलावा प्लेटफॉर्म को धतूरे से जुड़े प्रोडक्ट की सप्लाई करने वाले वेंडरों और कंपनियों के लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है।&nbsp;</p><h3><strong>विज्ञापनों को तत्काल हटाने का निर्देश</strong></h3><p>इसके साथ ही विभाग ने <a href="https://navbharatlive.com/maharashtra/thane/amazon-bhiwandi-warehouse-expired-food-fda-raid-fir-thane-1822307.html">अमेजन</a>, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट को निर्देश दिया है कि वे अपने प्लेटफॉर्म से इंसानी इस्तेमाल के लिए धतूरे की बिक्री से जुड़ी सभी ऑनलाइन लिस्टिंग और विज्ञापनों को तुरंत हटाएं। इसके अलावा इसे&nbsp; खाद्य पदार्थ के रूप में बेचने, वितरित करने और प्रदर्शित करने पर भी रोक लगाने को कहा गया है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/business/indian-government-will-take-strict-action-on-misleading-e-commerce-companies-1080771.html">भटकाने वाले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सख्त होगी भारत सरकार, जल्द शुरू होगा जागो ग्राहक जागो ऐप</a></aside><p>जानकारी के मुताबिक, <a href="https://navbharatlive.com/business/swiggy-instamart-new-ceo-nandita-sinha-replaces-amitesh-kumar-jha-1893409.html">स्विगी इंस्टामार्ट</a> ने विभाग से जरूरी डॉक्यूमेंट्स जमा करने के लिए और समय मांगा। जबकि बिगबास्केट ने धतूरा प्रोडक्ट्स की बिक्री रोक लगा दी है। कंपनी ने विभाग को जानकारी दी है कि वह भविष्य में होने वाली किसी भी लिस्टिंग पर स्पष्ट रूप से ‘NOT FOR HUMAN CONSUMPTION’ यानी ‘मानव उपभोग के लिए नहीं’ लिखा जाएगा। वहीं अमेजन की ओर से मामले को अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।&nbsp;</p>]]></content:encoded></item><item><title>Period Health: जानें मेंस्ट्रुअल साइकिल के 4 स्टेजेज और हर चरण में शरीर में होने वाले बदलाव के बारे में </title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/menstrual-health-menstrual-cycle-phases-period-hygiene-tips</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/menstrual-health-menstrual-cycle-phases-period-hygiene-tips#comments</comments><guid isPermaLink="false">e02c69bd-c782-4170-b7c7-701ffdffd27c</guid><pubDate>Mon, 24 Aug 2026 08:47:14 +0530</pubDate><atom:updated>2026-08-24T08:47:14.072+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health Tips,Health News,Women Health,period</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-24/fth69kuf/stages-of-Menstrual-cycle.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ पीरियड्स हेल्थ]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Menstrual health menstrual cycle phases period hygiene tips]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-24/fth69kuf/stages-of-Menstrual-cycle.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Menstrual Health Tips:</strong> पीरियड्स महिलाओं के शरीर में होने वाली एक नेचुरल प्रक्रिया है, जिसमें एक महिला का शरीर हर महीने गर्भावस्था के लिए तैयारी होता है। यह चक्र पीरियड्स के पहले दिन से शुरू होकर अगले पीरियड्स से एक दिन पहले तक चलता है। आमतौर पर इसे 28 दिनों का चक्र माना जाता है, लेकिन हर महिला का साइकल अलग हो सकता है और इसकी अवधि हर माह बदल भी सकती है।</p><p>मासिक धर्म चक्र को मुख्य रूप से चार अवस्थाओं में बांटा जाता है- मासिक धर्म, फॉलिक्युलर स्टेज, ओव्यूलेशन स्टेज और ल्यूटियल स्टेज। इन सभी स्टेजेज में शरीर के हार्मोन और रीप्रोडक्शन सिस्टम में अलग-अलग बदलाव होते हैं।</p><h3>जब पीरियड्स शुरू होता है</h3><p>मासिक धर्म का पहला स्टेज पीरियड्स शुरु होने का पहला दिन होता है। अगर पिछले चक्र में गर्भधारण नहीं हुआ है, तो एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। इसके कारण गर्भाशय की अंदरूनी लेयर, जिसे एंडोमेट्रियम कहते हैं, टूटने लगता है और यही बल्ड के जरिए बाहर निकलता है। इस दौरान पेट में दर्द या ऐंठन, कमर दर्द, थकान, सिरदर्द, मूड स्विंग और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।