Budget 2026 Expectations: आगामी केंद्रीय बजट 2026 पेश होने जा रहा है, जहां वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना नौवां बजट पेश करेंगी। इस बार मध्यम वर्ग और किसानों के साथ-साथ शेयर बाजार के निवेशक भी सरकार से टैक्स छूट और निवेश के अनुकूल नीतिगत बदलावों की बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं।
शेयर बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स छूट का दायरा बढ़ाना बेहद जरूरी है। एसएस ऑनलाइन के संस्थापक और सीईओ श्रेय जैन के अनुसार, वर्तमान में एक वित्तीय वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई एलटीसीजी टैक्स नहीं देना पड़ता, जबकि इससे अधिक की कमाई पर 12.5% टैक्स लगता है। बाजार की मांग है कि इस कर-मुक्त सीमा को बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया जाए।
इसी तरह, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स में भी बड़ी कटौती की मांग की जा रही है। वर्तमान में 12 महीने से पहले बेचे गए शेयरों पर 20% की दर से टैक्स वसूला जाता है। निवेशक चाहते हैं कि इस टैक्स की दर को घटाकर 10% किया जाए और ₹1.5 लाख तक के लाभ पर पूरी तरह से कर मुक्ति प्रदान की जाए। विशेषज्ञों का तर्क है कि इससे घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और शेयर बाजार में अधिक तरलता आएगी।
बजट 2026 से पहले ज़ेरोधा के सीईओ नितिन कामत ने इक्विटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि शेयरों की खरीद-बिक्री पर लगने वाला यह टैक्स बाजार की गतिविधियों और सरकारी राजस्व दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। कामत ने याद दिलाया कि एसटीटी को तब लागू किया गया था जब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स शून्य था, ताकि सरकार मार्केट से आसानी से राजस्व जुटा सके।
अब जबकि एलटीसीजी टैक्स फिर से लागू हो चुका है, तो एसटीटी को वापस लेने के बजाय उसे बार-बार बढ़ाने के तर्क पर सवाल उठ रहे हैं। वर्तमान में यह डिलीवरी पर 0.1%, डेरिवेटिव मार्केट में 0.01% और इंट्राडे में 0.025% की दर से वसूला जाता है। देखने में यह राशि बहुत कम लगती है, लेकिन बड़े ट्रांजैक्शन पर यह निवेशकों की जेब पर भारी बोझ डालती है, इसलिए इसे समाप्त करने या कम करने की मांग जोर पकड़ रही है।
Budget 2026 Expectations: आगामी केंद्रीय बजट 2026 पेश होने जा रहा है, जहां वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना नौवां बजट पेश करेंगी। इस बार मध्यम वर्ग और किसानों के साथ-साथ शेयर बाजार के निवेशक भी सरकार से टैक्स छूट और निवेश के अनुकूल नीतिगत बदलावों की बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं।
शेयर बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स छूट का दायरा बढ़ाना बेहद जरूरी है। एसएस ऑनलाइन के संस्थापक और सीईओ श्रेय जैन के अनुसार, वर्तमान में एक वित्तीय वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई एलटीसीजी टैक्स नहीं देना पड़ता, जबकि इससे अधिक की कमाई पर 12.5% टैक्स लगता है। बाजार की मांग है कि इस कर-मुक्त सीमा को बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया जाए।
इसी तरह, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स में भी बड़ी कटौती की मांग की जा रही है। वर्तमान में 12 महीने से पहले बेचे गए शेयरों पर 20% की दर से टैक्स वसूला जाता है। निवेशक चाहते हैं कि इस टैक्स की दर को घटाकर 10% किया जाए और ₹1.5 लाख तक के लाभ पर पूरी तरह से कर मुक्ति प्रदान की जाए। विशेषज्ञों का तर्क है कि इससे घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और शेयर बाजार में अधिक तरलता आएगी।
बजट 2026 से पहले ज़ेरोधा के सीईओ नितिन कामत ने इक्विटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि शेयरों की खरीद-बिक्री पर लगने वाला यह टैक्स बाजार की गतिविधियों और सरकारी राजस्व दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। कामत ने याद दिलाया कि एसटीटी को तब लागू किया गया था जब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स शून्य था, ताकि सरकार मार्केट से आसानी से राजस्व जुटा सके।
अब जबकि एलटीसीजी टैक्स फिर से लागू हो चुका है, तो एसटीटी को वापस लेने के बजाय उसे बार-बार बढ़ाने के तर्क पर सवाल उठ रहे हैं। वर्तमान में यह डिलीवरी पर 0.1%, डेरिवेटिव मार्केट में 0.01% और इंट्राडे में 0.025% की दर से वसूला जाता है। देखने में यह राशि बहुत कम लगती है, लेकिन बड़े ट्रांजैक्शन पर यह निवेशकों की जेब पर भारी बोझ डालती है, इसलिए इसे समाप्त करने या कम करने की मांग जोर पकड़ रही है।






