

Ayushman Bharat Scheme: आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भारत में स्वास्थ्य सेवा के लिए एक महत्वपूर्ण योजना के रूप में कार्य करती है, जो आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक वार्षिक कैशलेस अस्पताल भर्ती कवरेज प्रदान करती है। अपनी आठवीं वर्षगांठ के मौके पर, यह योजना आयुष्मान कार्ड के माध्यम से अब भारत की लगभग 33% आबादी को कवर कर रही है। इसके अंतर्गत 2.03 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 13.25 करोड़ से अधिक सदस्यों को लाभ मिला है, जिससे लोगों के स्वयं के जेब से होने वाले मेडिकल खर्च में भारी कमी आई है।
हॉस्पिटल में भर्ती के बाद देखरेख का यह मॉडल तीन स्तंभो के साथ मिलकर काम करती है-प्राथमिक देखभाल के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर
एकीकृत स्वास्थ्य पहचान पत्र (Health IDs) के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन
देशभर में व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने हेतु भौतिक अवसंरचना के लिए पीएम-अभिम (PM-ABHIM)।
स्वास्थ्य सेवा में पैसा लगाना बड़ी पूंजी के तौर पर देखा जाता है। सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवा के लिए चलाई जा रही इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सबसे कमजोर परिवारों सहित प्रत्येक व्यक्ति को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मिले, जिससे वे एक स्वस्थ और संतोषप्रद जीवन जी सकें। भारत सरकार ने सबकी बेहतर स्वास्थ्य सेवा के लिए आठ वर्ष पूर्व 23 सितंबर, 2018 को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) शुरू की थी। यह दुनिया की सबसे बड़ी पब्लिक हेल्थ सेवा योजनाओं में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में भारत की लगभग 33% आबादी (48.51 करोड़ से अधिक लोग) के पास पहले से ही आयुष्मान कार्ड है।
पब्लिक हेल्थ सेवा के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही आयुष्मान योजना तकनीक के जरिए कैसे लोगों को बेहतर लाभ दे सकती है इसपर सरकार काम कर रही है। इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने न्यूयॉर्क में भारत के वाणिज्य दूतावास में "ग्राउंडिंग द फ्रंटियर: ए ग्लोबल साउथ AI फ्रेमवर्क" पर एक चर्चा के दौरान विस्तार से बताया है। ग्लोबल साउथ के लिए AI और डिजिटल हेल्थ इनोवेशन का इस्तेमाल करने के भारत के अनुभव के बारे में बात की। इस दौरान उन्होंने बताया कि भारत दिखा रहा है कि कैसे मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से बड़े पैमाने पर हेल्थकेयर सर्विस को बदला जा सकता है।
भारत की हेल्थ-टेक यात्रा पर चर्चा करते हुए स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि कैसे आधार के जरिए बनाए गए डिजिटल आधार और बाद में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और ABHA ID के जरिए मजबूत किए गए सिस्टम ने भारत को एक स्केलेबल और इंटरऑपरेबल डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम बनाने में सक्षम बनाया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि AI मॉडल को इनसे सीखना चाहिए ताकि वे ऐसे समाधान दे सकें जो उन लोगों के लिए सार्थक और प्रासंगिक हों।
उन्होंने हेल्थकेयर में AI के बढ़ते इस्तेमाल पर प्रकाश डाला, जिसमें AI-इनेबल क्लिनिकल निर्णय सहायता, लंबे समय के स्वास्थ्य रिकॉर्ड और बीमारी के हॉटस्पॉट की पहचान शामिल है। उन्होंने दिखाया कि कैसे तकनीक इनोवेशन से वास्तविक दुनिया में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर डालने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। श्रीवास्तव ने हेल्थकेयर में AI के जिम्मेदार और असरदार इस्तेमाल के लिए 'AI इन हेल्थकेयर' रणनीति को एक गाइडबुक के तौर पर पेश किया और टेक्नोलॉजी-बेस्ड समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने के भारत के अनुभव पर जोर दिया।
इस चर्चा में इस बात पर गौर किया गया कि कैसे AI 'ग्लोबल साउथ' में हेल्थकेयर और विकास के नतीजों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, जिसमें 'सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स' की दिशा में तेजी से प्रगति करना भी शामिल है। इस सेशन में AI कंपनियों, मल्टीलेटरल संगठनों, अमेरिकी नीति-निर्माताओं, थिंक टैंक और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने ऐसे AI इकोसिस्टम बनाने पर बातचीत की जो समावेशी, ज़िम्मेदार, संदर्भ के अनुकूल और 'ग्लोबल साउथ' की जरूरतों के हिसाब से हों।
आयुष्मान भारत योजना ने 38,000 से अधिक पब्लिक और प्राइवेट अस्पतालों के नेटवर्क के जरिए 31 अगस्त, 2026 तक लगभग 13.25 करोड़ लोगों के 2.03 लाख करोड़ रुपये बचाए हैं। भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करने वाली कई और भी योजनाएं हैं: आयुष्मान आरोग्य मंदिर, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और पीएम-आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन, इनकी मदद से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया गया है। योजना का उद्देश्य परिवारों को भारी-भरकम मेडिकल बिलों के बोझ से बचाना है।