</p><figure><img alt="Periods Cycle" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-24/x8ki4r6b/Periods-Cycle.jpg" /><figcaption>पीरियड साइकिल</figcaption></figure><h3>फॉलिक्युलर स्टेज</h3><p>यह चरण भी पीरियड्स के पहले दिन से शुरू होता है और ओव्यूलेशन तक चलता है। इस दौरान ब्रेन से फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन यानी FSH निकलता है, जो अंडाशय में मौजूद छोटे-छोटे फॉलिकल्स के विकास को बढ़ावा देता है। इनमें से आमतौर पर एक फॉलिकल मुख्य होता है, जो अंडे का मेच्योर करने में मदद करता है। इस दौरान एस्ट्रोजन लेवल बढ़ता है, जिससे गर्भाशय की अंदरूनी परत दोबारा मोटी होने लगती है ताकि महिला का शरीर प्रेगनेंसी के लिए तैयार हो सके।</p><h3>ओव्यूलेशन स्टेज</h3><p>ओव्यूलेशन वह अवस्था है, जब अंडाशय से एक मेच्योर अंडा बाहर निकलता है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) में अचानक हुई बढ़ोतरी के कारण होती है। 28 दिनों के साइकल में <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/pcod-pcos-pmos-difference-in-women">ओव्यूलेशन </a>अक्सर बीच के दिनों में होता है, लेकिन इसका सही समय हर महिला में अलग हो सकता है।</p><p>ओव्यूलेशन के आसपास गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक होती है। कुछ महिलाओं को इस समय पारदर्शी और खिंचाव वाला डिस्चार्ज, पेट के एक तरफ हल्का दर्द या यौन इच्छा में बदलाव महसूस हो सकता है।</p><figure><img alt="Periods Health" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-24/2bl1ec0g/periods-health.jpg" /><figcaption>पीरियडस के स्टेजेज</figcaption></figure><h3>ल्यूटियल स्टेज</h3><p>ओव्यूलेशन के बाद खाली हुआ फॉलिकल कॉर्पस ल्यूटियम में बदल जाता है। यह मुख्य रूप से प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बनाता है, जो गर्भाशय की अंदरूनी परत को संभावित गर्भावस्था के लिए तैयार करने में मदद करता है। अगर अंडे का फर्टिलाइजेशन होकर गर्भावस्था शुरू हो जाती है, तो शरीर यूटेरस की लेयर को बनाए रखता है। वहीं, गर्भधारण नहीं होने पर कॉर्पस ल्यूटियम धीरे-धीरे खत्म हो जाता है और एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिरने लगता है। इसके बाद गर्भाशय की परत टूटकर बाहर निकलती है और अगला <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/dehydration-in-periods-led-to-periods-cramps-and-pain-know-your-periods-health-1796663.html">पीरियड</a> शुरू हो जाता है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/working-mothers-anxiety-after-maternity-leave-return-to-work">Working Mom Anxiety: मैटरनिटी लीव के बाद काम पर लौटते ही क्यों बढ़ती है एंग्जाइटी? जानिए वजह और उपाय
</a></aside><h3>चारों चरणों को इस प्रकार से समझें</h3><p>मासिक धर्म → फॉलिक्युलर चरण → ओव्यूलेशन → ल्यूटियल चरण → फिर मासिक धर्म</p><p>यानी मासिक धर्म चक्र एक लगातार चलने वाली नेचुरल प्रक्रिया है, जिसमें हार्मोन, ओवरीज और यूटेरस मिलकर संभावित गर्भावस्था की तैयारी करते हैं। अगर पीरियड्स लगातार बहुत अनियमित हों, अत्यधिक ब्लड डिस्चार्ज हो, बहुत तेज दर्द हो या मेंस्ट्रुअल साइकल में अचानक बड़ा बदलाव आए, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Explainer: क्या है पोस्टपार्टम साइकोसिस? एक मां को अपने ही बच्चों को मारने पर कर सकता है मजबूर</title><link>https://navbharatlive.com/world/postpartum-psychosis-lindsay-clancy-case-symptoms-legal-trial-mental-health-explained</link><comments>https://navbharatlive.com/world/postpartum-psychosis-lindsay-clancy-case-symptoms-legal-trial-mental-health-explained#comments</comments><guid isPermaLink="false">4a897c7c-a7c0-4c79-a82e-eb1babe6683d</guid><pubDate>Sun, 23 Aug 2026 09:44:30 +0530</pubDate><atom:updated>2026-08-23T09:44:30.189+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>अक्षय साहू</atom:name><atom:uri>/api/author/2547990</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health News,America,Crime News,Navbharat Explainer</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-23/0bho4ptu/Lindsay-Clancy-Case.