भाई ने कुर्बान किया करियर...छोड़ी नौकरी और बहन को बनाया स्टार, इमोशनल कर देगी दीप्ति शर्मा की कहानी

Deepti Sharma Journey: महिला वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में उत्तर प्रदेश के आगरा की ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने अहम भूमिका निभाई। हालांकि, क्रिकेटर बनने की उनकी कहानी बेहद दिलचस्प रही है।
Deepti Sharma
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा,( सोर्स- X/@BCCIWomen)
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ICC Women's World Cup 2025: मुंबई में रविवार, 2 नवंबर को खेले गए आईसीसी महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने साउथ अफ्रीका को हराकर इतिहास रचा। हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली टीम को चैंपियन बनने में उत्तर प्रदेश के आगरा की ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने अहम भूमिका निभाई। फाइनल मैच में उन्होंने अर्धशतक बनाया और शानदारी गेंदबाजी करते हुए 5 विकेट लिए। वह महिला या पुरुष वनडे वर्ल्ड कप में 20 से ज्यादा विकेट और 200 से ज्यादा रन बनाने वाली पहली क्रिकेटर बनीं।

महज 17 साल की उम्र में भारत के लिए डेब्यू करने वालीं दीप्ति के क्रिकेटर बनने की कहानी काफी दिलचस्प है। इसमें उनके भाई सुमित शर्मा का योगदान काफी बड़ा है, जिन्होंने दीप्ति को क्रिकेटर बनाने के लिए क्रिकेट ही नहीं नौकरी तक कि बलि दे दी। बहन को क्रिकेटर बनाने पर फोकस किया और परिवार को भी इसके लिए तैयार किया।

17 साल की उम्र में इंडिया के लिए डेब्यू

दीप्ति अपने भाई सुमित के साथ 8 साल की उम्र में भाई के साथ ट्रेनिंग के लिए एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम जाना शुरू कर दिया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिकेटर बनने की चाहत ने दीप्ति को अपने पिता से जिद करने पर मजबूर कर दिया कि सुमित उसे अपने साथ ट्रेनिंग पर ले जाए। नवंबर 2014 में जब दीप्ति 17 साल की थी तो उन्होंने इंडिया के लिए डेब्यू किया। तब तक उसने डोमेस्टिक क्रिकेट में कई ट्रॉफियां जीतीं, पहले यूपी और फिर बंगाल के लिए।

टीम इंडिया में जाने का बेहतर रास्ता

सुमित को पता था कि ऑलराउंडर बनना इंडियन टीम में जाने का सबसे बेहतर रास्ता है। यही वजह है कि दीप्ति जब यूपी के लिए पहली बार अंडर-19 में खेलीं तो उन्होंने मीडियम पेसर के तौर पर शुरुआत की, लेकिन फिर सुमित ने उन्हें स्पिनर बनाने का फैसला किया। वह चाहते थे कि दीप्ति टॉप ऑर्डर में बैटिंग करें। वह चोट का जोखिम नहीं लेना चाहते थे, जिससे तीनों में से किसी एक डिसिप्लिन पर असर पड़ सकता था। दीप्ति के सफर में एक अहम मोड़ पर सुमित को असल में अपने करियर के बारे में एक बड़ा फैसला लेना पड़ा। प्रोफेशनली उन्हें लगा कि क्रिकेट में उनका कोई भविष्य नहीं है, इसलिए उन्होंने एमबीए इस भरोसे के साथ किया कि कम से कम दीप्ति एक दिन भारत के लिए खेलेगी।

दीप्ति की क्रिकेट के लिए भाई ने छोड़ी नौकरी

सुमित ने कहा कि यह 2012-2013 के आस-पास मुझे एहसास हुआ कि अगर दीप्ति को यूपी से इंडिया तक आखिरी रुकावट पार करनी है तो उसे ट्रेनिंग में पूरी मेहनत करनी होगी। मैंने अपने पापा से कहा देखिए पापा मेरा पहले से ही नौकरी छोड़ने का प्लान था और अब मुझे लगता है कि दीप्ति खेल नहीं पा रही है। तो इससे मुझे और पक्का यकीन हो गया कि मुझे अपनी नौकरी छोड़नी होगी।

'जब दीप्ति खेलती है, तो मैं भी देश के लिए खेलता हूं'

इसके बाद सुमित ने घर के पास एक किराए की जगह पर पहले से ज्यादा कड़ी ट्रेनिंग की, जहां 35 साल के सुमित अब अपनी एकेडमी में कोचिंग देते हैं। परिवार में चौथे बेटे सुमित को वह सपोर्ट मिला जो वह चाहते थे। उन्होंने दीप्ति को इंडिया के लिए एक ऑलराउंडर के तौर पर खिलाने का अपना वादा पूरा किया, जिस पर टीम सभी फॉर्मेट में भरोसा कर सकती है। सुमित कहते हैं कि आज जब दीप्ति खेलती है, तो मैं उसके साथ इंडिया के लिए खेलता हूं।

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