रोहित शर्मा ने पास किया BCCI का सबसे मुश्किल फिटनेस टेस्ट, जानें क्या होता ब्रोंको टेस्ट?

Rohit Sharma passes the Bronco test: रोहित शर्मा बीसीसीआई का फिटनेस टेस्ट पास कर लिया है। रोहित ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ब्रोंको टेस्ट के साथ यो-यो टेस्ट भी पास कर लिया है।
रोहित शर्मा ने पास किया BCCI का सबसे मुश्किल फिटनेस टेस्ट, जानें क्या होता ब्रोंको टेस्ट?
रोहित शर्मा (फोटो-सोशल मीडिया)
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Rohit Sharma passes Bronco and Yo-Yo test: भारतीय टीम के स्टार खिलाड़ी और वनडे टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने बीसीसीआई का फिटनेस टेस्ट पास कर लिया है। बीसीसीआई ने खिलाड़ियों की फिटनेस के स्तर को उठाने के लिए 'ब्रोंको टेस्ट' को लाया गया है। अब भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए खिलाड़ियों को ये टेस्ट भी पास करना जरूरी होगा।

आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक 38 वर्षीय रोहित शर्मा ने बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में आयोजित फिटनेस कैंप के दौरान सभी टेस्ट पास कर लिए। जिसमें ब्रोंको और यो-यो टेस्ट भी शामिल हैं। रोहित ने दोनों टेस्ट पास कर लिए। इस टेस्ट के दौरान रोहित की स्टेमिना में काफी सुधार देखने को मिली। रोहित ने दोनों टेस्ट पास करके कोचिंग स्टाफ को संतुष्ट किया है।

रोहित शर्मा के अलावा कई और खिलाड़ियों ने भी इस टेस्ट को पास कर लिया है। रोहित के अलावा शुभमन गिल, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, वाशिंगटन सुंदर, शार्दुल ठाकुर और यशस्वी जायसवाल ने भी इस टेस्ट को पास किया है। वहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रोंको टेस्ट में प्रसिद्ध कृष्णा से सभी को प्रभावित किया है।

ब्रोंको टेस्ट क्या है?

ब्रोंको टेस्ट क्रिकेट खिलाड़ियों की फिटनेस जांचने का एक तरीका है। यह टेस्ट उनके दिल और दिमाग दोनों को मेहनत करने पर मजबूर करता है, जैसे कि असली मैच में होता है। चार कोन्स जमीन पर लगाए जाते हैं। पहला 0 मीटर, दूसरा 20 मीटर, तीसरा 40 मीटर और चौथा 60 मीटर पर लगाया जाता है। खिलाड़ी को पहले 20 मीटर तक दौड़ना है और वापस आना है, फिर 40 मीटर तक दौड़ना और वापस आना है, फिर 60 मीटर तक दौड़ना और वापस आना है। जिसको पूरा करते ही एक सेट पूरा हो जाता है।

कितना दौड़ना होता है?

एक सेट में कुल 240 मीटर दौड़ना होता है। खिलाड़ी को पांच सेट पूरे बिना रुकावट के पूरा करना होता है, मतलब कुल 1200 मीटर। ब्रोंको टेस्ट तीव्रता और एथलीट की सहनशक्ति, स्टेमिना और रिकवरी को चुनौती देने की क्षमता के लिए जाना जाता है। क्रिकेट जगत में भले ही ब्रोंको टेस्ट नया हो, लेकिन रग्बी में लंबे समय से फिटनेस के मानक के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

आज के दौर में क्रिकेट का शेड्यूल खिलाड़ियों को काफी व्यस्त रखता है, जिसके लिए क्रिकेटर्स को बेहतर फिटनेस स्तर की जरूरत है। इसी को मद्देनजर रखते हुए ब्रोंको टेस्ट तैयार किया गया। यह खिलाड़ियों की कार्डियोवैस्कुलर क्षमता और मानसिक क्षमता की कड़ी परीक्षा लेता है, जो आधुनिक क्रिकेट की शारीरिक मांगों को दर्शाता है।

ब्रोंको टेस्ट क्यों है खास ?

  • ब्रोंको टेस्ट खिलाड़ी की ह्रदय और फेफड़ों की ताकत को दिखाता है।
  • यह लगातार तेज दौड़ने और दिशा बदलने की क्षमता को मापता है, जो क्रिकेट में बहुत जरूरी है।
  • यह मानसिक ताकत भी दिखाता है क्योंकि बिना रुके लगातार दौड़ना आसान नहीं होता।

खिलाड़ियों के लिए ब्रोंको टेस्ट सिर्फ एक शारीरिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी मापदंड है कि कोई खिलाड़ी लगातार कितनी देरी तेज दौड़ सकता है। इस टेस्ट में बार-बार दिशा बदलने और तेजी से स्प्रिंट करने की जरूरत होती है। ठीक वैसे ही जैसे क्रिकेट में बल्लेबाजी करते समय रन दौड़ते हुए या फील्डिंग के दौरान गेंद का पीछा करते हुए होता है।

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