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ लिंडसे क्लैंसी]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Lindsay Clancy]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-23/0bho4ptu/Lindsay-Clancy-Case.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>विदेश</category><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Lindsay Clancy Case:</strong> अमेरिका में इन दिनों पोस्टपार्टम साइकोसिस को लेकर एक कानूनी जंग चल रही है। जिसकें केंद्र में है एक 36 वर्षीय मां लिंडसे क्लैंसी, जिसने अपने ही तीन मासूम बच्चों की जान ले ली और अब अदालत में उसके वकील यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि क्लैंसी पोस्टपार्टम साइकोसिस से पीड़ित थी, जो एक दुर्लभ और गंभीर मानसिक बीमारी है जो बच्चे के जन्म के बाद हो सकती है।&nbsp;</p><p>वहीं, सरकारी वकील ने दावा किया है कि, क्लैंसी को पता था कि वह क्या कर रही है और उसने अपने तीन बच्चों को मारने का सोचा-समझा फैसला लिया। इस हाई-प्रोफाइल ट्रायल खत्म हो गया है और बीते शुक्रवार को लिंडसे क्लैंसी के वकील ने अदालत में अपनी दलीलें पेश की। इस केस ने लोगों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, पोस्टपार्टम साइकोसिस क्या है? क्या यह एक महिला की सोच और व्यवहार को इस हद तक प्रभावित कर सकता है कि वह अपने ही बच्चों को नुकसान पहुंचाने लगे? और कैसे पता कर सकते हैं कि महिला पोस्टपार्टम साइकोसिस का शिकार है या नहीं?&nbsp;&nbsp;</p><h3>क्या है लिंडसे क्लैंसी का मामला?&nbsp;</h3><p>लिंडसे क्लैंसी अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य की रहने वाली हैं। साल 2023 में पुलिस ने उन्हें अपने तीन बच्चों की मौत के मामले में गिरफ्तार किया था। उनके बच्चों के नाम कोरा, डॉसन और कैलन थे। उनकी उम्र क्रमशः 5 साल, 3 साल और 8 महीने थी। मामला सामने आने के बाद पूरे अमेरिका में काफी चर्चा हुई। बहुत से लोगों के लिए यह समझना मुश्किल था कि कोई मां अपने बच्चों को नुकसान कैसे पहुंचा सकती है। सोशल मीडिया पर भी क्लैंसी के खिलाफ कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।</p><figure><img alt="Lindsay Clancy case " src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-23/idyhyscr/Lindsay-Clancy.jpg" /><figcaption>अदालत में सुनवाई के दौरान लिंडसे क्लैंसी </figcaption></figure><h3>पोस्टपार्टम साइकोसिस क्या होता है?</h3><p>केस वेस्टर्न यूनिवर्सिटी में फोरेंसिक और रिप्रोडक्टिव साइकेट्रिस्ट सुसान हैटर्स-फ्रीडमैन के मुताबिक, साइकोसिस को आसान भाषा में समझाया जाए, तो यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति का वास्ताविकता से संपर्क कमजोर हो जाता है या टूट जाता है। इस दौरान व्यक्ति को हैलुसिनेशन, डिल्यूज, कई दिनों तक बिल्कुल नींद न आना, गंभीर उदासी और असामान्य व्यवहार जैसी समस्याएं हो सकती हैं।&nbsp;</p><figure><img alt="Lindsay Clancy Case " src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-23/9818pkf5/Postpartum-psychosis.jpg" /><figcaption>गंभीर मानसिक स्थिति है पोस्टपार्टम साइकोसिस </figcaption></figure><p>पोस्टपार्टम साइकोसिस महिलाओं में बच्चे के जन्म के बाद होने वाली एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी है। इसमें महिला को ऐसी चीजें दिखाई या सुनाई दे सकती हैं जो वास्तव में मौजूद ही नहीं हैं। लिंडसे क्लैंसी के वकीलों का दावा है कि उन्होंने अपने बच्चों की हत्या हैलुसिनेशन में की। यानी उन्होंने जब अपने बच्चों को मारा, तब वह यह नहीं पता था कि वो क्या कर रही है।