फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से 10 लोग 'लापता': क्या लाल किला ब्लास्ट के आतंकियों से है लिंक?

Delhi Blast: फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से 10 लोगों के लापता होने की खबर है, जिनकी जांच लाल किला कार बम धमाके के आतंकियों से उनके संभावित संबंध को लेकर की जा रही है।
Faridabad Al Falah University (Delhi Blast)
अल फलाह यूनिवर्सिटी (सोर्स- सोशल मीडिया)
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10 People Missing From Faridabad's Al Falah University: हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के राडार पर है। दिल्ली के लाल किला के पास हुए भयानक कार बम धमाके के तार इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े होने की आशंका है। अब ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी से जुड़े करीब 10 लोग अचानक गायब हो गए हैं, जिससे जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। आशंका है कि ये लापता लोग उसी खतरनाक आतंकी समूह का हिस्सा हो सकते हैं जिसने दिल्ली में हमला किया था।

यूनिवर्सिटी से 'लापता' हुए 10 लोग, जांच जारी

फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी इस समय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र (ग्राउंड ज़ीरो) बन गई है। जांचकर्ताओं का मानना है कि लाल किला कार बम धमाके की साजिश यहीं रची गई थी। इस धमाके को अंजाम देने वाला फिदायीन हमलावर डॉक्टर उमर उन नबी भी इसी यूनिवर्सिटी से जुड़ा हुआ था। ताजा घटनाक्रम में, यूनिवर्सिटी में काम करने वाले या पढ़ने वाले कम से कम 10 लोगों के लापता होने की सूचना मिली है। इनमें से तीन लोगों के कश्मीरी होने की बात कही जा रही है।

फोन बंद, तलाशी अभियान शुरू

जांच अधिकारियों के अनुसार, गायब हुए इन 10 लोगों के मोबाइल फोन बंद आ रहे हैं, जिससे उनका पता लगाना मुश्किल हो गया है। इन लोगों के अचानक लापता होने का पता तब चला जब जम्मू और कश्मीर और हरियाणा पुलिस ने मिलकर अल-फलाह यूनिवर्सिटी में एक खास तलाशी अभियान चलाया। हालाकि अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन खुफिया एजेंसियों को शक है कि ये लापता लोग उसी 'व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' का हिस्सा हो सकते हैं। इस मॉड्यूल ने ही i20 कार में अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल का इस्तेमाल करके धमाका किया था, जिसमें डॉ. उमर नबी मारा गया था।

लाल किला ब्लास्ट के पीछे जैश का हाथ

खूफिया जानकारी से पता चला है कि इस खतरनाक हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) का हाथ होने की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार, जैश फिदायीन या आत्मघाती हमलों को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान में डोनेशन (चंदा) जुटा रहा था। यह चंदा पाकिस्तानी करेंसी में छोटे-छोटे 20-20 रुपये की रकम में इकट्ठा किया जा रहा था।

जांच अधिकारियों का कहना है कि 10 नवंबर को हुए लाल किला धमाके में वाहन में लगे आईईडी (VBIED) का इस्तेमाल किया गया था। पुलवामा के बाद यह इस तरह का दूसरा और दिल्ली में पहला हमला था। इस तरह के शिक्षित और साधारण दिखने वाले आतंकियों वाले मॉड्यूल को जैश-ए-मोहम्मद ही चलाता है।

फंडिंग के लिए डिजिटल सहारा और महिला आतंकी की साजिश

जांच एजेंसियों को इस बात के भी सुराग मिले हैं कि जैश के सरगना इस धमाके के लिए डिजिटल माध्यमों से पैसे (फंड) जुटा रहे थे। इसके लिए पाकिस्तान के SadaPay जैसे ऐप का भी इस्तेमाल होने की जानकारी मिली है। इसके अलावा, खुफिया जानकारी यह भी बताती है कि आतंकी संगठन शायद महिला आतंकी की अगुवाई में भी कोई और धमाका करने की साजिश रच रहे थे। इन सभी पहलुओं पर गहन जांच की जा रही है।

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