

WHO Emergency Financial Assistance Nepal: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। इस भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत और बचाव कार्य काफी तेज कर दिए गए हैं। संकट की इस घड़ी में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और पड़ोसी देश भारत ने नेपाल की मदद के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाए हैं। डब्ल्यूएचओ ने बाढ़ प्रभावित लोगों की आपातकालीन चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तत्काल वित्तीय सहायता जारी की है, वहीं भारत की ओर से लगातार मानवीय सहायता सामग्री भेजी जा रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने नेपाल में आई बाढ़ को लेकर अपनी सहायता का दायरा बढ़ा दिया है। इसके तहत संगठन ने तत्काल प्रभाव से 150,000 अमेरिकी डॉलर की आपातकालीन धनराशि जारी की है। इसके अलावा, प्रभावित क्षेत्रों की आवश्यकताओं का लगातार आकलन किया जा रहा है और जमीनी जरूरतों के आधार पर अतिरिक्त वित्तीय सहायता और संसाधन जारी किए जाने की उम्मीद है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि आपदा शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर डब्ल्यूएचओ ने सक्रियता दिखाते हुए आपातकालीन आपूर्ति भेज दी थी। इस सहायता सामग्री में मुख्य रूप से अंतर-एजेंसी आपातकालीन स्वास्थ्य आपूर्ति शामिल है, जो लगभग 10,000 लोगों को 3 महीने तक आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर सकती है। इसके साथ ही, आपदा प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए टेंट, 10,000 मास्क, दस्ताने और हैंड सैनिटाइजर भी भेजे गए हैं।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक के अनुसार, इस समय उनकी सबसे बड़ी और तत्काल प्राथमिकता प्रभावित समुदायों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का समर्थन करना और बाधित हुई स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करना है। इसके अतिरिक्त, डब्ल्यूएचओ नेपाल सरकार के नेतृत्व में जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए सभी साझेदारों के बीच महत्वपूर्ण समन्वय, निगरानी और तकनीकी सहायता प्रदान करने का काम कर रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित लोगों के सामने बहुत बड़ी चुनौतियां हैं, जिसके लिए सभी सहयोगियों का निरंतर समर्थन आवश्यक होगा।
इस भीषण आपदा के समय भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल की मदद के लिए पूरी मजबूती से खड़ा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, नई दिल्ली से काठमांडू के लिए तीसरी विशेष उड़ान रवाना की जा चुकी है। इस विमान में 10 टन से अधिक मानवीय सहायता और राहत सामग्री भेजी गई है। इसके साथ ही, डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की एक विशेष टीम भी नेपाल भेजी गई है ताकि वहां चिकित्सा सहायता को सुदृढ़ किया जा सके।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस राहत अभियान की पुष्टि करते हुए बताया कि काठमांडू भेजी गई 10 टन राहत सामग्री में निम्नलिखित अत्यंत आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं:
पोर्टेबल जनरेटर सेट: प्रभावित इलाकों में बिजली संकट को दूर करने के लिए।
डिग्निटी किट और खाद्य पैकेट: लोगों की बुनियादी आवश्यकताओं और भोजन के लिए।
जल शोधन की गोलियां: स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए।
मेडिकल टीम: इस उड़ान में डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की 11 सदस्यीय टीम सवार है।
रेकी टीम: सुरंग बचाव अभियान के लिए एक विशेष रेकी टीम को भी रवाना किया गया है।
भारतीय विदेश मंत्री ने साफ किया कि भारत नेपाल के चल रहे राहत और बचाव प्रयासों में लगातार अपना सहयोग जारी रखेगा।
बाढ़ की इस भीषण त्रासदी के बीच पश्चिम बंगाल से नेपाल गए पर्यटकों को लेकर भी बड़ी चिंताजनक खबर सामने आ रही है। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल की बाढ़ में पश्चिम बंगाल के 39 पर्यटक लापता हो गए थे। इनमें से फिलहाल केवल दो पर्यटकों के बारे में ही जानकारी मिल पाई है, जबकि शेष 37 पर्यटक अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के प्रयास किए जा रहे हैं।