

Body Changes After 35: 35 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव दिखाई देने लगते हैं। नींद का पैटर्न बदलना, पीरियड्स में बदलाव, स्किन में बदलाव, बालों का गिरना और मसल्स लॉस होना जैसे बदलाव अक्सर उम्र बढ़ने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। हालांकि, हर बदलाव को केवल उम्र का असर मान लेना सही नहीं है। कुछ संकेत ऐसे भी हो सकते हैं जिनके लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
35 के बाद शरीर की संरचना और एनर्जी लेवल में धीरे-धीरे बदलाव आ सकता है। शारीरिक गतिविधि कम होने और मांसपेशियों में धीरे-धीरे कमी आने पर वजन को पहले की तरह बनाए रखना मुश्किल होता है। इस दौरान केवल वजन कम करने पर ध्यान देने के बजाय पर्याप्त प्रोटीन, नियमित व्यायाम और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग स्वास्थ्य में पॉजिटिव बदलाव लाने में सहायक होते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ शरीर की ऊर्जा खर्च करने की क्षमता में भी बदलाव होते है। पहले जितना खाना खाने पर वजन स्थिर रहता था, वही मात्रा बाद में अधिक लगती है। इसका मतलब यह नहीं कि 35 के बाद मेटाबॉलिज्म अचानक धीमा हो जाता है। नींद, मसल्स, डेली एक्टिविटी और खाना-पान इन सबमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
35 के बाद मांसपेशियों को बनाए रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि पहले से ज्यादा जरूरी हो जाती है। अगर व्यायाम और पर्याप्त प्रोटीन की मात्रा पर ध्यान न दिया जाए तो समय के साथ मांसपेशियों की ताकत और मात्रा कम हो सकती है। इसलिए महिलाओं के लिए भी स्क्वैट, लंज, पुश, पुल और अन्य स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना जरूरी है।
35 के बाद त्वचा में फाइन लाइंस, ड्राईनेस औऱ पिगमेंटेशन और पहले की तुलना में स्किन की फर्मनेस कम हो जाती है। शरीर में उम्र के साथ होने वाले प्राकृतिक बदलाव और त्वचा में कोलेजिन प्रोडक्शन का धीमा होना, इसका एक कारण हो सकता है। धूप से बचाव, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और रेगुलर स्किन केयर इन सबमें आपकी मदद कर सकते हैं।
बालों की मोटाई, बनावट या बढ़ने की गति में बदलाव महसूस हो सकता है। कुछ महिलाओं के बाल झड़ने के कारण पतले होने लगते हैं, लेकिन अचानक या बहुत ज्यादा बाल झड़ना केवल उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके पीछे आयरन की कमी, थायरॉयड की समस्या, हार्मोनल बदलाव या अन्य कारण हो सकते हैं।
35 के बाद कुछ महिलाओं को नींद आने में परेशानी, रात में बार-बार जागना या सुबह जल्दी उठने जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। स्ट्रेस, वर्कलोड, लाइफस्टाइल और हार्मोनल बदलाव नींद को प्रभावित करते हैं। अगर लंबे समय तक नींद खराब रहती है और इसका असर दिनभर की ऊर्जा या काम करने की क्षमता पर पड़ रहा है, तो विशेषज्ञ से बात करना बेहतर है।
35 के बाद पीरियड्स में बदलाव आना सामान्य बात हैं। पीरियड साइकल में बदलाव, ब्लड फ्लो का कम या ज्यादा होना और इररेगुलर पीरियड जैसी समस्या हो सकती है, लेकिन बहुत ज्यादा ब्लड फ्लो, लगातार अनियमित पीरियड्स या अचानक आया बड़ा बदलाव सामान्य मानकर नहीं छोड़ना चाहिए। इसके लिए डॉक्टर से सलाह लेना उचित होगा।
महिलाओं की प्रजनन क्षमता उम्र के साथ धीरे-धीरे कम होती है। 35 के बाद यह बदलाव अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है और आगे चलकर पेरिमेनोपॉज या मेनोपॉज की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि 35 की उम्र का मतलब मेनोपॉज शुरू होना नहीं है। हर महिला में इसका समय अलग होता है।
व्यायाम, देर रात जागने या बहुत व्यस्त दिन के बाद शरीर को पहले की तुलना में अधिक आराम की जरूरत महसूस होती है। मसल्स रिकवरी भी धीमी होती है। इसलिए पर्याप्त नींद, आराम और संतुलित व्यायाम औऱ डाइट महत्वपूर्ण हो जाती है।
हार्मोन, तनाव, नींद और जीवनशैली में बदलाव का असर मूड और एनर्जी पर पड़ता है। कभी-कभी चिड़चिड़ापन, थकान या एकाग्रता में कमी महसूस होना संभव है, लेकिन अगर लगातार थकान, उदासी, बेचैनी या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो इसे केवल उम्र का असर मानना सही नहीं है।
अगर पीरियड्स में अचानक बहुत ज्यादा ब्लड फ्लो होने लगे, लंबे समय तक जारी रहे या सामान्य पैटर्न में बड़ा बदलाव आए तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।
बालों का अचानक तेजी से झड़ना, सिर पर जगह-जगह बाल कम होना या बालों की मोटाई में तेज गिरावट किसी अन्य समस्या का संकेत हो सकती है। ऐसे मामलों में जांच की जरूरत होती है।
अगर खान-पान और डेली एक्टिविटी में कोई बड़ा बदलाव किए बिना वजन तेजी से बढ़ या घट रहा है, तो इसे केवल उम्र का असर न मानें। थायरॉयड, हार्मोन और अन्य स्वास्थ्य कारणों की जांच जरूरी होती है।
पर्याप्त आराम के बावजूद लगातार थकान रहना सामान्य उम्र बढ़ने के संकेत नहीं है। एनीमिया, थायरॉयड की समस्या, नींद की समस्या और अन्य कारणों की जांच डॉक्टर से कराना बेहतर है।
शरीर में नया दर्द, गांठ, असामान्य रक्तस्राव, सांस फूलना या ऐसा कोई लक्षण जो लगातार बना रहे, उसकी चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
इस उम्र में शरीर में होने वाले बदलावों से घबराने के बजाय अपनी दिनचर्या पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। पर्याप्त प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और फिजिकल एक्टिविटी, पर्याप्त नींद स्ट्रेस मैनेजमेंट की कोशिश करनी चाहिए। साथ ही, नियमित स्वास्थ्य जांच को 35 की उम्र के बाद लाइफस्टाइल का हिस्सा बना लेना चाहिए।