अंकिता पटेल
सुबह की चाय या कॉफी दिन की शुरुआत का हिस्सा है। लेकिन इससे जुड़े कुछ सवाल ऐसे हैं, जिनका जवाब जानना हर चाय-कॉफी प्रेमी के लिए जरूरी है।
कैफीन दिमाग को ज्यादा सतर्क रखता है। इसलिए देर शाम चाय या कॉफी पीने से कुछ लोगों की नींद प्रभावित हो सकती है।
अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए रोजाना करीब 400 mg कैफीन आम तौर पर सुरक्षित सीमा मानी जाती है। संवेदनशीलता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है।
सुबह चाय-कॉफी पीना हर व्यक्ति के लिए नुकसानदायक नहीं है। लेकिन अगर इससे बेचैनी या पेट की परेशानी हो, तो मात्रा कम करना बेहतर है।
चाय और कॉफी भोजन से मिलने वाले आयरन के अवशोषण को कम कर सकते हैं। आयरन की कमी वालों को खास ध्यान रखना चाहिए।
कैफीन के कारण बार-बार पेशाब आने का हल्का असर जरूर होता है, लेकिन सीमित मात्रा में चाय-कॉफी पीने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती।
ऐसा नहीं है। Decaf में भी थोड़ी कैफीन मौजूद हो सकती है, बस सामान्य कॉफी की तुलना में काफी कम मात्रा में।
कैफीन के कारण बार-बार पेशाब आने का हल्का असर जरूर होता है, लेकिन सीमित मात्रा में चाय-कॉफी पीने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती।
नियमित कैफीन सेवन से शरीर इसकी आदत डाल सकता है। अचानक छोड़ने पर सिरदर्द, थकान या चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। इसलिए सामान्य मात्रा में उपयोंग ठीक है।
आमतौर पर कॉफी में चाय से ज्यादा कैफीन होता है। हालांकि मात्रा कप के आकार, पेय और बनाने के तरीके पर निर्भर करती है।