&nbsp;&nbsp;</p><h3>पोस्टपार्टम साइकोसिस के प्रमुख लक्षण</h3><ul><li><p>भ्रम और गलत विश्वास</p></li><li><p>ऐसी आवाजें सुनाई देना जो वास्तव में मौजूद नहीं हैं</p></li><li><p>बहुत ज्यादा चिड़चिड़ापन या मूड में तेज बदलाव</p></li><li><p>अत्यधिक उदासी या असामान्य उत्साह</p></li><li><p>नींद न आना</p></li><li><p>उलझन और कन्फ्यूजन</p></li><li><p>सोचने और वास्तविकता को समझने में परेशानी</p> </li></ul><figure><img alt="Lindsay Clancy Case " src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-23/sz4m02lk/symptoms-of-postpartum-psychosis.jpg" /><figcaption> पोस्टपार्टम साइकोसिस के लक्षण</figcaption></figure><p>पोस्टपार्टम साइकोसिस आमतौर पर बच्चे के जन्म के बाद तेजी से विकसित हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लक्षण हमेशा एक जैसे नहीं रहते। कभी व्यक्ति सामान्य दिखाई दे सकता है और कुछ समय बाद उसकी सोच या व्यवहार में गंभीर बदलाव आ सकता है।</p><h3>पोस्टपार्टम डिप्रेशन से यह कितना अलग है?</h3><p>पोस्टपार्टम साइकोसिस के अलावा महिलाओं में बच्चे के जन्म के बाद <a href="https://navbharatlive.com/ampstories/web-stories/what-is-postpartum-depression-which-affect-women">पोस्टपार्टम डिप्रेशन</a> की बीमारी का भी शिकार हो सकती हैं। पोस्टपार्टम डिप्रेशन और पोस्टपार्टम साइकोसिस एक जैसी बीमारी नहीं है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन को पोस्टपार्टम साइकोसिस के मुकाबले कम गंभीर माना जाता है। इसमें महिलाएं लगातार उदास रह सकती हैं, किसी काम में रुचि कम हो सकती है, थकान महसूस हो सकती है, कम नींद आना या नींद नहीं आना, भूख में बदलाव और ध्यान लगाने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।&nbsp;</p><figure><img alt="Lindsay Clancy Case " src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-23/vpxymkjr/Difference-between-postpartum-psychosis-and-postpartum-depression.jpg" /><figcaption>पोस्टपार्टम साइकोसिस और पोस्टपार्टम डिप्रेशन अलग-अलग मानसिक बीमारी</figcaption></figure><p>पोस्टपार्टम डिप्रेशन की तुलना में पोस्टपार्टम साइकोसिस ज्यादा गंभीर और दुर्लभ बीमरी है। इसमें व्यक्ति का वास्तविकता से संपर्क प्रभावित हो सकता है। उदाहरण के लिए उसे ऐसी आवाजें सुनाई दे सकती हैं जो मौजूद नहीं हैं या उसे ऐसे विश्वास हो सकते हैं जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। इसलिए दोनों स्थितियों को एक जैसा समझना सही नहीं है।</p><h3>क्लैंसी के वकील ने अदालत में क्या कहा?&nbsp;</h3><p>क्लैंसी के वकील ने अदालत में उसकी मानसिक स्थिति को लेकर कई खुलासे किए। उन्होंने बताया कि क्लैंसी के बच्चे के जन्म के बाद उनमें हैलुसिनेशन और भ्रम जैसे लक्षण दिखाई देने लगे थे।</p><p>क्लैंसी के पूर्व पति पैट्रिक ने इस मामले में अदालत में गवाही दी है। पैट्रिक ने कोर्ट को बताया कि इससे पहले भी जब क्लैंसी मां बनी थी, तब बच्चे के जन्म के बाद वह बहुत उदास हो गई थीं। उनके मुताबिक, समय के साथ उनकी मानसिक स्थिति लगातार खराब होती गई और बच्चों की मौत से लगभग एक महीने पहले उनकी परेशानी काफी बढ़ गई थी।&nbsp;</p><h3>विशेषज्ञों की राय अलग?&nbsp;</h3><p>विशेषज्ञों के मुताबिक साइकोसिस से पीड़ित इंसान हमेशा बाहर से असामान्य या पूरी तरह अस्त-व्यस्त दिखाई दे, ऐसा जरूरी नहीं है। कोई व्यक्ति भ्रम या आवाजें सुनने के बाद भी कुछ सामान्य काम कर सकता है। किसी काम की योजना बना सकता है और अपने व्यवहार को व्यवस्थित भी कर सकता है। यही बात इस मामले को कानूनी रूप से जटिल बनाती है।&nbsp;</p><figure><img alt="Lindsay Clancy Case" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-23/vsghvjtq/postpartum-psychosis-.jpg" /><figcaption>लिंडसे क्लैंसी केस में विशेषज्ञों की राय अहम</figcaption></figure><p>विशेषज्ञों का मानना है कि पोस्टपार्टम साइकोसिस का अर्थ यह नहीं है कि महिला अपने बच्चे या किसी और को नुकसान पहुंचाएगी। पोस्टपार्टम साइकोसिस हिंसा का दूसरा नाम नहीं है। अधिकतर मानसिक बीमारी से पीड़ित लोग हिंसक नहीं होते हैं। ऐसे में किसी महिला का पोस्टपार्टम साइकोसिस से ग्रस्त होने का मतलब यह नहीं निकाला जा सकता कि वह अपने बच्चे को नुकसान पहुंचाएगी। हालांकि उसे इस बीमारी के चलते वास्तविकता समझने में इतनी परेशानी हो सकती है। वह ऐसा काम कर सकती है जो वह सामान्य मानसिक स्थिति में कभी नहीं करेगी।