
judiciary controversy Maharashtra (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Bar Association: नासिक जिला न्यायालय के इतिहास में संभवतः पहली बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है, जब नासिक बार एसोसिएशन ने एक साथ पांच न्यायाधीशों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वकीलों ने इन न्यायाधीशों पर मनमानी कार्यप्रणाली, अहंकारी रवैये और वकीलों के साथ अपमानजनक व्यवहार करने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए सोमवार, 2 फरवरी को अदालती कामकाज का बहिष्कार किया।
वकीलों ने जिला न्यायाधीश (2) एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर. एम. पांढरे, जिला न्यायाधीश (1) आर. एस. कानडे, वरिष्ठ सह दीवानी न्यायाधीश एस. डी. हिवाले, सह दीवानी न्यायाधीश एस. एस. बांगड और वरिष्ठ सह दीवानी न्यायाधीश एस. के. देवकर के विरुद्ध ‘काम बंद’ आंदोलन का रुख अपनाया है। शिकायत में कहा गया है कि ये न्यायाधीश समय की पाबंदी का पालन नहीं करते, वकीलों की दलीलें नहीं सुनते और बार-बार अपमानजनक व्यवहार करते हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर पक्षकारों का विश्वास डगमगा रहा है।
बार एसोसिएशन के अनुसार, इस संबंध में मुंबई उच्च न्यायालय के पालक न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस. डी. जगमलानी से भी कई बार शिकायत की गई थी। समाधान न निकलने पर वकीलों ने सोमवार को संबंधित न्यायाधीशों की अदालतों में उपस्थित न होने का निर्णय लिया। इस दौरान एसोसिएशन ने यह मांग भी की कि वकीलों की अनुपस्थिति में न्यायाधीश एकतरफा सुनवाई या निर्णय न करें।
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नासिक बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एड. नितीन ठाकरे ने कहा कि “हमने इस मुद्दे पर बार-बार शिकायतें की हैं। सुधार न होने के कारण आज प्रतीकात्मक रूप से एक दिन के लिए संबंधित न्यायाधीशों के कामकाज में हिस्सा नहीं लिया गया। हमें उम्मीद है कि अब न्यायाधीशों के व्यवहार में सुधार होगा, अन्यथा आगे की कड़ी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।”






