Kailash Vijayvargiya: इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों ने अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सिस्टम फेलियर की गंभीर तस्वीर सामने रख दी है। भागीरथपुरा इलाके में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 200 मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। इस पूरे मामले में नगर निगम, प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच वर्चस्व की खींचतान का असर प्रशासनिक फैसलों पर पड़ा। जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ फाइलें दबाने का मामला नहीं, बल्कि टेंडर, वर्क ऑर्डर और कथित 20 प्रतिशत “सुविधा शुल्क” से जुड़ा कमर्शियल एंगल भी है। ठेकेदारों का आरोप है कि बिना तय हिस्सेदारी दिए काम आगे नहीं बढ़ता।
Kailash Vijayvargiya: इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों ने अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सिस्टम फेलियर की गंभीर तस्वीर सामने रख दी है। भागीरथपुरा इलाके में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 200 मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। इस पूरे मामले में नगर निगम, प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच वर्चस्व की खींचतान का असर प्रशासनिक फैसलों पर पड़ा। जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ फाइलें दबाने का मामला नहीं, बल्कि टेंडर, वर्क ऑर्डर और कथित 20 प्रतिशत “सुविधा शुल्क” से जुड़ा कमर्शियल एंगल भी है। ठेकेदारों का आरोप है कि बिना तय हिस्सेदारी दिए काम आगे नहीं बढ़ता।