&nbsp;</p><h3>अदालत के सामने सबसे बड़ा सवाल क्या है?</h3><p>किसी व्यक्ति को<a href="https://navbharatlive.com/entertainment/parineeti-chopra-postpartum-life-mental-health-meditation-routine-1508851.html"> पोस्टपार्टम साइकोसिस </a>का मेडिकल डायग्नोसिस मिलने से यह साबित नहीं होता कि वह कानूनी रूप से अपराध के लिए जिम्मेदार नहीं है। अदालत के सामने यह सवाल है कि वह यह देखे कि अपराध के समय बीमारी ने व्यक्ति की सोच और निर्णय लेने की क्षमता को किस तरह प्रभावित किया।</p><p>लिंडसे क्लैंसी मामले में भी अदालत के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अपराध के समय वह मानसिक बीमारी या मानसिक कमी के कारण अपने काम की गलतता या उसकी आपराधिक प्रकृति को समझने में सक्षम थी।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/ampstories/web-stories/causes-of-mood-disorders-and-postpartum-depression-after-delivery-and-prevention">डिलीवरी के बाद मूड डिसऑर्डर और पोस्टपार्टम डिप्रेशन के कारण और बचाव!</a></aside><h3>इस मामले में जूरी क्या देखेगी?</h3><p>लिंडसे क्लैंसी के मामले में जूरी को उनकी मानसिक बीमारी से जुड़े सबूतों के साथ-साथ उनके व्यवहार और उस समय किए गए कामों को भी देखना होगा। विशेषज्ञ यह बता सकते हैं कि उनके लक्षण क्या थे और बीमारी उनकी सोच को किस तरह प्रभावित कर सकती थी। लेकिन अंतिम फैसला जूरी को करना है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Fatty Liver में अंडा खाना चाहिए या नहीं? जानिए इस आम सवाल पर रिसर्च क्या कहता है</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/fatty-liver-eggs-can-you-eat-eggs-fatty-liver-diet</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/fatty-liver-eggs-can-you-eat-eggs-fatty-liver-diet#comments</comments><guid isPermaLink="false">7704629a-0f6b-466d-91fa-575da56fa800</guid><pubDate>Sun, 23 Aug 2026 09:36:25 +0530</pubDate><atom:updated>2026-08-23T09:36:25.293+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health Tips,Health News</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-23/6atvpmww/Eggs-in-Fatty-Liver.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ अंडे]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Fatty liver eggs can you eat eggs fatty liver diet]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-23/6atvpmww/Eggs-in-Fatty-Liver.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Eggs And Liver Health:</strong> फैटी लिवर का नाम सुनते ही कई लोगों के मन में सबसे पहला सवाल आता है कि ऐसे में क्या खाएं और किन चीजों के सेवन से बचना चाहिए। अंडे को लेकर लंबे समय से यह धारणा रही है कि इसमें मौजूद कोलेस्ट्रॉल लिवर में फैट बढ़ा सकता है, लेकिन हालिया शोध इस सवाल को थोड़ा अलग तरीके से देखता है।</p><p>अगर आप फैटी लिवर से जूझ रहे हैं और अंडा खाना पसंद करते हैं, तो इसे बिना वजह अपनी डाइट से हटाने से पहले कुछ जरूरी बातें जान लेनी चाहिए।</p><h3>क्या फैटी लिवर में अंडा खा सकते हैं?</h3><p>मौजूदा शोध के अनुसार, अंडा खाने से फैटी लिवर नहीं बढ़ता है। एक अध्ययन में 1,414 लोगों के करीब 6 साल के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं को अंडे के सेवन और नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) से लिवर में फैट बढ़ने के बीच कोई सीधा संबंध नहीं मिला।</p><h3>अंडे में मौजूद कोलीन क्यों है खास?</h3><p>अंडे की बात आते ही दिमाग में कोलेस्ट्रॉल की बात आती है, जब कि अंडे में कोलीन नामक पोषक तत्व भी पाया जाता है, जो शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है। 2024 में हुए एक अध्ययन में ज्यादा कोलीन का सेवन NAFLD के जोखिम को कम करता है, लेकिन इसका एक मात्रा स्त्रोत अंडा मान लेना सही नहीं है।