

Women Menstrual Health: पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग की मात्रा हर महिला में अलग हो सकती है। कुछ महिलाओं को सामान्य से ज्यादा ब्लीडिंग होती है, लेकिन अगर हर महीने माहवारी के दौरान हैवी ब्लीडिंग होती है, जिससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं, तो यह सामान्य बात नहीं हो सकती है।
एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि बहुत ज्यादा या असामान्य ब्लीडिंग के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। जानिए इससे जुड़े कुछ लक्षणों के बारे में।
आमतौर पर पीरियड्स 2 से 7 दिन तक रह सकते हैं। अगर ब्लीडिंग लगातार 7 दिन से ज्यादा चलती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है। जरूरत से ज्यादा ब्लीडिंग शरीर में किसी अन्य समस्या के लक्षण हो सकते हैं।
अगर कई दिनों तक हर घंटे एक या उससे ज्यादा पैड पूरी तरह भीग जाए, तो यह हैवी ब्लीडिंग का संकेत है। ऐसी स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
महिलाओं में पीरियड्स के दौरान अगर ब्लीडिंग इतनी ज्यादा है कि रात में बार-बार उठकर पैड बदलना पड़ रहा है या कपड़े और बेड तक दाग लग जाते हैं, तो यह भी हैवी पीरियड्स के लक्षण हैं।
पीरियड्स में छोटे क्लॉट्स का आना सामान्य हो सकता है, लेकिन बार-बार बड़े ब्लड क्लॉट्स निकलना हैवी ब्लीडिंग के साथ जुड़ा हो सकता है। ऐसे बदलाव पर डॉक्टर से बात करने की जरूरत है।
अगर हैवी ब्लीडिंग के कारण ऑफिस, एक्सरसाइज, बाहर जाना या दूसरे सामान्य काम करने में समस्या आ रही है, तो इसे सामान्य मानकर सहते रहना जरूरी नहीं है। इसका कारण पता करने के लिए डॉक्टरी सलाह ली जानी चाहिए।
लंबे समय तक ज्यादा ब्लीडिंग होने पर महिलाओं में आयरन की कमी और एनीमिया का खतरा हो सकता है। लगातार थकान या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
अगर पीरियड्स खत्म होने के बाद दोबारा ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होने लगे, या सेक्स के बाद ब्लीडिंग हो, तो यह सामान्य पीरियड्स का हिस्सा नहीं है। ऐसी हालत में डॉक्टरी परामर्श लेना जरूरी हो जाता है।
हैवी या असामान्य ब्लीडिंग के कई कारण हो सकते हैं। इनमें हार्मोनल बदलाव, ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्या, फाइब्रॉइड, पॉलिप, एडिनोमायोसिस, एंडोमेट्रियोसिस, कुछ दवाएं और ब्लीडिंग डिसऑर्डर जैसे कारण हो सकते हैं। कुछ महिलाओं में पीसीओएस या थायरॉइड की समस्या भी हैवी ब्लीडिंग का कारण होती है।