
किचन में हाई-प्रोटीन रोटी बनाती महिला (सौ. एआई)
Gluten Free Diet: बढ़ता वजन और डायबिटीज जैसी समस्या आजकल काफी ज्यादा देखने को मिलती है जिसके पीछे हमारी खराब लाइफस्टाइल एक बड़ी वजह है। ऐसे में हेल्दी बदलाव शरीर से बीमारियों को दूर रखने में मदद कर सकते हैं।
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ग्लूटेन-फ्री शब्द काफी चर्चा में है। कई लोगों को गेहूं में मौजूद ग्लूटेन प्रोटीन को पचाने में दिक्कत होती है जिससे पेट फूलना, भारीपन और थकान जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि गेहूं की जगह मिलेट्स यानी मोटे अनाजों को अपनी थाली में शामिल करना सेहत के लिए सबसे बड़ा निवेश हो सकता है।
हाई-प्रोटीन रोटी बनाने के लिए आप कई तरह के ग्लूटेन-फ्री आटा का मिश्रण तैयार कर सकते हैं। इसमें रागी, ज्वार, बाजरा, मक्का और चने का आटा शामिल है। रागी जहां कैल्शियम से भरपूर है वहीं ज्वार और बाजरा फाइबर का खजाना हैं। चने का आटा इसमें प्रोटीन की मात्रा को बढ़ा देता है जो जिम जाने वाले युवाओं और वेट लॉस करने वालों के लिए बेस्ट है।
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अक्सर लोगों की शिकायत होती है कि बिना गेहूं के आटे की रोटी टूट जाती है या सख्त बनती है। इसे नरम बनाने के लिए कुछ खास टिप्स अपना सकते हैं।
गुनगुने पानी का प्रयोग: आटे को हमेशा हल्के गर्म पानी से गूंथें। इससे आटे में बाइंडिंग अच्छी आती है।
सब्जियों का ट्विस्ट: आटे में कद्दूकस की हुई लौकी, गाजर या उबले हुए आलू मिलाने से रोटियां बेहद नरम और स्वादिष्ट बनती हैं।
रेस्टिंग टाइम: आटा गूंथने के बाद उसे 10-15 मिनट के लिए ढककर रख दें।
ग्लूटेन-फ्री अनाजों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है जिसका मतलब है कि इन्हें खाने के बाद ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता। साथ ही इनमें फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण इसे खाने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती जिससे आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं और वजन तेजी से कम होता है।
अगर आप स्वस्थ, ऊर्जावान और फिट रहना चाहते हैं तो अपनी डाइट में यह बदलाव आज ही करें। यह रोटी न केवल आपको बीमारियों से बचाएगी बल्कि आपके स्वाद को भी एक नया अनुभव देगी।