</p><p>इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अंडा फैटी लिवर को ठीक करता है, बल्कि अंडा संतुलित आहार में शामिल किया जाने वाला पोषक भोजन है।</p><h3>कितने अंडे खाना ठीक है?</h3><p>इस सवाल का जवाब उम्र, वजन, शारीरिक गतिविधि, मधुमेह, <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/health-tips-high-cholesterol-diet-breakfast-foods-to-avoid-heart-disease-risk-1869342.html">कोलेस्ट्रॉल </a>और पूरी डाइट जैसे पर निर्भर करता है। अंडा कैसे खा रहे हैं, यह भी जरूरी है। फैटी लिवर में सिर्फ अंडे पर ध्यान देने के बजाय पूरी डाइट देखना ज्यादा जरूरी है। उबला अंडा, पोच्ड अंडा या कम तेल में बना ऑमलेट आम तौर पर ज्यादा बेहतर होता है। इसके मुकाबले बहुत ज्यादा तेल, मक्खन, चीज या प्रोसेस्ड मीट के साथ बनाया गया अंडा आपकी कुल कैलोरी और <a href="https://navbharatlive.com/photos/low-calorie-snacks-for-fat-loss-best-healthy-snacks-weight-loss-1886823.html">सैचुरेटेड फैट</a> का सेवन बढ़ा सकता है यानी अंडा खाना या नहीं खाना के साथ-साथ अंडे को किस तरह और कैसे पूरी डाइट में शामिल किया जा रहा है, यह भी जरूरी है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/prebiotic-foods-for-gut-health-garlic-oats-apples">Prebiotic Foods: आंतों की सेहत सुधारने के लिए खाएं ये 10 प्रीबायोटिक फूड्स, लहसुन और ओट्स भी शामिल </a></aside><h3>फैटी लिवर में सिर्फ अंडे पर फोकस करना सही नहीं</h3><p>फैटी लिवर किसी एक खाद्य पदार्थ को हटाने या किसी एक चीज को अपनी डाइट में शामिल करने से बढ़ता या घटता नहीं है। वजन, शारीरिक गतिविधि, कुल कैलोरी, चीनी और कार्बोहाइड्रेट का सेवन तथा लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है। इसलिए अगर आपकी डाइट में अंडा शामिल है, तो उसे संतुलित भोजन का हिस्सा बनाएं। सब्जियां, दाल, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन के साथ संतुलित आहार पर ध्यान देना ज्यादा कारगर है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>Prebiotic Foods: आंतों की सेहत सुधारने के लिए खाएं ये 10 प्रीबायोटिक फूड्स, लहसुन और ओट्स भी शामिल </title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/prebiotic-foods-for-gut-health-garlic-oats-apples</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/prebiotic-foods-for-gut-health-garlic-oats-apples#comments</comments><guid isPermaLink="false">3d678bc0-bfbb-4ac5-838d-a8aa30e71026</guid><pubDate>Fri, 21 Aug 2026 10:07:23 +0530</pubDate><atom:updated>2026-08-21T10:07:23.921+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Lifestyle News,Health Tips,Health News</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-21/nijz40aa/Healthy-Gut-Food.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ हेल्दी फूड]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Prebiotic foods for gut health garlic oats apples]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-21/nijz40aa/Healthy-Gut-Food.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Prebiotic Foods for Gut Health:</strong> शरीर को स्वस्थ रखने में आंतों की सेहत बेहद जरूरी है। पाचन तंत्र में मौजूद गुड बैक्टीरिया को पोषण देने में प्रीबायोटिक फूड्स मददगार होते हैं। प्रीबायोटिक्स ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जिन्हें हमारी आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया इस्तेमाल करते हैं। खासतौर पर कुछ तरह के फाइबर रिच फूड इस कैटेगरी में आते हैं।</p><p>रोज के भोजन में कई ऐसे खाद्य पदार्थ आसानी से शामिल किए जा सकते हैं, जो प्राकृतिक रूप से प्रीबायोटिक फाइबर से भरपूर होते हैं। यहां जानें ऐसे ही 10 खाद्य पदार्थों के बारे में।</p><h3>लहसुन</h3><p>लहसुन में इन्यूलिन और फ्रुक्टान जैसे प्रीबायोटिक घटक पाए जाते हैं, जो आंतों में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करते हैं।