
सीएम योगी आदित्यनाथ, फोटो- सोशल मीडिया
Yogi ki Paati: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘योगी की पाती’ के माध्यम से जनता को संबोधित करते हुए ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर अपराधों के प्रति आगाह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है और जागरूकता ही इस खतरे से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक महत्वपूर्ण संदेश साझा करते हुए बताया कि मोबाइल और कंप्यूटर ने जीवन को सुगम तो बनाया है, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी की चुनौतियां भी काफी बढ़ गई हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि देश के किसी भी कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।
अपराधी अक्सर ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे भ्रामक शब्दों का प्रयोग करके निर्दोष नागरिकों को डराते-धमकाते हैं और उनसे पैसे वसूलने का प्रयास करते हैं। मुख्यमंत्री ने जनता को भरोसा दिलाया कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस कभी भी वीडियो कॉल, वॉट्सऐप या अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसों की मांग करती है।
सीएम योगी ने डिजिटल दुनिया में अपनी गतिविधियों को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि जो तस्वीरें, वीडियो या लोकेशन लोग सार्वजनिक रूप से साझा करते हैं, अपराधी उन्हीं के माध्यम से सूचनाएं जुटाते हैं। बाद में इन्हीं जानकारियों का उपयोग वे आपको शिकार बनाने के लिए करते हैं। अपनी व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी (OTP) किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें, क्योंकि यही आपकी सुरक्षा की पहली सीढ़ी है।
2017 से पूर्व की स्थिति और वर्तमान की तुलना करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पहले राज्य में केवल 2 साइबर क्राइम थाने थे। आज प्रदेश सरकार के प्रयासों से सभी 75 जनपदों में साइबर क्राइम थाने क्रियाशील हैं। इसके साथ ही हर जनपद के स्थानीय थानों में ‘साइबर हेल्प डेस्क’ की स्थापना की गई है ताकि आम जनता को तुरंत मदद मिल सके। सरकार साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए निरंतर महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी सावधानी के बावजूद कोई व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार हो जाता है, तो उसे बिना देरी किए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट करनी चाहिए। सूचना जितनी जल्दी दी जाएगी, बचाव और रिकवरी की संभावना उतनी ही अधिक होगी। उन्होंने विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक करने पर जोर दिया ताकि एक सुरक्षित और साइबर अपराध-मुक्त उत्तर प्रदेश का निर्माण किया जा सके।






