

ICC Women's World Cup 2025: भारतीय टीम ने महिला विश्व कप 2025 का खिताब जीत लिया है। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने अपना पहला आईसीसी खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। 2005 और 2017 में इतिहास रचने से चूकी भारतीय टीम डीवाई पाटिल स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में नहीं चूकी और 52 रन से जीत दर्ज कर महिला वनडे क्रिकेट की नई विश्व चैंपियन बन गई।
विश्वकप में 215 रन बनाने के साथ-साथ 22 विकेट लेने वाली दीप्ति शर्मा को 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' के खिताब से नवाजा गया। खिताब मिलने के बाद दीप्ति ने कहा कि यह सचमुच एक सपने जैसा है, क्योंकि हम अभी तक इस जीत की भावना से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाए हैं। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है कि मैं विश्व कप फाइनल में इतना बड़ा योगदान दे पाई। हमने हमेशा हर मैच से सीखने और उसे अगले मैच में इस्तेमाल करने के बारे में सोचा है। लोगों के इस समर्थन के बिना यह संभव नहीं होता। टीम के तौर पर हम सब बहुत खुश हैं।
अपनी भूमिका पर बोलते हुए कहा कि मैं अपनी हर जिम्मेदारी का आनंद लेती हूँ, चाहे मैं किसी भी विभाग में हूँ या किसी भी स्थिति में। मैं हमेशा स्थिति के हिसाब से खेलना चाहती थी। ऑलराउंडर के रूप में इतना बड़ा प्रदर्शन करना, इससे बेहतर अनुभव कुछ नहीं हो सकता। सामने वाली टीम की बल्लेबाज लारा ने बहुत अच्छी पारी खेली, लेकिन हम हमेशा शांत रहे और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते रहे। एक गेंदबाजी टीम के रूप में, हमने तय किया था कि हम आखिरी गेंद तक अपनी सर्वश्रेष्ठ गेंद फेंकने पर ध्यान केंद्रित करेंगे, और हमने वही किया। 2017 से अब तक महिला क्रिकेट में बहुत बदलाव आया है। मैं उम्मीद करती हूँ कि अब हमारे लिए और भी ज़्यादा मैच आयोजित किए जाएंगे।
प्रतिका रावल के चोटिल होने के बाद टीम में शामिल शेफाली वर्मा ने फाइनल मैच में कमाल कर दिया। पहले बल्लेबाजी में 78 गेंदों पर शानदार 87 रनों की पारी खेली। फिर गेंदबाजी में 36 रन देकर 2 खिलाड़ियों को आउट किया और एक खिलाड़ी को रन आइट करने में खास भूमिका निभायी।
प्लेयर ऑफ द मैच बनने के बाद शेफाली ने कहा कि "मैंने शुरुआत में ही कहा था कि भगवान ने मुझे यहाँ कुछ अच्छा करने के लिए भेजा है, और आज वह बात सच हो गई। मैं बहुत खुश हूँ कि हम विश्व कप जीत गए, मैं इसे शब्दों में बता नहीं सकती। मैच मुश्किल था, लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था—कि अगर मैं शांत रह सकी, तो मैं कुछ भी हासिल कर सकती हूँ। मेरे माता-पिता, मेरे दोस्त, मेरा भाई—सभी ने मेरा बहुत समर्थन किया और मुझे यह समझने में मदद की कि कैसे खेलना है। यह मेरी टीम और मेरे लिए बहुत ज़रूरी था, और मैं बस अपनी टीम को जीताना चाहती थी।
आगे कहा कि मेरा दिमाग बिल्कुल साफ़ था, और मैंने अपनी योजनाओं पर काम किया। मैं बहुत खुश हूँ कि मैं उन्हें मैदान पर उतार सकी। स्मृति दी और हरमन दी, सभी सीनियर खिलाड़ी मेरा साथ दे रहे थे। उन्होंने मुझसे सिर्फ अपना स्वाभाविक खेल खेलने को कहा, और जब आपको इतनी स्पष्टता मिल जाती है, तो बस वही काफी होता है। यह मेरे लिए एक बहुत यादगार पल है। जब मैंने सचिन तेंदुलकर सर को देखा, तो मुझे ज़बरदस्त उत्साह मिला। मैं उनसे लगातार बात करती रहती हूँ, और वह हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते हैं। वह क्रिकेट के मास्टर हैं, और सिर्फ उन्हें देखकर भी हमें प्रेरणा मिलती रहती है।"