ठाणे के गणेशोत्सव पंडाल में 11 मारुतिराय के दर्शन (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Ganeshotsav pandal: शहर में 10 दिवसीय गणेशोत्सव की धूम है। सार्वजनिक गणेशोत्सव पंडालों में अनेक तरह की झांकियों के माध्यम से सामाजिक सरोकार, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का काम किया जा रहा है। शहर के पांचपाखाडी स्थित नरवीर तानाजी सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल इस वर्ष विधायक डॉ जितेंद्र आवाड के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र में ग्यारह जागृत मारुतिराय के दर्शन करा रहा है। एक प्राचीन मंदिर की प्रतिकृति और एक ही स्थान पर ग्यारह मारुति के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की कतार लग रही है।
गौरतलब हो कि वर्ष 1979 में कुछ युवाओं ने मिलकर एक रचनात्मका उद्देश्य से इस सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी। आज यह गणेशोत्सव पूरे राज्य में ठाणे के राजा के रूप में अपनी पहचान बनाया है।एक व्यक्ति चाहे कितना भी अच्छा पर्यटक क्यों न हो, उसके लिए आर्थिक रूप से और सांसारिक कठिनाइयों के पहाड़ को पार करके देश भर के मंदिरों की यात्रा पूरी करना संभव नहीं है। पांचपाखाड़ी क्षेत्र में ही भारत के मंदिरों के दर्शन इस बात से अवगत नरवीर तानाजी सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल ने गणेशोत्सव के दौरान देशभर के अनेक मंदिर शिल्पों का निर्माण कर ठाणेकरों को पांचपाखाड़ी में ही भारत के मंदिरों के दर्शन कराए हैं।
1979 से अब तक शहीद स्मारक, राजवाड़ा, महाराष्ट्र की सांस्कृतिक दृष्टि, कश्मीर में चरार-ए-शरीफ दरगाह, हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक, स्वतंत्रता के बाद का भारत, स्वतंत्रता संग्राम में ठाणे शहर, मराठी मानसा जगा हो, भारतीय संस्कृति का दर्शन, युवा शक्ति, गणेश दरबार, मीनाक्षी मंदिर, गुफा मंदिर, पार्वती महल, राजस्थानी महल, जोधा-अवावर महल, सुवर्ण स्वर्ग, नरवीर तानाजी सर्वजी गणेशोत्सव मंडाल ने गणेशोत्सव की ज्ञानवर्धक परंपरा को राज्य में ही नहीं, बल्कि देश में भी फैलाया है। इस वर्ष इस मंडल ने राज्य में ग्यारह जागूत मारुति मंदिरों का दृश्य स्थापित किया है।
चार विशाल स्तंभों पर 15 फुट ऊंचा मंदिर इसी के अनुसाए ग्यारह भाटति की प्रतिकृचा बनाई गई है, अधीर 17वीं सदी में स्थापित शहापुर रिक्त बासी मंदिर मतात की छूना का मालति मंदिर, समात की मसूर मारुति दीर मारा शिमगा माता की बड़ी का मासान, उम्र, सातारा जगद का मागति, सागली की वहे कर मारुति, कोल्हापुर स्थित मनपदाले माति पर कोल्हापुर के बाल माहति और शिवले, संपती के वीर मासति शामिल है। इसके लिए चार विशाल स्तभी पर 15 फुट ऊबा मंदिर कन्या गया है, जिसमे फरवरी और प्राकृतिक रंगी का उपन करके 61 बाय 20 फीट माप वाली दीवार का आभास कराया गया है।
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इस मंदिर में 20 × 20 फीट आकार का एक हॉल, 41 × 20 फीट आकार का एक सभा भवन और 10 × 20 फीट का प्रवेश द्वार है। आकर्षक विद्युत प्रकाश इस दृश्य की सुंदरता में चार चांद लगा रहा है। इस मंदिर की सजावट मंदार मोहन गोले ने की है।
नरवीर तानाजी सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल (ठाणे का राजा) मुख्य सलाहकार एवं मार्गदर्शक डॉ. जितेंद्र आव्हाड के मार्गदर्शन में, सलाहकार मनोज प्रधान की पहल पर, अध्यक्ष संदीप पवार, उपाध्यक्ष संदेश प्रभु, महासचिव रमेश चौधरी, कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप कांबले, कोषाध्यक्ष दीपक भंगरथ और सैकड़ों सदस्य गणेश जी की सेवा में दिन-रात जुटे हुए हैं। मूर्तिकार केदार घाटे ने विघ्नहर्ता की 8 फुट ऊंची प्रतिमा का निर्माण किया है।