महाराष्ट्र शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे का विरोध, किसानों ने खून से लिखा पत्र, सामूहिक आत्महत्या की मांगी अनुमति

Maharashtra Shaktipith Expressway: नांदेड़ जिले में किसानों ने नागपुर–गोवा महाराष्ट्र शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के विरोध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खून से पत्र लिखकर परियोजना रद्द करने की मांग की।
Maharashtra Shaktipith Expressway
Maharashtra Shaktipith Expressway: नांदेड़ जिले में किसान (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Nanded Farmers Protest: महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के कुछ हिस्सों में किसानों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अपने खून से पत्र लिखकर प्रस्तावित नागपुर–गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे को रद्द करने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि परियोजना रद्द नहीं की गई तो उन्हें “सामूहिक रूप से मरने” की अनुमति दी जाए। अर्धापुर और मालेगांव क्षेत्रों के किसानों ने गुरुवार को मुख्यमंत्री को यह पत्र भेजा। इस ज्ञापन पर 200 से अधिक प्रभावित किसानों के हस्ताक्षर हैं।

इसमें परियोजना के विरोध के लिए गठित कार्यसमिति ‘शक्तिपीठ हाईवे विरोधी कृति समिति’ के समन्वयक सुभाष मोरलवार और सतीश कुलकर्णी के नाम भी शामिल हैं। पत्र में कहा गया है कि प्रस्तावित राजमार्ग के कारण अत्यधिक उपजाऊ और सिंचित कृषि भूमि नष्ट हो जाएगी, जहां केले और हल्दी जैसी फसलें उगाई जाती हैं, जिन्हें सीधे विदेशों में निर्यात किया जाता है। यह भूमि लोअर और अपर पैनगंगा सिंचाई परियोजनाओं के लाभ क्षेत्र में आती है।

परियोजना रद्द करने की मांग

‘शक्तिपीठ हाईवे विरोधी कृति समिति’ ने सरकार के “दोहरे मापदंड” पर सवाल उठाते हुए कहा कि या तो इस परियोजना को रद्द किया जाए या प्रभावित किसानों को सामूहिक आत्महत्या करने का विकल्प दिया जाए। मोरेलवार और कुलकर्णी ने बताया कि सरकार ने हाल ही में विधानसभा में संकेत दिया है कि समानांतर मार्गों की उपलब्धता के कारण सोलापुर, सांगली और कोल्हापुर जिलों में राजमार्ग के संरेखण में बदलाव किया जा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह तर्क वहां लागू होता है, तो नांदेड़ में इसकी अनदेखी क्यों की जा रही है।

आंदोलन और तेज किया जाएगा

उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग 361 (नागपुर-रत्नागिरी) पहले से ही उनके क्षेत्र से मात्र तीन से आठ किलोमीटर की दूरी से गुजरता है। किसानों ने पूछा, “हमारी उपजाऊ भूमि को ही क्यों कुर्बान किया जाना चाहिए?” समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने तत्काल समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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