
नासिक में दिन सियासी ड्रामे का दृश्य (फोटो नवभारत)
Nashik Municipal Election News: नासिक महानगरपालिका चुनाव के लिए नामांकन वापसी का अंतिम दिन किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं रहा। 122 सीटों पर होने वाले इस चुनावी महादंगल की तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो चुकी है। नामांकन केंद्रों पर शुक्रवार को सुबह से ही भारी गहमागहमी रही, जहाँ कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल दिखा। मान-मनौवल, सौदेबाजी और ऐन वक्त पर पलटे गए फैसलों ने नासिक की राजनीति में नया रोमांच भर दिया है।
5 मिनट में पलटा फैसला नामांकन वापसी के दौरान सबसे दिलचस्प वाकया प्रभाग क्रमांक 14 के निर्वाचन केंद्र पर हुआ। यहाँ एक दंपत्ति ने चुनावी मैदान में ताल ठोंकी थी। पत्नी ने योजना के अनुसार अपना नाम वापस ले लिया, लेकिन जैसे ही उसका पति अपना नामांकन वापस लेने काउंटर पर पहुँचा, वहाँ एक फिल्मी दृश्य खड़ा हो गया। नामांकन वापसी की समय सीमा खत्म होने में मात्र पाँच मिनट बचे थे, तभी पत्नी ने केंद्र के भीतर पहुँचकर पति को पर्चा वापस लेने से रोक दिया। पत्नी ने सरेआम पति को खींचकर केंद्र से बाहर निकाल लिया। समय समाप्त होने के कारण अब पति को न चाहते हुए भी चुनावी मैदान में उतरना पड़ेगा।
नासिक शहर के राजनीतिक गलियारों में नामांकन वापसी को लेकर ‘लेन-देन’ की चर्चाएं भी आम रहीं। सूत्रों के अनुसार, कई निर्दलीय और बागी उम्मीदवारों को बैठाने के लिए बड़ी नकद राशि और भविष्य में पदों का प्रलोभन दिया गया। कई बागियों ने तर्क दिया कि उन्होंने चुनाव की तैयारी में लाखों खर्च किए हैं, जिसकी भरपाई के बिना वे पीछे नहीं हटेंगे। चर्चा है कि हर प्रभाग में ‘सेटलमेंट’ की दर अलग-अलग रही, जिससे कई दिग्गज उम्मीदवारों की राह आसान हुई है, तो कई जगह त्रिकोणीय मुकाबले ने सिरदर्द बढ़ा दिया है।
नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद अब प्रशासनिक अमला शनिवार को सभी वैध उम्मीदवारों को आधिकारिक चुनाव चिन्ह (Election Symbols) आवंटित करेगा। चुनाव चिन्ह मिलते ही शहर में सोशल मीडिया पर विज्ञापनों की बाढ़ और गलियों में पोस्टरों का शोर शुरू हो जाएगा। राजनीतिक पंडितों की मानें तो आने वाला रविवार चुनाव का पहला ‘सुपर संडे’ होगा। इस दिन बड़े नेताओं की जनसभाएं, रैलियां और घर-घर जनसंपर्क के जरिए माहौल को पूरी तरह चुनावी रंग में रंगने की तैयारी है।
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नामांकन वापसी के बाद अब 122 सीटों पर वास्तविक उम्मीदवारों की सूची तय हो गई है। कई वार्डों में भाजपा, शिवसेना (दोनों गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है, तो कहीं निर्दलीयों ने समीकरणों को पेचीदा बना दिया है। नासिक की जनता अब विकास के वादों और राजनीतिक ड्रामे के बीच अपना निर्णायक मत देने के लिए तैयार है।






