
अल फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Al Falah University Founder Jawad Siddiqui Arrested: फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी आतंकवाद को फंडिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में हुई है। दिल्ली बम ब्लास्ट की जांच के दौरान जब इस यूनिवर्सिटी का नाम सामने आया, तभी से सिद्दीकी जांच एजेंसियों की रडार पर थे। यह पूरा मामला वित्तीय अनियमितताओं, चैरिटेबल ट्रस्ट के फंड के दुरुपयोग और फर्जी कंपनियों के इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जावेद सिद्दीकी पर शिकंजा कसते हुए मंगलवार (18 नवंबर 2025) को अल-फलाह ग्रुप से जुड़े 19 ठिकानों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। इस रेड के दौरान जांच एजेंसियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और लगभग 48 लाख रुपये कैश बरामद किए। छापेमारी के बाद, ईडी ने अल फलाह समूह के अध्यक्ष जावेद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया। खबरों के अनुसार, यूनिवर्सिटी के अकाउंटेंट को भी हिरासत में लिया गया है। इस पूरे मामले से यूनिवर्सिटी के कामकाज और वित्तीय लेनदेन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, जावेद अहमद सिद्दीकी का जन्म 15 नवंबर 1964 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। उन्होंने इंदौर की देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी से बीटेक की डिग्री ली और उसके बाद 1992 से 1994 तक जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में लेक्चरर के रूप में काम किया। सिद्दीकी पर आरोप है कि उन्होंने अल फलाह यूनिवर्सिटी को संचालित करने वाले चैरिटेबल ट्रस्ट में अपनी पत्नी, बेटी और भाइयों को ट्रस्टी बना रखा था। इंटरनेट से यूनिवर्सिटी से जुड़ी जानकारियों को अचानक हटाए जाने के बाद जांच एजेंसियों का शक और भी बढ़ गया था। सिद्दीकी पहले भी धोखाधड़ी के मामलों में जेल जा चुके हैं, जिससे उनके वित्तीय रिकॉर्ड पर सवाल उठते रहे हैं।
ईडी की जांच में सामने आया है कि अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना 1995 में हुई थी और जावेद सिद्दीकी शुरुआत से ही इसके मैनेजिंग ट्रस्टी हैं। यह ट्रस्ट सीधे उन्हीं के नियंत्रण में काम करता था। जांच में पता चला है कि ट्रस्ट ने बहुत तेजी से बढ़ोतरी (Meteoric Rise) तो दिखाई, लेकिन यह बढ़ोतरी उनकी वास्तविक आय और कमाई से मेल नहीं खाती थी।
सिद्दीकी पर सबसे गंभीर आरोप यह है कि उन्होंने ट्रस्ट के पैसे का गलत इस्तेमाल करते हुए, इसे सीधे अपने परिवार के सदस्यों की कंपनियों में भेजा। कंस्ट्रक्शन, कैटरिंग और अन्य सेवाओं के ठेके सीधे उनकी पत्नी और बच्चों की कंपनियों को दिए गए। इसके अलावा, पैसों की हेराफेरी (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए कई फर्जी कंपनियों (Shell Companies) का भी इस्तेमाल किया गया। इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी खड़ी करने के लिए उनके पास करोड़ों रुपये कहां से आए, इसकी जांच ED कर रही है। दिल्ली बम ब्लास्ट मामले में समन भेजे जाने के बावजूद सिद्दीकी जांच के लिए पेश नहीं हुए थे, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं।
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जावेद सिद्दीकी की गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि ED इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रही है। वित्तीय धोखाधड़ी और आतंकवाद को कथित तौर पर फंडिंग के इस मामले में जांच का दायरा बढ़ सकता है और इसमें शामिल अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।






