धुलिया बनी अवैध धंधों की नगरी, NCP का दावा- 367 अड्डों पर चल रहा कारोबार, 180 सट्टा केंद्र

Nashik Crime News: धुलिया शहर अपराधियों के लिए 'स्वर्ग' और गरीब जनता के लिए 'नरक' बन चुका है। यह आरोप लगाते हुए राष्ट्रवादी शरद पवार गुट ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा खुलासा किया।
सरेआम बिक रहे देसी कट्टे
सरेआम बिक रहे देसी कट्टे (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Nashik District: धुलिया शहर अपराधियों के लिए 'स्वर्ग' और गरीब जनता के लिए 'नरक' बन चुका है। यह आरोप लगाते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा खुलासा किया कि शहर में 367 से अधिक जगहों पर अवैध धंधे धड़ल्ले से चल रहे हैं। पार्टी ने सबसे गंभीर आरोप यह लगाया है कि पुलिस और कुछ अधिकारी ही इन धंधों को संरक्षण दे रहे हैं।

स्कूल-कॉलेजों तक पहुंचे हथियार, बिगड़ रहा है माहौलः पार्टी के शहर जिलाध्यक्ष रणजीत राजे भोसले ने बताया कि सट्टा-मटका से लेकर गांजा-गुटखा, अवैध गैस से लेकर बनावटी शराब और देह व्यापार तक का जाल फैला हुआ है। इन धंधों ने धुलिया का माहौल पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। आए दिन झगड़े, लूट, हत्या और डकैती की वारदातें बढ़ रही हैं। भोसले के अनुसार, हालात इतने खतरनाक हो चुके हैं कि देसी कट्टे, पिस्तौल और तलवारें अब स्कूल-कॉलेज के छात्रों तक पहुँच गई हैं। उन्होंने कहा, "यह स्थिति बेहद खतरनाक है। जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, वहाँ अब हथियार हैं।"

NCP की सीधी चेतावनी, सीधे मुख्यमंत्री से मिलेंगे

NCP नेता ने चेतावनी दी कि अगर पुलिस ने अब भी छापे मारकर यह गोरखधंधा बंद नहीं किया और हथियार जब्त नहीं किए, तो पार्टी का एक शिष्टमंडल सीधे मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। उन्होंने दो टूक कहा, "हम सारे सबूत मुख्यमंत्री को सौंपेंगे, अगर कार्रवाई नहीं हुई तो सड़का पर आंदोलन ही आखिरी रास्ता होगा।"

शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भोसले ने धंधों की पूरी सूची रखी। उनके मुताबिक, 180 सट्टा केंद्र, 30 गांजा बिक्री केंद्र, 22 जुआ अड्डे, 20 अवैध गैस आपूर्ति केंद्र, 12 रेत तस्करी, 10 मटका और गुटखा बिक्री केंद्र, और 2 वेश्यावृत्ति केंद्र सहित अन्य धंधे पुलिस के आशीर्वाद से बेखौफ चल रहे हैं।जिलाध्यक्ष रणजीत राजे भोसले ने आरोप लगाया कि 5 मई को पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत और जून में मुलाकात के दौरान सबूत सौंपे गए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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