झूलेलाल के जयकारों से गूंजा मंदिर (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Ulhasnagar: सिंधी समुदाय का चालीस दिवसीय पवित्र व्रत तथा अखंड ज्योति महोत्सव अर्थात चालीहा पर्व का समापन शनिवार की देर शाम आस्था, श्रद्धा एवं पारंपरिक मटकी परवान के साथ हुआ। पवित्र चालीहा पर्व के दौरान सिंधी समाज के लाखों लोगों ने चालीस दिनों तक उपवास रखकर पूजा-अर्चना की तथा सुबह-शाम भगवान झूलेलाल की कथा का श्रवण भी किया। इस महोत्सव में झूलेलाल मंदिरों को विशेष रूप से सुसज्जित किया गया था। मंदिरों में कथा, आरती, भजन-कीर्तनों के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन तथा हजारों की संख्या में दीप प्रज्वलन हुए।
इन व्रतों के दिनों में महिलाएं प्रतिदिन चार या पांच मुखी आटे का दीपक से भगवान की पूजा करती हैं, साथ ही मनोकामनाएं मांगने वाली महिलाएं अपने घर से चावल, इलायची, मिस्त्री व लौंग लाकर झूलेलाल भगवान की आराधना करती हैं। मटकी और बहराणा साहेब का आयोजन भी होता है। जीवन को सुखी बनाने एवं लोक कल्याण के लिए यह व्रत महोत्सव मनाया जाता है।
समुदाय का बड़ा व्रत, जल की आराधना का पर्व भगवान झूलेलाल के इस पर्व में जल की आराधना की जाती है। यह सिंधी समुदाय का सबसे बडा। व्रत का पर्व माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन दिनों भगवान झूलेलाल वरूणदेव का अवतरण करके भक्तों के कष्ट दूर करते हैं। जो भी 40 दिन तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते है, उनके सभी दुख दूर हो जाते हैं। सिंधी समुदाय का सबसे बडा। धार्मिक आयोजन भगवान झूलेलाल चालीहा महोत्सव ही माना जाता है।
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76 सालों से प्रज्वलित अखण्ड ज्योति को साक्षी मानते हुए किया जाने वाला 40 दिन का व्रत दुनिया के किसी भी व्रत से ज्यादा लंबे अंतराल तक चलने वाला व्रत त्यौहार माना जाता है। 30 अगस्त को मटकी मेले का आयोजन सन्तों-महात्माओं के सानिध्य में हुआ। उल्हासनगर कैम्प 5 के पूज्य चालीहा साहब मंदिर में विभिन्न कार्यक्रम हुए।
भक्तों ने सिर पर मटकी रखकर जल देवता की पूजा कर मटकी को चालीहा मंदिर तथा कल्याण स्थित नदी के जल में प्रवाहित किया। हर साल की तरह इस साल भी शिवसेना उल्हासनगर शहर शाखा के तरफ से इस पर्व पर मंदिर जाते भक्तों के लिए उल्हासनगर 1 नंबर से 5 नंबर तक एक दिन के लिए मुफ्त में बस सेवा चलाई गई।