Indore Water Crisis: स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार नंबर-1 रहने वाले इंदौर से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है, जहाँ जहरीला पानी पीने से 14 लोगों की जान चली गई। इस त्रासदी पर नेहा सिंह ने सरकार को घेरते हुए मृतकों की जान की कीमत और वीआईपी खर्चों के बीच के अंतर पर कड़ा प्रहार किया है।
देश के सबसे साफ शहर इंदौर में जल प्रदूषण ने भयावह रूप ले लिया है, जहाँ अब तक 14 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इन मृतकों में एक 6 महीने का मासूम बच्चा भी शामिल है, जो प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। नेहा सिंह ने सवाल उठाया है कि क्या सरकार के नेताओं के हाथ में मौजूद फोन की कीमत भी आम जनता की जान से ज्यादा हो गई है?, उनका कहना है कि जब सरकार से जवाब मांगा गया, तो बदले में कुछ हासिल नहीं हुआ, और दबाव बढ़ने पर मृतक के परिजनों के लिए मात्र ₹2 लाख का मुआवजा तय कर दिया गया।
नेहा सिंह ने ₹2 लाख की मुआवजा राशि को एक भद्दा मजाक बताते हुए कहा कि सरकार की एक मोहल्ला मीटिंग का बजट भी इससे कहीं अधिक होता है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या सरकार के शीर्ष नेता, जो महीने भर में ₹2 लाख से ज्यादा का जलपान कर लेते हैं और जिनके काफिले में इससे ज्यादा का डीजल जल जाता है, वही पानी ₹2 लाख के बदले खुद पीने के लिए तैयार होंगे? उन्होंने सरकार समर्थकों से भी सवाल किया कि क्या वे इस तरह की जानलेवा व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहते हैं।
Indore Water Crisis: स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार नंबर-1 रहने वाले इंदौर से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है, जहाँ जहरीला पानी पीने से 14 लोगों की जान चली गई। इस त्रासदी पर नेहा सिंह ने सरकार को घेरते हुए मृतकों की जान की कीमत और वीआईपी खर्चों के बीच के अंतर पर कड़ा प्रहार किया है।
देश के सबसे साफ शहर इंदौर में जल प्रदूषण ने भयावह रूप ले लिया है, जहाँ अब तक 14 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इन मृतकों में एक 6 महीने का मासूम बच्चा भी शामिल है, जो प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। नेहा सिंह ने सवाल उठाया है कि क्या सरकार के नेताओं के हाथ में मौजूद फोन की कीमत भी आम जनता की जान से ज्यादा हो गई है?, उनका कहना है कि जब सरकार से जवाब मांगा गया, तो बदले में कुछ हासिल नहीं हुआ, और दबाव बढ़ने पर मृतक के परिजनों के लिए मात्र ₹2 लाख का मुआवजा तय कर दिया गया।
नेहा सिंह ने ₹2 लाख की मुआवजा राशि को एक भद्दा मजाक बताते हुए कहा कि सरकार की एक मोहल्ला मीटिंग का बजट भी इससे कहीं अधिक होता है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या सरकार के शीर्ष नेता, जो महीने भर में ₹2 लाख से ज्यादा का जलपान कर लेते हैं और जिनके काफिले में इससे ज्यादा का डीजल जल जाता है, वही पानी ₹2 लाख के बदले खुद पीने के लिए तैयार होंगे? उन्होंने सरकार समर्थकों से भी सवाल किया कि क्या वे इस तरह की जानलेवा व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहते हैं।






