
पीएम नरेंद्र मोदी और अश्विनी वैष्णव (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Prepaid Auto Booth Controversy: मध्य रेल, नागपुर मंडल की ओर से आदेश जारी किया गया कि स्टेशन के पश्चिमी परिसर में चलाया जा रहा प्रीपेड आटो रिक्शा बूथ अवैध है और 7 दिन के भीतर ही इसे हटा दिया जाये। आदेश के करीब 20 दिन बाद मंडल प्रबंधन ने शनिवार रात 12.00 बजे सील करने की तैयारी भी कर ली।
विरोध की स्थिति को देखते हुए रेलवे सुरक्षा बल को सूचित भी कर दिया गया। हालांकि इस पूरे ड्रामा का अंत मंडल प्रबंधन के नतमस्तक होने के साथ पूरा हुआ। जैसा कहा जा रहा था, वैसा ही साबित हुआ। पता चला कि अपर मंडल रेल प्रबंधक के सामने एक राजनीतिक हस्ती खड़ी हो गई और एक्शन पर रोक लग गई।
उल्लेखनीय है कि मंडल प्रबंधन की ओर से 18 दिसंबर को प्रीपेड बूथ को अवैध घोषित करते हुए 7 दिन के भीतर सील कार्रवाई का आदेश जारी किया था। खास बात है कि इस आदेश से पहले भी समिति ने कई बार मंडल प्रबंधन को ठेंगा दिखाते हुए नोटिसों के जवाब नहीं दिये थे। अंत में अवैध घोषित होने पर कथित समिति ने 31 दिसंबर को जवाब दिया।
इसके बाद भी मंडल प्रबंधन ने टीन के घेराव और ताला-चाबी के साथ सील करने की पूरी तैयारी कर ली। फिर अचानक एक नेता की पैराशूट इंट्री हुई और मंडल प्रबंधन बैकफुट पर आ गया। टीन, ताला-चाबी, नियम-कानून, वैध-अवैध सब धरे के धरे रहे गये।
यह भी पढ़ें – 1 करोड़ लो, सीट छोड़ो…धुले में करोड़ों का खेल! शिंदे सेना के प्रत्याशी को BJP का ऑफर, VIDEO वायरल
इस पूरे ड्रामे ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व वाली भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्न चिह्न लगा दिया है। पहले सीलिंग का आदेश और फिर नेतागीरी के दबाव में कार्रवाई पर रोक से पूरे देश में संदेश गया है कि रेलवे में ‘अवैध भी मान्य’ है। इससे पहले भी प्रीपेड आटो रिक्शा के ठिकानों पर गांजे का सेवन जैसी घटनायें सामने आती रही है।
अखबारों में तस्वीरें भी सामने आई, लेकिन मजाल है कि इस अवैध काम को भी डंके की चोट पर होने दिया जाता रहा है। और अब मंडल प्रबंधन का अपने ही अवैध वाले आदेश पर सील की कार्रवाई से पैर पीछे लेना, यह बताने का काफी है कि रेलवे में नियम-कानून, वैध-अवैध से ज्यादा नेतागीरी चलती है।






