
काली मुद्रा (सौ. सोशल मीडिया)
Kali Mudra Yoga Benefits: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहत का सही तरह से ख्याल रख पाना आसान नहीं होता है। इस जिंदगी में हर कोई अपनी जीवनशैली में कई तरह की समस्याओं मन का अशांत होना, डर, घबराहट, नींद न आना और तनाव आदि से घिरा रहता है। इसकी वजह से उसके दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। इसके लिए जीवनशैली को व्यवस्थित करने की आवश्यकता होती है तो वहीं पर योग का भी सहारा लिया जा सकता है।
योग में कई मुद्रा में से एक मुद्रा है ‘काली मुद्रा’, जिसे करने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बना रहता है।
यहां पर योग में शामिल काली मुद्रा की बात करें तो, यह शरीर को अंदर से ताकतवर बनाने का काम करती है। कहा जाता है कि, यह मुद्रा मन के बोझ को हल्का करने, नकारात्मक सोच को कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती है। यहां पर बात करें तो, हमारे शरीर में ऊर्जा के बहाव के लिए नाड़ियां होती हैं। इनमें से सुषुम्ना नाड़ी सबसे मुख्य मानी जाती है, जो रीढ़ के बीच से होकर गुजरती है।
जब इस नाड़ी में ऊर्जा का प्रवाह ठीक रहता है, तो मन शांत रहता है और शरीर संतुलन में रहता है। काली मुद्रा इसी ऊर्जा प्रवाह को साफ और सक्रिय करने में सहायक मानी जाती है। नियमित अभ्यास से मन की उलझनें कम होती हैं और ध्यान लगाने में आसानी होती है।
यहां पर शारीरिक रूप से काली मुद्रा का अभ्यास करने से सांस बेहतर बनती है और गहरी सांस लेने और छोड़ने से फेफड़े मजबूत होते हैं। यह शरीर में ऑक्सीजन का संचार बेहतर बनाने का काम करता है। इसके अलावा इस मुद्रा को करने से शरीर की अकड़न-जकड़न और थकान भी कम होती है।लंबे समय तक बैठे रहने या तनाव के कारण अकड़न से भी धीरे-धीरे राहत मिलती है। रक्त संचार बेहतर होने से शरीर हल्का महसूस करता है। इसके अलावा आप मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए काली मुद्रा का अभ्यास का बेहतर रख सकती है।
आजकल बच्चे हों या बड़े, सभी किसी न किसी मानसिक दबाव में रहते हैं। यह मुद्रा दिमाग में छाए धुंधलेपन को कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने में सहायक होती है। पढ़ाई करने वाले बच्चों और परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए भी यह लाभकारी मानी जाती है।
यहां पर काली मुद्रा की बात की जाए तो, काली मुद्रा भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से भी फायदा दिलाते है। भावनात्मक स्तर पर काली मुद्रा डर, गुस्सा और बेचैनी जैसी भावनाओं को बाहर निकालने में मदद करती है। इस मुद्रा के अभ्यास से मन हल्का होता है और भावनाओं का संतुलन बनता है। व्यक्ति खुद को ज्यादा स्थिर और सुरक्षित महसूस करता है। इसके अलावा हम आध्यात्मिक रूप से काली मुद्रा के फायदे की बात करें तो, यह मूलाधार चक्र और मणिपुर चक्र से जोड़ा जाता है। मूलाधार चक्र हमें जमीन से जोड़ता है और सुरक्षा की भावना देता है, जबकि मणिपुर चक्र आत्मबल और आत्मविश्वास का केंद्र माना जाता है। इन दोनों चक्रों के सक्रिय होने से व्यक्ति में साहस, स्थिरता और सकारात्मक सोच बढ़ती है।
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यहां पर काली मुद्रा करने का तरीका आसान होता है।
इसके लिए पहले आप सुखासन में बैठकर या ताड़ासन में खड़े होकर इस मुद्रा का अभ्यास कर सकते है। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर तर्जनी उंगलियों को ऊपर की ओर सीधा रखा जाता है। सांस को धीरे-धीरे अंदर लें और बाहर छोड़ते समय मन में नकारात्मक विचारों को छोड़ने का भाव रखें। शुरुआत में दो से तीन मिनट पर्याप्त हैं; बाद में समय बढ़ाया जा सकता है।






