
दीनानाथ मंगेशकर हॉस्पिटल (सौ. सोशल मीडिया )
Dinanath Mangeshkar Hospital Case: गर्भवती महिला तनिषा भिसे को समय पर चिकित्सा उपचार और एम्बुलेंस सुविधा न दिए जाने के मामले में पुणे धर्मादाय आयुक्त कार्यालय ने दीनानाथ मंगेशकर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर को दोषी ठहराया है।
यह फैसला पुणे के धर्मादाय आयुक्त कार्यालय के इतिहास में पहली बार किसी प्रतिष्ठित धर्मादाय अस्पताल के खिलाफ दिया गया कठोर निर्णय माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष अप्रैल में गंभीर अवस्था में अस्पताल लाई गई गर्भवती तनिषा भिसे से इलाज शुरू करने से पहले 10 लाख रुपये की अग्रिम राशि जमा करने की मांग की गई थी। आरोप है कि इसी कारण इलाज में देरी हुई और समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी, जिससे महिला की मृत्यु हो गई।
धर्मादाय आयुक्त कार्यालय की जांच में अस्पताल संचालन से जुड़े ट्रस्ट के 11 सदस्यों को दोषी माना गया है। इनमें मंगेशकर परिवार के सदस्य, वरिष्ठ डॉक्टर, प्रशासनिक अधिकारी और कानूनी सलाहकार शामिल हैं। सभी पर सेवा भावना के विरुद्ध आचरण का आरोप लगाया गया है।
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इस फैसले को राज्य के सभी धर्मादाय अस्पतालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आपातकालीन परिस्थितियों में मरीज की जान सर्वोपरि होती है और आर्थिक शर्तें सेवा के मार्ग में बाधा नहीं बननी चाहिए।






