
Story of Draupadi (Source. Pinterest)
The Secret of Draupadi Marriage with Pandavas: द्रौपदी पांचों पांडवों की रानी थीं। उनकी सुंदरता, तेज और विद्वता के किस्से तो प्रसिद्ध हैं, लेकिन द्रौपदी की असली पहचान एक साहसी और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाली स्त्री के रूप में है। वह अत्याचार सहकर चुप रहने वालों में से नहीं थीं। द्रौपदी के जीवन से जुड़ी कई ऐसी कहानियां हैं, जो आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं।
अक्सर माना जाता है कि द्रौपदी संयोगवश पांचों पांडवों की पत्नी बनीं, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा गहरी है। श्रीकृष्ण ने स्वयं द्रौपदी को बताया था कि यह सब पूर्व जन्म के वरदान का परिणाम था। अपने पूर्व जन्म में द्रौपदी नल और दमयंती की पुत्री नलयनी थीं।
पूर्व जन्म में द्रौपदी ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उन्होंने शिव से ऐसे वर की कामना की, जिसमें कुल 14 श्रेष्ठ गुण हों। भगवान शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न तो हुए, लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि किसी एक मनुष्य में इतने गुणों का एक साथ होना संभव नहीं है। फिर भी द्रौपदी अपनी इच्छा पर अडिग रहीं।
तब भगवान शिव ने वरदान दिया कि अगले जन्म में उसे 14 पतियों के रूप में मनचाहा वर प्राप्त होगा। यही कारण था कि द्रौपदी ने बाद में पूछा “यह वरदान है या अभिशाप?” इस पर भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि वह हर दिन स्नान के बाद पुनः पवित्र हो जाएंगी।
द्रौपदी जिन 14 गुणों की कामना कर रही थीं, वे सभी पांचों पांडवों में सामूहिक रूप से मौजूद थे।
इस तरह पांचों पांडव मिलकर द्रौपदी की तपस्या का फल बने।
द्रौपदी ने पांचों पांडवों से विवाह से पहले शर्त रखी थी कि वे किसी अन्य स्त्री के साथ गृहस्थी साझा नहीं करेंगी। इंद्रप्रस्थ में यह नियम निभाया भी गया। बाद में अर्जुन ने श्रीकृष्ण की सलाह और द्रौपदी की सहमति से सुभद्रा से विवाह किया।
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शिव पुराण के अनुसार, द्रौपदी को चीरहरण से बचाने का श्रेय दुर्वासा ऋषि के वरदान को भी दिया जाता है। वहीं, अपमान के बाद द्रौपदी ने धृतराष्ट्र और विराट जैसे राजाओं से सीधे न्याय मांगा। उन्होंने भीष्म, द्रोण और अपने पतियों तक को अन्याय पर मौन रहने के लिए धिक्कारा।
द्रौपदी केवल महाभारत की पात्र नहीं, बल्कि नारी सम्मान और साहस की प्रतीक हैं। उनका जीवन आज भी अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है।






