
स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स (सोर्स-सोशल मीडिया)
Fixed Deposit vs PPF NSC Returns: सुरक्षित निवेश और निश्चित रिटर्न चाहने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और सरकारी छोटी बचत योजनाएं हमेशा से ही पहली पसंद रही हैं। साल 2026 की पहली तिमाही में सरकार द्वारा छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले ने निवेशकों को तुलना करने का एक नया अवसर दिया है। बैंक एफडी जहां अपनी तरलता और सुलभता के लिए जानी जाती है, वहीं पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि जैसी योजनाएं हाई ब्याज और टैक्स लाभ का वादा करती हैं। इस आर्टिकल से समझिये कि आपकी वित्तीय स्थिति और भविष्य के लक्ष्यों के लिए इनमें से कौन सा रास्ता चुनना सबसे समझदारी भरा निर्णय साबित होगा।
जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही के लिए सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2% और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना पर भी 8.2% की आकर्षक दरें बरकरार रखी हैं। इसके मुकाबले अधिकांश प्रमुख कमर्शियल बैंक अपनी एफडी पर 6% से 7.25% के बीच ही ब्याज दे रहे हैं। अगर आपका मुख्य उद्देश्य केवल अधिकतम ब्याज प्राप्त करना है, तो सरकारी छोटी बचत योजनाएं स्पष्ट रूप से बैंक एफडी से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
बैंक एफडी की सबसे बड़ी मजबूती इसकी लिक्विडिटी यानी जरूरत पड़ने पर पैसों की तत्काल उपलब्धता है, जिसे मामूली पेनल्टी के साथ कभी भी निकाला जा सकता है। इसके विपरीत, पीपीएफ (15 साल) और एनएससी (5 साल) जैसी योजनाओं में पैसा एक लंबी अवधि के लिए लॉक हो जाता है। इसलिए, आपातकालीन फंड के लिए एफडी एक बेहतर विकल्प है, जबकि लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए सरकारी स्कीम्स ज्यादा प्रभावी हैं।
स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स में पीपीएफ जैसी योजनाएं ‘E-E-E’ श्रेणी में आती हैं, जहां निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों ही टैक्स-फ्री होती हैं। बैंक एफडी पर मिलने वाला ब्याज आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होता है, जो अधिक आय वाले निवेशकों के लिए वास्तविक रिटर्न को कम कर देता है। टैक्स बचाने की दृष्टि से सरकारी बचत योजनाएं बैंक एफडी के मुकाबले कहीं अधिक फायदेमंद और सुरक्षित साबित होती हैं।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए SCSS (8.2%) सबसे बेहतरीन मासिक आय योजना है, जो बैंकों की सीनियर सिटीजन एफडी से भी बेहतर दर प्रदान करती है। इसी तरह, बेटियों के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) में मिलने वाला चक्रवृद्धि ब्याज किसी भी अन्य फिक्स्ड रिटर्न वाली स्कीम से बहुत ज्यादा है। इन विशेष वर्गों के लिए बैंक एफडी के बजाय इन सरकारी योजनाओं में निवेश करना वित्तीय रूप से ज्यादा समझदारी का काम है।
बैंक एफडी में केवल 5 लाख रुपये तक की जमा राशि ही DICGC द्वारा बीमित होती है, जो सुरक्षा का एक सीमित दायरा प्रदान करती है। छोटी बचत योजनाएं सीधे केंद्र सरकार की संप्रभु गारंटी (Sovereign Guarantee) के साथ आती हैं, जो उन्हें पूरी तरह से जोखिम मुक्त बनाती हैं। बड़े निवेश के मामले में सरकारी स्कीम्स बैंक के मुकाबले मानसिक शांति और पूंजी की पूर्ण सुरक्षा का अतिरिक्त लाभ प्रदान करती हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को अपना सारा पैसा किसी एक जगह लगाने के बजाय दोनों विकल्पों में बांटकर निवेश करना चाहिए। शॉर्ट-टर्म जरूरतों के लिए एफडी और रिटायरमेंट या बच्चों की शिक्षा जैसे लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों के लिए पीपीएफ या एनएससी का चयन करें। यह रणनीति आपको लिक्विडिटी भी प्रदान करेगी और पोर्टफोलियो के कुल रिटर्न को बैंकों की तुलना में काफी बेहतर बनाने में सक्षम होगी।






