
प्रदीप चौबे (सौ. सोशल मीडिया )
Pradeep Choubey Election Campaign: मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव की तारीखों के नजदीक आते ही विभिन्न वार्डों में सियासी हलचल तेज हो गई है।
दहिसर का वार्ड क्रमांक 3 इस समय चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जहाँ कांग्रेस पार्टी ने अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।गौरतलब है कि वर्ष 2002 से 2017 तक यह वार्ड कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता था।
अब कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप चौबे एक बार फिर इस पारंपरिक गढ़ को अपने पाले में लाने के उद्देश्य से जनसंपर्क और पदयात्राओं के जरिए मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं।
प्रदीप चौबे के प्रचार अभियान का मुख्य केंद्र वार्ड की वे समस्याएं हैं जो पिछले कई वर्षों से अनसुलझी हैं। चौबे का आरोप है कि 2017 के बाद से इस क्षेत्र में विकास की गति पूरी तरह ठप हो गई है। उन्होंने महायुति सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि विकास के बड़े-बड़े दावे केवल कागजों तक सीमित रहे हैं। उनके अनुसार, वार्ड के वन विभाग क्षेत्र में रहने वाले हजारों नागरिक आज भी स्वच्छ पेयजल, पक्की सड़कों और सार्वजनिक शौचालयों जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
चुनावी जनसभाओं के दौरान प्रदीप चौबे ने दावा किया कि वर्तमान सत्ता पक्ष ने जनता को केवल गुमराह करने का काम किया है। उन्होंने मतदाताओं से संवाद करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में जो विकास कार्य शुरू हुए थे, उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। चौबे ने संकल्प दोहराया कि यदि जनता उन्हें मौका देती है, तो वे प्राथमिकता के आधार पर वन विभाग क्षेत्र की नागरिक समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित करेंगे।
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प्रदीप चौबे का दावा है कि उन्हें क्षेत्र की जनता का भरपूर प्यार और सकारात्मक रिजल्ट मिल रहा है। स्थानीय लोग परिवर्तन की बात कर रहे हैं, जिससे कांग्रेस खेमे में उत्साह का माहौल है। हालांकि, मुंबई कांग्रेस की राजनीति की बिसात पर मतदाता किस पर भरोसा जताएंगे, इसका फैसला तो मतदान के दिन ही होगा। दहिसर वार्ड 3 का चुनावी नतीजा यह तय करेगा कि क्या कांग्रेस अपने इस पुराने गढ़ में वापसी कर पाएगी या नहीं।