</p><h3>प्याज</h3><p>प्याज में इन्यूलिन और फ्रुक्टो-ओलिगोसैकराइड्स (एफओएस) जैसे फाइबर पाए जाते हैं। इन्हें भोजन में शामिल करना आंतों के माइक्रोबायोम के लिए फायदेमंद होता है।</p><h3>लीक</h3><p>लीक प्याज और लहसुन फैमिली की ही एक सब्जी है और इसमें प्रीबायोटिक फाइबर पाया जाता है। इसे सूप, सब्जी या सलाद में शामिल किया जा सकता है।</p><h3>शतावरी</h3><p>शतावरी यानी एस्पैरेगस इन्यूलिन जैसे <a href="https://navbharatlive.com/photos/healthy-indian-summer-breakfast-to-stay-energetic-and-light-on-stomach-1741810.html">प्रीबायोटिक </a>फाइबर का स्रोत है। यह आहार में फाइबर बढ़ाने का एक अच्छा विकल्प हो सकता है।</p><h3>कच्चा या हल्का हरा केला</h3><p>थोड़े कच्चे केले में रेजिस्टेंट स्टार्च अधिक पाया जाता है, जो प्रीबायोटिक की तरह काम करता है और आंतों के लाभकारी बैक्टीरिया को पोषण देता है।</p><h3>चिकोरी रूट</h3><p>चिकोरी की जड़ इन्यूलिन का समृद्ध स्रोत मानी जाती है। इन्यूलिन आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के लिए प्रीबायोटिक फाइबर का काम करता है।</p><h3>ओट्स</h3><p>ओट्स में बीटा-ग्लूकन नामक <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/high-protein-diet-creates-risk-of-cancer-and-heart-disease-1726014.html">सॉल्यूबल फाइबर</a> पाया जाता है। यह आंतों के लाभकारी बैक्टीरिया को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।</p><h3>सेब</h3><p>सेब में पेक्टिन नामक घुलनशील फाइबर होता है, जिसमें प्रीबायोटिक गुण पाए जाते हैं। छिलके समेत सेब खाने पर फाइबर की मात्रा और बढ़ जाती है।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/women-body-changes-after-35-normal-warning-signs">After 35 Body Changes: महिलाओं के शरीर में 35 के बाद आते हैं ये बदलाव, जानें कौन से सामान्य और कौन से गंभीर</a></aside><h3>जौ</h3><p>जौ बीटा-ग्लूकन और अन्य फाइबर का अच्छा स्रोत है। यह आंतों के माइक्रोबायोम में लाभकारी बैक्टीरिया के लिए पोषण उपलब्ध कराने में मदद करता है।</p><h3>अलसी के बीज</h3><p>अलसी में भरपूर फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो पाचन को बेहतर रखने और आंतों के स्वास्थ्य को सहारा देते हैं। नियमित मात्रा में अलसी का सेवन आंतों में अच्छे बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है।</p>]]></content:encoded></item><item><title>दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हैं ये 2 फल, ब्लड प्रेशर से लेकर कोलेस्ट्रॉल तक पर डाल सकते हैं असर</title><link>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/mango-avocado-blood-pressure-heart-health-benefits</link><comments>https://navbharatlive.com/lifestyle/health/mango-avocado-blood-pressure-heart-health-benefits#comments</comments><guid isPermaLink="false">408849d2-a707-4ea0-9db8-137dfa7effd0</guid><pubDate>Thu, 20 Aug 2026 14:09:52 +0530</pubDate><atom:updated>2026-08-20T14:09:52.748+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>रीता राय सागर</atom:name><atom:uri>/api/author/2548013</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords>Health Tips,Health News</media:keywords><media:content height="720" medium="image" url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-20/p6r0u7dg/Mango-And-Avocado.jpg" width="1280"><media:title type="html"><![CDATA[ आम और एवोकाडो]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Mango avocado blood pressure heart health benefits]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-20/p6r0u7dg/Mango-And-Avocado.jpg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>हेल्थ</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>Heart Healthy Foods:</strong> गर्मियों में आम भारतीय घरों का पसंदीदा फल होता है, जबकि एवोकाडो अब भारतीय खान-पान में भी तेजी से शामिल हो रहा है। आमतौर पर आम को मीठा होने की वजह से लोग वजन या ब्लड शुगर को लेकर सावधानी बरतते है। इसलिए इसे या तो कम खाते हैं या फिर बिल्कुल भी नहीं खाते हैं।