इंदौर जैसी त्रासदी का इंतजार कर रही मनपा? नागपुर की पाइपलाइनों में रिस रहा है 'सीवर का जहर'!

Nagpur Municipal Corporation: इंदौर त्रासदी के बाद नागपुर में दूषित पानी का डर। महल और गोपाल नगर में सीवर और पेयजल पाइपलाइनें आपस में मिलीं। क्या मनपा किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है?
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नागपुर में सीवेज पानी का रिसाव (सौजन्य-नवभारत)
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Nagpur Polluted Water Supply News: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 15 लोगों की मौत और 200 से अधिक लोगों के आईसीयू में भर्ती होने की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस त्रासदी के बाद गुजरात की राजधानी गांधीनगर और आईटी सिटी बेंगलुरु में भी जल प्रदूषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। दोनों शहरों में पीने के पानी की पाइपलाइनों में गटर का पानी मिलने से हजारों लोगों की सेहत दांव पर लगी हुई है।

गत समय में सिटी में भी इस तरह से दूषित जलापूर्ति के कई उदाहरण उजागर हुए थे। हालांकि जनता के रोष के बाद इसमें कमी आने का दावा तो किया जा रहा है, किंतु महल में मलजल वाहिनियों के साथ ही पेयजल वाहिनी होने तथा सीवरेज का चैंबर खुला होने का नजारा देखने को मिला। हालांकि इस हादसे के तुरंत बाद अब जागी मनपा ने इसे बंद कर दिया है।

गोपाल नगर का कुआं प्रदूषित

बताया जाता है कि गोपाल नगर दूसरे बस स्टॉप के पास स्थित आष्टनकर के घर के बाजू में एक फ्लैट स्कीम के कुएं में गटर का पानी आ रहा है। इसे लेकर कई बार शिकायत भी की गई किंतु मनपा की ओर से इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। अब हादसे के बाद से स्थानीय लोगों में चिंता की लकीरें हैं।

गांधीनगर मामले में जांच में प्रशासन की भारी लापरवाही उजागर हुई है। 257 करोड़ रुपये के 24×7 जलापूर्ति प्रोजेक्ट के तहत बिछाई गईं पीने के पानी की लाइनें सीवर लाइनों के साथ सटाकर बिछाई गई थीं। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पाइपों में प्रेशर बढ़ने पर वे फट गए और सीवेज का पानी रिसने लगा। अब तक ऐसे 7 लीकेज पॉइंट मिल चुके हैं।

इंदौर की घटना से बढ़ा खौफ

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में हुईं मौतों के बाद से अन्य शहरों में भी प्रशासन के खिलाफ गुस्सा है। भोपाल में लोगों ने मोमबत्ती जलाकर इंदौर के मृतकों को श्रद्धांजलि दी और प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाए। इन शहरों की जलापूर्ति व्यवस्था उस 'टाइम बम' की तरह हो गई है।

जहां बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) की इंजीनियरिंग में हुई छोटी सी चूक अब लोगों की जान की दुश्मन बन गई है। पाइपलाइनों का आपस में मिलना जीवनदायी पानी को धीरे-धीरे जहर में बदल रहा है। यहां भी मनपा प्रशासन को सतर्क होने की जरूरत है।

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