
उदय सामंत और अजित पवार (सौ. सोशल मीडिया )
Industry Minister Uday Samant Statement On Ajit Pawar: उद्योग मंत्री और शिवसेना के वरिष्ठ नेता उदय सामंत ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर तीखा तंज कसा है।
अजित पवार द्वारा हाल ही में भाजपा की आलोचना किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए सामंत ने कहा कि शिवसेना के उम्मीदवारों को किसी पर टीका-टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि विरोधियों की कमियां गिनाने का काम खुद अजित पवार बखूबी पूरा कर रहे हैं।
उन्होंने पुणे के चुनावी माहौल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यहां ‘शिवशक्ति बनाम धनशक्ति’ के बीच मुकाबला है और हमारे सामने मौजूद धनशक्ति के बावजूद हम किसी पार्टी विशेष का नाम लिए बिना अपने संघर्ष के दम पर आगे बढ़ेंगे।
उदय सामंत ने गर्व के साथ कहा कि इतिहास में यह पहली बार है जब शिवसेना पुणे में 120 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है। उन्होंने याद दिलाया कि पुणे शहर शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे का बेहद प्रिय था। सामंत ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे एकनाथ शिंदे द्वारा किए गए विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाएं और विकास के मुद्दे को लेकर ही आगे बढ़ें।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक ही सीमित रह गए हैं, लेकिन हमें घर-घर जाकर लोगों से तीन-चार बार संपर्क करना है। युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए सामंत ने अपना उदाहरण दिया और बताया कि 2004 में जब वे पहली बार युवा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े थे, तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन आज वे पांच बार के विधायक हैं।
इससे यह स्पष्ट होता है कि जनता हमेशा ऊर्जावान और मेहनती युवाओं का साथ देती है। उन्होंने विश्वास जताया कि पुणे में फिलहाल शिवसेना के पक्ष में सकारात्मक माहौल है और जनता का आशीर्वाद पार्टी को जरूर मिलेगा।
महाराष्ट्र के मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने रविवार को उपमुख्यमंत्री अजित पवार को सलाह दी कि वे निकाय चुनाव प्रचार अभियान के दौरान सहयोगियों को निशाना न बनाएं अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, भाजपा और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना राज्य में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का हिस्सा हैं।
हालांकि 15 जनवरी को होने वाले चुनाव में वे 29 नगर निगमों से कुछ में अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं। पवार ने शुक्रवार और शनिवार को अपने संवाददाता सम्मेलन में पुणे और पिंपरी चिंचवड़ के नगर निकायों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का आरोप लगाया था, जिनमें से दोनों पर प्रशासकों की नियुक्ति से पहले 2017 से 2022 के बीच भाजपा का शासन था।
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उन्होंने राज्य के दूसरे सबसे बड़े शहर पुणे के “पटरी से उत्तरे विकास’ के लिए नगर निकाय के नेतृत्व (परोक्ष तौर पर भारतीय जनता पार्टी की ओर इशारा करते हुए) को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने यह भी कहा था कि पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद पिंपरी-चिंचवड कर्ज में डूब गया है।






