Working Mom Anxiety: मैटरनिटी लीव के बाद काम पर लौटते ही क्यों बढ़ती है एंग्जाइटी? जानिए वजह और उपाय

Work Life Balance: मैटरनिटी लीव के बाद काम पर लौटना कई मदर्स के लिए इमोशनल चैलेंज बन जाता है। बच्चे से दूर होने, करियर और घर की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन का दबाव उनके भीतर बेचैनी बढ़ा देता है।
Working mothers' anxiety after maternity leave return to work
वर्किंग मदरफोटो.सोशल मीडिया
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Return To Work After Maternity Leave: मां बनने के बाद जिंदगी में बहुत कुछ बदल जाता है। बच्चे की देखभाल, उसकी नींद, दूध पिलाने से लेकर घर की जिम्मेदारियों तक, महिला की पूरी दिनचर्या एक नए तरीके से चलने लगती है। ऐसे में जब वर्किंग मदर्स की मौटरनिटी लीव खत्म होती है और वो काम पर वापस लौटती हैं, तो खुशी के साथ घबराहट, बेचैनी और अपराध बोध की भावना भी महसूस होती है।

कई महिलाओं के लिए यह सिर्फ ऑफिस लौटने की बात नहीं होती। उन्हें एक साथ मां की भूमिका और प्रोफेशनलिज्म और घर-परिवार के बीच संतुलन बनाना होता है। नौकरी पर लौटने के शुरुआती समय में माताओं में काम और परिवार के बीच संतुलन को लेकर तनाव सबसे ज्यादा होता है, जो समय के साथ कम हो जाता है।

बच्चे से दूर होने का डर बढ़ा सकता है एंग्जाइटी

मां बनने के बाद बच्चे के साथ लगातार रहने की आदत हो जाती है। ऐसे में अचानक कई घंटों के लिए बच्चे से दूर होना भावनात्मक रूप से मुश्किल हो जाता है। नई मांओं के मन में कई प्रकार के सवाल चलते रहते हैं- बच्चा समय पर खाना खाएगा या नहीं? रोने पर कौन संभालेगा? उसे मेरी याद आएगी? उसकी नींद या दिनचर्या ठीक रहेगी?

मैं अच्छी मां हूं या अच्छी एंप्लॉय होने का दबाव

काम पर लौटते ही कुछ महिलाओं को लगता है कि उन्हें ऑफिस में पहले जैसा प्रदर्शन करना है और घर पर भी पहले जैसी जिम्मेदारियां निभानी हैं। यही सोच धीरे-धीरे मानसिक दबाव बढ़ता जाता है। असल समस्या अक्सर काम करने की क्षमता की नहीं, बल्कि एक साथ कई भूमिकाओं को निभाने का प्रेशर होता है।

नींद पूरी न होना भी बढ़ा सकता है बेचैनी

नवजात बच्चे के साथ नींद का पैटर्न बदल जाता है। रात में बार-बार उठना, बच्चे की देखभाल और सुबह जल्दी दिन शुरू करना शरीर और दिमाग दोनों को थका सकता है।

अगर इसी दौरान ऑफिस की समय-सीमा, ट्रैवलिंग और घर के काम भी जुड़ जाएं, तो मानसिक थकान और बढ़ सकती है। डिलीवरी के बाद फिजिकल रिकवरी और मां की मेंटल हेल्थ को भी काम पर लौटने के तनाव से गुजरना पड़ता है।

करियर को लेकर भी होती है चिंता

मैटरनिटी लीव के दौरान ऑफिस में काम करने का तरीका, टीम या जिम्मेदारियां बदल सकती हैं। लंबे गैप के बाद काम पर लौटने पर महिला को लगता है कि वह प्रोफेशनली पीछे रह गई है। कभी-कभी उन्हें नई जिम्मेदारियों के साथ खुद को दोबारा साबित करने का दबाव भी महसूस होता है।

घर और ऑफिस की मेंटल लोड एक साथ

बच्चे को कौन संभालेगा, दूध कब देना है, डॉक्टर की अपॉइंटमेंट कब है, घर का खाना कौन बनाएगा, ऑफिस की बैठक कब है- इन सभी बातों को याद रखना भी मानसिक कसरत है। यही मेंटल लोड कई बार महिला को ऑफिस में मौजूद रहते हुए भी घर की चिंता में उलझाए रखता है।

वर्कप्लेस सपोर्ट से आसान हो सकता है रिटर्न

काम पर लौटने वाली मां के लिए सिर्फ घर का सहयोग ही नहीं, बल्कि ऑफिस का माहौल भी महत्वपूर्ण है। फ्लेकसिबल वर्क आवर, जरूरत पड़ने पर काम के तरीके में बदलाव, सहयोगी मैनेजर और सहकर्मियों का समझदार रवैया वापसी को आसान बना सकता है। कार्यस्थल पर पर्याप्त सहयोग न होने पर नई मां के लिए दोबारा काम में सहज होना अधिक तनावपूर्ण हो सकता है।

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एंगजाइटी कम करने के लिए क्या करें?

काम पर लौटने से पहले पूरी दिनचर्या को एक ही दिन में बदलने की कोशिश न करें। बच्चे की देखभाल के लिए जिस व्यक्ति पर भरोसा करना है, उसके साथ पहले से समय बिताएं। ऑफिस लौटने के शुरुआती दिनों में खुद से यह उम्मीद न रखें कि सब कुछ तुरंत पहले जैसा हो जाएगा। काम की प्राथमिकताएं तय करें और जहां संभव हो, जिम्मेदारियां साझा करें।

अगर बेचैनी, घबराहट, लगातार रोने का मन, नींद की गंभीर समस्या या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने जैसी परेशानी बनी रहती है, तो यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण हो सकते हैं। इसलिए खुद को समय देना जरूरी है। एक साथ हर भूमिका में परफेक्ट होने के बजाय धीरे-धीरे नई दिनचर्या के साथ सहज होने की कोशिश करनी चाहिए।

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