</p><h3>आम और एवोकाडो में क्या फर्क है</h3><p>आम और एवोकाडो दोनों में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इनमें पोटैशियम और विटामिन सी शामिल हैं। पोटैशियम रक्त वाहिकाओं के सामान्य कार्य और ब्लड प्रेशर को रेगुलर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दोनों फलों में पौधों से मिलने वाले ऐसे यौगिक भी होते हैं, जो ब्लड वेसेल्स की अंदरूनी लेयर के स्वास्थ्य को मजबूत बनाती है।</p><figure><img alt="Mango Salsa" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-20/a1alpvvw/Mango-Salsa.jpg" /><figcaption>आम </figcaption></figure><p>एवोकाडो में मौजूद मोनोअनसैचुरेटेड फैट भी इसे दूसरे फलों से अलग बनाता है। शोध के अनुसार, अलग-अलग पोषक तत्व मिलकर शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।भारतीय डाइट में आम को कैसे शामिल करें?</p><p>आम को केवल आमरस, शेक या मिठाई के रूप में खाने के बजाय पूरे फल के रूप में खाना बेहतर चॉइस हो सकता है। इसे नाश्ते, दही के साथ या भोजन के बीच फल के तौर पर लिया जाना चाहिए। अगर आप आम खाते हैं, तो उस दिन अपने बाकी भोजन में भी संतुलन रखें। उदाहरण के लिए, आम के साथ अत्यधिक मीठा पेय या मिठाइयों को खाने के बजाय दाल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।</p><h3>एवोकाडो को भारतीय तरीके से कैसे खाएं?</h3><p>एवोकाडो को महंगे विदेशी फल की तरह इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। इसे रोटी या मल्टीग्रेन टोस्ट पर मैश करके, सलाद में डालकर या दही के साथ खाया जा सकता है। आप इसे टमाटर, प्याज, धनिया, नींबू और थोड़े मसालों के साथ मिलाकर भारतीय स्वाद वाली चटनी या स्प्रेड जैसा भी बना सकते हैं।</p><figure><img alt="Avocado" src="https://media.assettype.com/navbharatlive/2026-08-20/7ywy6wbj/Avocado.jpg" /><figcaption>एवोकाडो</figcaption></figure><h3>भारतीय डाइट में आम को कैसे शामिल करें?</h3><p>आम को केवल आमरस, शेक या मिठाई के रूप में खाने के बजाय पूरे फल के रूप में खाना बेहतर चॉइस हो सकता है। इसे नाश्ते, दही के साथ या भोजन के बीच फल के तौर पर लिया जाना चाहिए। अगर आप आम खाते हैं, तो उस दिन अपने बाकी भोजन में भी संतुलन रखें। उदाहरण के लिए, आम के साथ अत्यधिक मीठा पेय या मिठाइयों को खाने के बजाय दाल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।</p><h3>एवोकाडो को भारतीय तरीके से कैसे खाएं?</h3><p><a href="https://navbharatlive.com/ampstories/web-stories/omega-3-rich-foods-for-vegetarians">एवोकाडो</a> को महंगे विदेशी फल की तरह इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। इसे रोटी या मल्टीग्रेन टोस्ट पर मैश करके, सलाद में डालकर या दही के साथ खाया जा सकता है। आप इसे टमाटर, प्याज, धनिया, नींबू और थोड़े मसालों के साथ मिलाकर भारतीय स्वाद वाली चटनी या स्प्रेड जैसा भी बना सकते हैं।</p><aside><a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/soaked-raisin-water-benefits-on-empty-stomach">सुबह खाली पेट पिएं भीगी किशमिश का पानी, इन 4 तरह के लोगों को मिल सकते हैं चौंकाने वाले फायदे</a></aside><h3>ब्लड प्रेशर के लिए पूरी डाइट मायने रखती है</h3><p>अगर <a href="https://navbharatlive.com/lifestyle/health/neha-dhupia-health-tips-sugarcane-juice-for-low-blood-pressure-expert-advice-1832940.html">ब्लड प्रेशर</a> को हेल्दी लेवल पर रखना है, तो किसी एक फल पर निर्भर रहने के बजाय पूरी डाइट और जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है। फल और सब्जियां, पर्याप्त फाइबर, संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और नमक का संतुलित सेवन महत्वपूर्ण हैं।</p><p>आम और एवोकाडो इस संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर, प्रीडायबिटीज या डायबिटीज है, तो अपनी डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह जरूर लें।</p>]]></content:encoded></item></channel></rss>