

Ayushman Bharat PM-JAY Scheme: भारत में किसी गंभीर बीमारी का इलाज कराना गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए कभी भी हमेशा आसान नहीं रहा है। अस्पताल का खर्च, ऑपरेशन, दवाइयां और जांच इन सब पर होने वाला खर्च कई बार परिवार की सारी जमा-पूंजी तक खत्म कर देता है। कई बार तो परिवारों को इलाज का खर्च जुटाने के लिए कर्ज लेना या अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ जाती है।
साल 2018 में केंद्र सरकार ने इसी समस्या को देखते हुए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) शुरू की। आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को झारखंड के रांची में हुई थी। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा मुहैया कराना था। आज इस योजना को शुरू हुए आठ साल पूरे हो रहे हैं। आइए इस मौके पर आपको बताते हैं कि मोदी सरकार की यह योजना कितनी सफल रही? अब कितने लोगों को इसका लाभ मिला है? और इसके क्या फायदे हैं?
इस योजना को शुरू करने का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों के अपनी जेब से होने वाले स्वास्थ्य खर्च को कम करना था। गंभीर बीमारी अचानक सामने आने पर परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता इलाज के पैसे जुटाने की होती है। खासकर गरीब परिवारों के लिए यह खर्च उनकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह प्रभावित कर सकता है।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को सेकेंडरी और टर्शियरी स्तर के अस्पताल में भर्ती होने वाले इलाज के लिए हर साल 5 लाख रुपये तक का कवर मिलता है। शुरुआत में इसका लक्ष्य देश की निचली 40 प्रतिशत आबादी में शामिल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देना था।
जब आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई थी, तब करीब 10 करोड़ 74 लाख गरीब और कमजोर परिवारों को इसके दायरे में शामिल किया गया था। बाद में देश की आबादी में हुए बदलाव को देखते हुए लाभार्थियों का दायरा बढ़ाकर करीब 12 करोड़ परिवार कर दिया गया। सरकार के मुताबिक इन परिवारों में देश की निचली 40 प्रतिशत आबादी शामिल थी।
आयुष्मान भारत के पात्र लाभार्थी योजना से जुड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज करा सकते हैं। अस्पताल में भर्ती होने के दौरान इलाज से जुड़े कई खर्च योजना के तहत कवर किए जाते हैं। इनमें इलाज, जरूरी जांच, दवाइयां और अस्पताल से जुड़ी कई दूसरी सेवाएं शामिल हैं।
योजना की एक खास सुविधा इसकी पोर्टेबिलिटी है। यानी अगर कोई पात्र व्यक्ति अपने राज्य से बाहर जाता है, तो वह दूसरे राज्य के योजना से जुड़े सूचीबद्ध अस्पताल में भी कैशलेस इलाज करा सकता है। दूसरे राज्यों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों या इलाज के लिए बाहर जाने वाले लोगों के लिए यह सुविधा काफी महत्वपूर्ण है।
आयुष्मान भारत योजना का दायरा समय के साथ बढ़ता गया। अक्टूबर 2024 में नरेंद्र मोदी सरकार ने 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों को उनकी आय या सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना योजना में शामिल करने को मंजूरी दी।
इस विस्तार के तहत करीब 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों और लगभग 4 करोड़ 50 लाख परिवारों को लाभ मिलने का अनुमान लगाया गया था। 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पात्र बुजुर्गों के लिए अलग आयुष्मान कार्ड जारी करने की व्यवस्था भी की गई।
इससे पहले मार्च 2024 में आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी सहायिकाओं और उनके परिवारों को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया था। इसके बाद करीब 37 लाख अतिरिक्त परिवार स्वास्थ्य कवरेज के दायरे में आए।
सरकार की ओर से उपलब्ध ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून 2026 तक आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 12 करोड़ 69 लाख अस्पताल में भर्ती के मामले अधिकृत किए जा चुके थे। इन उपचारों की कुल राशि करीब 1 लाख 92 हजार करोड़ रुपये थी।
योजना के तहत इलाज उपलब्ध कराने के लिए देशभर में 37 हजार 413 सरकारी और निजी अस्पतालों का नेटवर्क था। इसका मतलब है कि योजना शुरू होने के बाद से करोड़ों अस्पताल उपचारों को इसके जरिए आर्थिक सुरक्षा मिली है।
हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है। 12 करोड़ 69 लाख अस्पताल में भर्ती के मामले और आयुष्मान कार्ड की संख्या एक जैसी नहीं होती। किसी व्यक्ति के नाम पर आयुष्मान कार्ड जारी होना अलग बात है, जबकि उसी कार्ड के जरिए अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराना अलग आंकड़ा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में लोगों की अपनी जेब से होने वाले खर्च के आंकड़े भी इस पूरी तस्वीर का एक अहम हिस्सा हैं। केंद्र सरकार के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान 2022-23 में कुल स्वास्थ्य खर्च में लोगों की जेब से होने वाले खर्च की हिस्सेदारी 2014-15 के 62.6 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 43.4 प्रतिशत रह गई।
सरकार ने इस कमी को स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़े सार्वजनिक निवेश और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित स्वास्थ्य योजनाओं के विस्तार से जोड़ा है। हालांकि, इस गिरावट को केवल आयुष्मान भारत योजना की वजह से हुआ बदलाव मानना सही नहीं होगा। स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को कई सरकारी और अन्य कारक प्रभावित करते हैं।
जुलाई 2026 में सरकार ने बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का कार्यान्वयन सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हो रहा है। इसके अलावा कई राज्यों ने अपनी स्वास्थ्य योजनाओं को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के साथ जोड़ा है। इससे कुछ जगहों पर योजना के लाभार्थियों का दायरा केंद्रीय लक्ष्य से भी आगे बढ़ गया है।
2018 में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के उद्देश्य से शुरू हुई आयुष्मान भारत योजना का दायरा अब काफी बढ़ चुका है। 30 जून 2026 तक योजना के तहत 12 करोड़ 69 लाख अस्पताल में भर्ती मामलों को मंजूरी दी जा चुकी थी और करीब 1 लाख 92 हजार करोड़ रुपये के उपचार अधिकृत हुए थे।