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UP News: कैसे निलंबन के चंगुल से निकले IAS अभिषेक प्रकाश, क्यों बैकफुट पर आई योगी सरकार? यहां जानिए पूरी कहानी
- Written By: अभिषेक सिंह
UP Bureaucracy: उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी से शनिवार को एक बड़ी ख़बर सामने आई। एक साल पहले रिश्वत मांगने के आरोप में सस्पेंड किए गए 2006 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बहाल कर दिया गया।

IAS Abhishek Prakash Reinstated: उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी से शनिवार को एक बड़ी ख़बर सामने आई। एक साल पहले रिश्वत मांगने के आरोप में सस्पेंड किए गए 2006 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बहाल कर दिया गया। राज्यपाल के आदेश के बाद वह कल से एक बार फिर वह सेवाएं दे सकेंगे। इस बीच सवाल यह उठ रहा है कि ऐसा क्या हुआ जो सरकार को अपने कदम वापस खींचने पड़े?
IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश की बहाली के आदेश का आदेश आते ही यह सवाल सबके जेहन में उछलकूद करने लगा है कि सरकार के इस फैसले के पीछे आखिर कौन सा कारण है? सवाल यह भी है कि क्या वह आरोपों से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं? आपके भी मन में यही सवाल है तो चलिए इसका जवाब जान लेते हैं…
राज्यपाल ने दी बहाली को हरी झंडी
सरकारी शासनादेश के अनुसार, अदालत के रुख को देखते हुए राज्यपाल ने उनकी बहाली के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। उनका निलंबन 14 मार्च की आधी रात के बाद समाप्त माना जाएगा और वे आधिकारिक तौर पर 15 मार्च से अपने कर्तव्यों को फिर से शुरू कर सकेंगे।
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जारी रहेगी विभागीय जांच
सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि इस बहाली का मतलब यह नहीं है कि उन पर लगे आरोपों से उन्हें पूरी तरह से बरी कर दिया गया है। उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच और सबूत इकट्ठा करने की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी। अभिषेक प्रकाश की वापसी के पीछे मुख्य वजह इलाहाबाद हाई कोर्ट का एक फैसला है जिसने सरकार को बैकफुट पर जाने के लिए मजबूर किया है।
हाई कोर्ट ने खारिज की चार्जशीट
दो दिन पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी कि IAS अधिकारी पर लगाए गए रिश्वत के आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है। सबूतों की कमी का हवाला देते हुए अदालत ने उनके खिलाफ दायर आरोप पत्र को पूरी तरह से खारिज कर दिया। इस कानूनी जीत के बाद उन्हें उनके एक साल के निलंबन की अवधि पूरी होने से ठीक पहले वापस बुला लिया गया।
क्यों सस्पेंड किए गए थे अभिषेक?
जब 20 मार्च 2025 को अभिषेक प्रकाश को निलंबित किया गया था, तो इससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया था। उन पर एक सौर ऊर्जा कंपनी से एक परियोजना को मंजूरी देने के बदले में भारी रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। वे ‘भटगांव भूमि अधिग्रहण घोटाला’ और ‘रक्षा गलियारा भूमि घोटाला’ से संबंधित जांच के दायरे में बने हुए हैं।
डीएम रहते हुए किया ये घोटाला!
आरोप है कि लखनऊ के डीएम रहते हुए उन्होंने निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन करते हुए मुआवजे का वितरण किया और ‘ग्राम समाज’ की भूमि के लिए फर्जी पट्टे जारी करने की सुविधा देकर एक बड़ा घोटाला किया। राजस्व विभाग ने मई 2025 में ही इन घोटालों में उनकी कथित संलिप्तता के संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट नियुक्ति विभाग को सौंप दी थी।
कैसी होगी आगे की डगर?
अभिषेक प्रकाश के लिए आगे का रास्ता आसान होने की संभावना नहीं है। राजस्व बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष रजनीश दुबे की जांच रिपोर्ट उनके लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है। क्रय समिति के अध्यक्ष के रूप में उन पर गंभीर आरोप लगे हैं, जिनमें अपने कर्तव्यों का लगन से निर्वहन न करना शामिल है।
यह भी पढ़ें: इस्तीफा दीजिए या तबादला करवा लीजिए, संभल के डीएम-एसपी को हाई कोर्ट की फटकार, नमाज से जुड़ा है मामला
इसी पद पर रहते हुए वैधानिक नियमों की घोर अवहेलना करते हुए अनुसूचित जाति के पट्टेदारों से संबंधित भूमि को तीसरे पक्षों को बेचने की अनुमति देना शामिल है। अब यह देखना बाकी है कि उनकी बहाली के बाद उन्हें कौन-सी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं और चल रही विभागीय जांच का आखिरी परिणाम क्या निकलता है।
How ias abhishek prakash came out of suspension row why yogi government stepped back
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