वार्ड 5 में मुकाबला दिलचस्प, मुर्तडक मैदान में, भाजपा से नाराजगी; शिंदे सेना का दामन थामा

BJP Ticket: नासिक पंचवटी डिवीजन के वार्ड 5 में पूर्व मेयर अशोक मुर्तडक ने भाजपा से निराश होकर शिंदे सेना का दामन थाम लिया और अब अधिकृत उम्मीदवार बन गए हैं।
The contest in Ward 5 is interesting; Murtadak is in the fray, facing resentment from the BJP; he has joined the Shinde faction of the Shiv Sena
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nashik Municipal Election: नासिक पंचवटी डिवीजन के वार्ड नंबर 5 में चल रहे हाई वोल्टेज ड्रामे का अंत पूर्व मेयर अशोक मुर्तडक के शिंदे सेना में शामिल होने के साथ हुआ है।

मुर्तडक, जो पिछले कई दिनों से भाजपा के टिकट का इंतजार कर रहे थे, अब शिंदे सेना के पुरस्कृत उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर चुके हैं। भाजपा द्वारा उनकी उम्मीदवारी खारिज किए जाने के बाद शिंदे सेना ने उन्हें अपना समर्थन देकर चुनावी जंग को और भी रोचक बना दिया है।

पंचवटी में नाम वापसी का महा-ड्रामा

नामांकन वापस लेने के आखिरी दिन पंचवटी डिवीजन में बड़े पैमाने पर उथल-पुथल देखी गई। पंचवटी क्षेत्र से कुल 120 उम्मीदवारों ने अपने आवेदन वापस ले लिए हैं।

नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब पंचवटी में कुल 272 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनमें विभिन्न पार्टियों के आधिकारिक प्रत्याशी और निर्दलीय शामिल हैं।

कई उम्मीदवारों ने नामांकन रद्द होने के डर से अपने परिवार के सदस्यों के नाम से भी आवेदन किए थे, जिन्हें आखिरी दिन वापस ले लिया गया, कई मौजूदा और पूर्व पार्षदों ने इस बार चुनावी मैदान से हटने का फैसला किया है।

मुर्तडक की नई पारी और भाजपा की चुनौती

वार्ड नंबर 6 (डी) से उद्धव सेना के उम्मीदवार सुरेश पिंगले ने अपना नाम चापस ले लिया है। वार्ड नंबर 5 (बी) से कविता आव्हाड ने अपना नामांकन वापस लिया। शीतल मालोदे, जयश्री धनवटे, उल्हास धनवटे, हरिभाऊ लासुरे और संजय पाटिल जैसे दिग्गज नेताओं ने भी मैदान से हटने का निर्णय लिया है। अशोक मुर्तडक ने पहले निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी अपना पर्चा भरा था, लेकिन शिंदे सेना का साथ मिलने के बाद अब वे एक नई मजबूती के साथ वार्ड 5 में भाजपा को चुनौती देंगे।

पंचवटी में हुई इस बगावत और गठबंधन के अदल-बदल ने भाजपा के इस गढ़ में चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपने पुराने वफादार के बागी होने का मुकाबला कैसे करती है और मतदाता किस पर अपना भरोसा जताते हैं।

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