
Nashik forest issue (सोर्सः सोशल मीडिया)
Forest Corruption Malegaon: मालेगांव तहसील क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जारी अवैध वृक्ष कटाई, वनभूमि पर अतिक्रमण और वन विभाग में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ मालेगांवकर विधायक संघर्ष समिति के निखिल बालासाहेब पवार ने तीव्र रोष व्यक्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि नाशिक पूर्व के उपवनसंरक्षक इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी उपाययोजना करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।
पवार के अनुसार, मालेगांव तहसील में लगभग 33 हजार हेक्टेयर वनभूमि दर्ज है, लेकिन वास्तविकता में मात्र डेढ़ से दो हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ही कहीं-कहीं पेड़ शेष बचे हैं। प्राकृतिक जंगल तेजी से नष्ट होते जा रहे हैं। ताहराबाद, सटाणा, देवळा, कळवण, नांदगांव और चांदवड वन परिक्षेत्रों में अवैध वृक्ष कटाई के साथ-साथ मुरूम और रेत की चोरी खुलेआम जारी है, जिससे वन्यजीवों का अस्तित्व गंभीर संकट में पड़ गया है। जंगल खत्म होने के कारण वन्यजीव खेतों और शहरी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मालेगांव तहसील में संचालित सॉमिल, सायजिंग और लकड़ी प्रसंस्करण उद्योगों पर वन विभाग का कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है। बाहर से लाई जाने वाली लकड़ी पर न तो हैमर मार्क होता है और न ही वैध दस्तावेज, इसके बावजूद संबंधित इकाइयों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। अधिकारी और कर्मचारी प्रत्यक्ष क्षेत्र निरीक्षण से बचते हुए केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहते हैं, जिसके कारण अवैध वृक्ष कटाई और अतिक्रमण को खुला संरक्षण मिल रहा है।
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इस पृष्ठभूमि में निखिल पवार ने कुल 11 ठोस मांगें रखी हैं, जिनमें अवैध लकड़ी पाए जाने पर सॉमिल सील करना, कठोर आर्थिक दंड और कारावास का प्रावधान, वन-राजस्व-पुलिस का संयुक्त जांच दल, संबंधित कर्मचारियों की स्थानांतरण नीति, चाराईबंदी, दिन-रात गश्त और मालेगांव के लिए स्वतंत्र ‘फ्लाइंग स्क्वॉड’ की नियुक्ति शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे मालेगांव वन विभाग कार्यालय के सामने आमरण अनशन शुरू करेंगे।






