पहले किराया वसूला, अब बुलडोजर की तैयारी! सुभाष बाजार हादसे के बाद नगर निगम का यू-टर्न, व्यापारियों में आक्रोश

Agra Municipal Corporation: सुभाष बाजार हादसे के बाद नगर निगम द्वारा नाले पर बनी 70 साल पुरानी दुकानों को अतिक्रमण बताते हुए 3 दिन में खाली करने का नोटिस जारी करने पर लोगों ने आक्रोश व्यक्त किया है।
Agra Civic Body Issues Eviction Notices to Subhash Bazaar Shops After Tragic Collapse
आगरा नगर निगम (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Agra Municipal Corporation Encroachment Removal Drive: आगरा के सुभाष बाजार में हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब नगर निगम की कार्रवाई नए विवाद को जन्म दे रही है। कुछ दिन पहले दो मंजिला कपड़े की दुकान भरभराकर नाले में समा गई थी। हादसे के तुरंत बाद चलाए गए रेस्क्यू अभियान में चार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था, लेकिन सैंया निवासी गंगा देवी का कोई सुराग नहीं मिल पाया था। उनका शव छह दिन बाद आगरा फोर्ट के पीछे से बरामद हुआ, जिसके बाद पूरे शहर में घटना को लेकर आक्रोश फैल गया।

राजनीतिक दलों के नेताओं ने किया निरीक्षण

इस हादसे ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। घटना के बाद कई राजनीतिक दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने मौके का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी और पुलिस उपायुक्त ने भी घटनास्थल का दौरा कर मामले को संवेदनशील बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

रविवार को प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय भी घटनास्थल पर पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर नाले के ऊपर दुकानों का निर्माण किस आधार पर कराया गया, जबकि नियमों के अनुसार नाले पर किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस पूरे मामले में जो भी अधिकारी या कर्मचारी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नगर निगम ने दी बुलडोजर चलाए जाने की चेतावनी

अब नगर निगम ने सुभाष बाजार में नाले के ऊपर बनी दुकानों पर अतिक्रमण हटाने का नोटिस चस्पा कर दिया है। नोटिस में तीन दिन के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। समय सीमा समाप्त होने के बाद नगर निगम द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किए जाने और बुलडोजर चलाए जाने की चेतावनी भी दी गई है। निगम ने नोटिस में नाले को 60 से 70 वर्ष पुराना और जर्जर बताते हुए इसे जनसुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

नगर निगम पर लगे गंभीर आरोप

हालांकि व्यापारियों का कहना है कि जिन दुकानों को आज अवैध बताया जा रहा है, उनका निर्माण स्वयं नगर निगम ने कराया था। वर्षों से संपत्ति विभाग इन दुकानों का किराया वसूलता रहा है, जबकि अब अतिक्रमण विभाग इन्हें अवैध कब्जा बता रहा है। व्यापारियों का कहना है कि उनकी दुकानें 70 वर्ष से अधिक पुरानी हैं और उनका पूरा परिवार इन्हीं के सहारे चलता है। यदि दुकानें तोड़ दी गईं तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।

बाजार समिति के पदाधिकारियों ने भी नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस संबंध में लगातार नगर निगम अधिकारियों और महापौर से वार्ता चल रही थी, ऐसे में अचानक नोटिस जारी करना उचित नहीं है। फिलहाल नगर निगम की कार्रवाई के बाद व्यापारियों में भारी रोष है और सुभाष बाजार का मुद्दा शहर की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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