

Ashwini Vaishnaw On India’s Chip Push: एआई के बढ़ते प्रभाव को लेकर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत को उम्मीद है कि सेमीकंडक्टर निवेश की अगली लहर छह महीने के अंदर शुरू हो जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि सरकार अपने चिप मिशन के पहले दो चरणों में किए गए लगभग 23.5 अरब डॉलर के निवेश को आगे बढ़ाना चाहती है।
उन्होंने कहा कि ISM 2.0 ने फैब्स (fabs), पैकेजिंग, मटीरियल, इक्विपमेंट, डिजाइन और R&D के क्षेत्र में लगभग 12 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया है। वैष्णव ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की सेमीकंडक्टर रणनीति अपने डिजाइन टैलेंट पर निर्भर करेगी, साथ ही फैब्स को खास तरह के प्रोडक्ट्स और एडवांस्ड पैकेजिंग इकोसिस्टम बनाने पर केंद्रित किया जाएगा।
सरकार AI डेवलपर्स, एकेडेमिया और बड़ी टेक कंपनियों के साथ मिलकर एक टेक्नो-लीगल फ्रेमवर्क पर बातचीत कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि कंपनियां खुद ही अपने मॉडल्स में सुरक्षा उपाय शामिल करेंगी। वैष्णव का कहना है कि जब भी दुनिया में कोई क्रांतिकारी तकनीक आई है। चाहे ऑटोमोबाइल हो या न्यूक्लियर इंडस्ट्री, सरकारों और संसदों ने उचित नियम बनाने के लिए दखल दिया है। एआई के लिए भी सिर्फ एक कानून पर्याप्त नहीं होगा। हमें टेक्नो-लीगल फ्रेमवर्क में काम करना होगा।
वैष्णव ने AI एजेंट्स और सोशल मीडिया से जुड़े जोखिमों की ओर भी इशारा किया, जिनमें बच्चों की सुरक्षा और एल्गोरिदम से होने वाली लत शामिल है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सुरक्षा और टेक्नोलॉजी के फायदों के बीच संतुलन बनाना ज़रूरी है।
Emergent अपने AI लक्ष्यों को सिर्फ सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट से आगे बढ़ा रहा है। कंपनी के को-फाउंडर और CEO मुकुंद झा का मानना है कि AI एजेंट आगे चलकर छोटे व्यवसायों के रोज़मर्रा के ज्यादातर कामों को ऑटोमेट कर देंगे।
सरकार का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे अहम है। सरकार की सोच है कि अगली पीढ़ी को टेक्नोलॉजी का फायदा मिले, लेकिन उन्हें इसकी लत, एल्गोरिदम के जरिए युवावों को टारगेट करके मोबाइल फोन या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का आदी बनाने और युवाओं द्वारा देखे जाने वाले कंटेंट से होने वाले नुकसान से बचाने की बात भी कही जा रही है। यह एक ऐसी समस्या है जिससे दुनिया का हर समाज जूझ रहा है।