

Screen Time and Gut Health: आजकल पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन इसका कारण केवल खान-पान तक सीमित नहीं रह गया हैं। बार-बार पेट फूलना, गैस, पेट दर्द, कब्ज या दस्त जैसी दिक्कतें कई लोगों की डेली लाइफ का हिस्सा बनती जा रही हैं। खासकर IBS यानी irritable bowel syndrome में पेट और दिमाग के बीच का कनेक्शन अधिक महत्वपूर्ण होता है।
दरअसल, मशहूर न्यूट्रिशनिस्ट ऋजुता दिवेकर ने हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिसमें वह रोजमर्रा की कुछ ऐसी आदतों पर बात करती हैं, जो हमारे पेट की सेहत पर बुरा असर डालता है। बता दें कि ऋजुता दिवेकर जानी-मानी न्यूट्रिशन और वेलनेस एक्सपर्ट हैं और उनके क्लाइंट्स में बॉलीवुड की कई हस्तियां शामिल हैं।
अपनी फिटनेस गाइडलाइंस में खाना खाते समय फोन, टीवी या दूसरे गैजेट्स से दूरी बनाने की सलाह देती हैं। इससे आपके और आपके खाने के बीच एक कनेक्शन बनता है। खाने के समय लगातार स्क्रीन देखने से आपका ध्यान भोजन से हट जाता है। ऐसे में खाना कितनी तेजी से खा रहे हैं, कितना खा चुके हैं और कितनी भूख बची है, जरूरत से ज्यादा खा लेना, जैसी बातों का ध्यान नहीं रहता है। इसलिए शुरुआत में कोशिश करें कि कम से कम एक मील पूरी तरह बिना फोन के खाएं।
सिर्फ फोन चलाना IBS का सीधा कारण नहीं है। IBS एक जटिल समस्या है, जिसमें आंतों की संवेदनशीलता, आंतों की एक्टिविटी, गट माइक्रोबायोम, खान-पान, तनाव और नींद जैसे कई कारक भूमिका निभाते हैं, लेकिन लंबे समय तक स्क्रीन पर रहना आपकी दिनचर्या, नींद, खाने की आदतों और तनाव को प्रभावित कर सकता है।
हम डेंटिस्ट के पास तब जाते हैं, जब दांतों में दर्द हो या कोई बड़ी समस्या हो। बता दें कि हमारे दांत हमारे पाचन में बड़ी भूमिका निभाते हैं। हमारा मुंह शरीर के पाचन तंत्र का शुरुआती हिस्सा है और यहां मौजूद माइक्रोब्स का संबंध आगे के गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल माइक्रोबायोम से होता है।
अगर आपको अक्सर पेट फूलना, गैस, कब्ज, दस्त या पेट दर्द जैसी समस्या रहती है, तो खाने के समय फोन दूर रखें, भोजन धीरे-धीरे और चबाकर खाएं, नींद पूरी करें और स्ट्रेस को कम करें। इसके अलावा दिन में दो बार ब्रश करना और नियमित रूप से ओरल हाइजीन को बनाए रखना जरूरी है।