
महाराष्ट्र के पूर्व MLC डॉ. अशोक मोडक (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Former MLC Ashok Modak Death News: महाराष्ट्र की राजनीति और शिक्षा जगत को बड़ा नुकसान पहुंचा है। महाराष्ट्र विधान परिषद के पूर्व सदस्य और प्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. अशोक गजानन मोडक का उम्र संबंधी बीमारियों के कारण मुंबई के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया।
महाराष्ट्र विधान परिषद के पूर्व सदस्य (MLC) और प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. अशोक गजानन मोडक का शुक्रवार देर रात निधन हो गया। वह 85 वर्ष के थे और उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके बेटे आशीष मोडक ने बताया कि पवई स्थित एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से राजनीतिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है।
डॉ. मोडक अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री का परिवार छोड़ गए हैं। परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पारिवारिक परंपराओं के अनुसार संपन्न की जाएगी। कई राजनीतिक नेताओं, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
डॉ. अशोक गजानन मोडक ने 1994 से 2006 तक कुल 12 वर्षों तक महाराष्ट्र विधान परिषद में कोंकण स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से उठाया और विशेष रूप से शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास पर जोर दिया। दूरदराज और आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने के लिए उन्होंने विधान परिषद निधि का प्रभावी उपयोग किया।
विधान परिषद में उनके सक्रिय और सारगर्भित योगदान के लिए वर्ष 1997 में उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ सांसद’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे अपने विषयों की गहरी समझ और तथ्यपूर्ण बहस के लिए जाने जाते थे, जिससे सदन में उनकी अलग पहचान बनी।
डॉ. मोडक एक प्रख्यात शिक्षाविद् और सोवियत अध्ययन के विशेषज्ञ थे। उन्होंने अपने अकादमिक जीवन में 40 से अधिक पुस्तकें और 120 से ज्यादा शोध पत्र लिखे। उनका शैक्षणिक कार्य देश-विदेश के कई विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में संदर्भ के रूप में उपयोग किया जाता रहा है।
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डॉ. अशोक मोडक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्पित स्वयंसेवक थे। इसके साथ ही उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छात्र राजनीति और वैचारिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
डॉ. अशोक गजानन मोडक का जीवन शिक्षा, सेवा और वैचारिक प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा। राजनीति और अकादमिक जगत में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। उनके निधन से महाराष्ट्र ने एक अनुभवी नेता और विद्वान को खो दिया है।






