लाल किला विस्फोट के बाद भी, अल-फलाह यूनिवर्सिटी में छात्रों ने मेडिकल की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया

Red Fort Blast: लाल किला विस्फोट की जांच जारी होने के बीच अल-फलाह मेडिकल कॉलेज की सभी 150 एमबीबीएस सीटें भर गईं, जबकि संस्थान पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
Red Fort Blast
मेडिकल स्टूडेंट्स (सोर्स- सोशल मीडिया)
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After Delhi Blast Students Enrolled For Medical Studies At Al Falah University: दिल्ली के लाल किले के पास हुए घातक विस्फोट ने पूरे देश को हिला दिया है। इस विस्फोट की कड़ी जब फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से जुड़ी, तब जांच और भी तेज हो गई। जांच के बावजूद कॉलेज में एमबीबीएस की सभी सीटें भर जाना लोगों के बीच चर्चा का विषय है। अब राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (NMC) और एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।

लाल किला विस्फोट के बीच अल-फलाह मेडिकल कॉलेज पर सवाल

13 नवंबर को जब जांच एजेंसियों ने लाल किला विस्फोट का संबंध अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से जोड़ा, उसी दिन कॉलेज में MBBS प्रवेश की अंतिम काउंसलिंग चल रही थी। यह विस्फोट 10 नवंबर को हुआ था जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, 2025-26 सत्र के लिए कॉलेज की सभी 150 MBBS सीटें भर चुकी हैं, जबकि संस्थान पर जांच का दबाव बना हुआ है। NMC ने कहा है कि वह जांच एजेंसियों को सभी आवश्यक जानकारी देगा और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

कैसे भरी गईं सभी सीटें?

अल-फलाह मेडिकल कॉलेज को 2019 में NMC से MBBS पढ़ाने की मंजूरी मिली थी। कॉलेज में भारतीय छात्रों के लिए फीस ₹16,37,500 और NRI छात्रों के लिए $32,900 है। हरियाणा सरकार NEET-UG रैंक के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया चलाती है। तीन काउंसलिंग राउंड में 15 सीटें खाली रहीं, लेकिन 13 नवंबर के स्ट्रे राउंड में सभी सीटें भर गईं। इस राउंड में 155 स्कोर वाले छात्रों को NRI कोटे में सीटें दी गईं, जो अर्हक कटऑफ से सिर्फ 11 अंक अधिक था। वहीं दूसरे राउंड में मेनेजमेंट कोटे में न्यूनतम स्कोर 231 और माइनॉरिटी कोटे में 250 था। कॉलेज के एक संकाय सदस्य के अनुसार कई छात्र पहले सरकारी कॉलेज में अपग्रेड हो गए, जिससे सीटें खाली हुईं। बाद में स्ट्रे राउंड में उन छात्रों को सीटें दी गईं जिन्होंने पसंद सूची में कॉलेज चुना था।

कॉलेज की साख पर उठे सवाल

हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन का कहना है कि किसी एक घटना से किसी कॉलेज की छवि तय नहीं होती। कई छात्र कम फीस और उपलब्ध सीटों की वजह से इस कॉलेज को चुनते हैं। साथ ही उनका भरोसा सरकार की तरफ से मिलने वाली मान्यता पर भी है। NMC के अधिकारियों ने कहा कि छात्रों का भविष्य सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जरूरत पड़ने पर सरकार कॉलेज का नियंत्रण भी अपने हाथ में ले सकती है।

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डॉक्टरों पर कार्रवाई और विश्वविद्यालय की जांच

14 नवंबर को NMC ने चार डॉक्टरों को मेडिकल रजिस्टर से हटाया, क्योंकि उनका नाम संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा था। इससे पहले कुलपति ने कहा था कि संस्थान का इन लोगों से कोई निजी संबंध नहीं है। इसी बीच विश्वविद्यालय वित्तीय अनियमितताओं को लेकर भी जांच में है। ED ने विश्वविद्यालय समूह के अध्यक्ष को गिरफ्तार किया है और कहा कि संस्थान ने गलत तरीके से खुद को मान्यता प्राप्त बताया। AIU भी विश्वविद्यालय की सदस्यता रद्द कर चुका है।

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