रोजाना करें अष्ट कुंभक योग का अभ्यास, शारीरिक और मानसिक रूप से मिलेंगे जरूरी फायदे

Breathing Exercises Yoga: अष्ट कुंभक योग में शामिल 8 प्राणायाम तकनीकें शरीर और मन को संतुलित करती हैं। जानें इसके लाभ, अभ्यास विधि और किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
Ashta Kumbhaka Yoga, Yoga Tips
अष्ट कुंभक योग (सौ.सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Asht Kumbhak Yoga Benefits:  शरीर के अंदरूनी और बाहरी स्वस्थ रहने के लिए योग सबसे खास एक्सरसाइज होता है जो आपके मन और दिमाग के बीच संतुलन बनाकर कई बीमारियों से बचाता है। यहां पर शारीरिक औरस मानसिक रूप से शांति के लिए अष्ट कुंभक अभ्यास सबसे खास होता है। इस योग के अभ्यास में दरअसल आठ प्रकार की प्राणायाम तकनीकें शामिल होती है जो विशेष रूप से आपकी सेहत को मजबूत बनाते है।

अष्ट कुंभक योग में ये प्राणायाम का होता है मेल

योग में शामिल अष्ट कुंभक योग सबसे जरूरी प्राणायाम का मेल होता है। इसमें अष्ट कुंभक का उल्लेख हठ योग प्रदीपिका में मिलता है, जिसके अंतर्गत आठ उन्नत प्राणायाम तकनीक आती है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म ऊर्जाओं को जागृत करना और श्वसन क्षमता में वृद्धि करना है। इस योग अभ्यास में 8 प्राणायाम जैसे सूर्य भेदन, उज्जायी, सीतकारी, शीतली, भस्त्रिका, भ्रामरी, मूर्छा और प्लाविनी शामिल होते है। यह सभी आठ तकनीकें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करने का काम करती है।

जानिए अष्ट कुंभक करने का तरीका

यहां पर योग एक्सपर्ट ने अष्ट कुंभक करने के तरीके के बारे में बताया है। इसके लिए सबसे पहले व्यक्ति को एक शांत स्थान पर बैठकर प्रारंभिक ध्यान करना होता है। इसके बाद, इन आठ प्रकार की प्राणायाम तकनीकों का क्रमबद्ध तरीके से अभ्यास किया जाता है। प्रत्येक प्राणायाम को 5-10 बार दोहराना चाहिए। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि श्वास को नियंत्रित करने के लिए सही तकनीक का पालन किया जाए।इस योग प्रक्रिया को अपनाने से पहले, विशेष रूप से उन लोगों को, जिन्हें कोई स्वास्थ्य समस्या है, चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। इसके लाभों को देखते हुए, मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा इसे सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए जरूरी माना है।

नियमित अभ्यास से फायदे

यहां पर अष्ट कुंभक योग का नियमित अभ्यास करने से आपके शरीर को कई तरह के लाभ मिलते है। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक स्थिरता और तनाव को कम करने में भी मदद करता है। यह प्रक्रिया शारीरिक ताकत, सहनशक्ति और मानसिक स्पष्टता को भी बढ़ाती है। अगर इस आसन का नियमित अभ्यास करते है तो सांस लेने की प्रणाली को मजबूत बनाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार लाने का काम करता है। इतना ही नहीं ये योगाभ्यास करने से मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है, जो वजन नियंत्रण में मदद करता है।

आईएएनएस के अनुसार

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com