'एक करोड़ झूठे मरे होंगे, तब ये पैदा हुए...' कनेक्टिंग लिंक पर विरोधियों को देवेंद्र फडणवीस का करारा जवाब

Devendra Fadnavis Slams Opposition: मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट पर उठ रहे सवालों पर विधानसभा में गरजे देवेंद्र फडणवीस। विरोधियों को दिया करारा जवाब, कहा- एक करोड़ झूठे मरे होंगे, तब ये पैदा हुए।
devendra fadnavis statement on mumbai pune expressway missing link
देवेंद्र फडणवीस का बयान (सोर्स: डिजाइन फोटो)
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Devendra Fadnavis Statement On Mumbai Pune Expressway: महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र उस समय गरमा गया जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के कनेक्टिंग लिंक प्रोजेक्ट पर उठ रहे सवालों और सोशल मीडिया पर हो रही आलोचनाओं का बेहद कड़े शब्दों में जवाब दिया। फडणवीस का गुस्सा उन लोगों पर फूटा जो इस इंजीनियरिंग के करिश्मे को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कभी-कभी मुझे आश्चर्य होता है कि कुछ लोग ऐसे हैं कि शायद एक करोड़ झूठे लोग मरे होंगे, तब ये पैदा हुए होंगे। आगे उन्होंने मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट को इंजीनियरिंग का अजूबा बताया।

गाली-प्रूफ हूं मैं, पर महाराष्ट्र का अपमान सहा नहीं जाएगा

फडणवीस ने सदन में स्पष्ट किया कि उन्हें व्यक्तिगत आलोचनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा, देवेंद्र फडणवीस को गालियां दो, मुझे इसकी आदत है, मैं गाली-प्रूफ हूं। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस प्रोजेक्ट के बहाने महाराष्ट्र की छवि खराब करने की कोशिश की गई, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कुछ सोशल मीडिया यूजर्स को भाड़े का टट्टू बताते हुए कहा कि पैसे लेकर इस प्रोजेक्ट के खिलाफ झूठ फैलाया जा रहा है।

इंजीनियरिंग का अजूबा: विरोधियों ने बंद कर दी थी फाइल

देवेंद्र फडणवीस ने प्रोजेक्ट के इतिहास को खंगालते हुए बताया कि पिछली महाविकास अघाड़ी सरकार ने इस मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट को नामुमकिन बताते हुए इसकी फाइल बंद कर दी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने 14 कारण गिनाते हुए दो पन्नों का नोट लिखा था कि यह काम नहीं हो सकता। लेकिन महायुति सरकार ने विशेषज्ञों और इंजीनियरों से बात की, जिन्होंने इसे संभव बताया। आज यह दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंग और भारत का सबसे ऊंचा वायडक्ट बनकर तैयार है, जो 170 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं को भी झेल सकता है।

कोंकण रेलवे का दिया उदाहरण

आलोचकों को जवाब देते हुए फडणवीस ने कोंकण रेलवे का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब मधु दंडवते जी कोंकण रेलवे बना रहे थे, तब भी लोगों ने कहा था कि यह नहीं चल पाएगी क्योंकि वहां लैंडस्लाइड हाेती हैं। उन्होंने कहा, अगर उस डर से कोंकण रेलवे नहीं बनती, तो आज क्या स्थिति होती? फडणवीस ने बताया कि इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स से हम सीखते हैं और सुधार करते हैं।

लैंडस्लाइड की हकीकत: पुल को नहीं आई एक खरोंच

हाल ही में हुई एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने साफ किया कि लैंडस्लाइड ऊपर से वाटर आर्च पर गिरी थी, जिससे वह हिस्सा टूटा। उन्होंने जोर देकर कहा कि केबल-स्टेयड ब्रिज या सुरंग को एक खरोंच तक नहीं आई है। जहां लोग दावा कर रहे थे कि सुरंग से पानी टपक रहा है, वहीं हकीकत यह थी कि आपातकालीन बटन दबाते ही 3 मिनट के भीतर मदद पहुंच गई। देवेंद्र फडणवीस ने गर्व से कहा कि इन बाधाओं के बावजूद केवल 18 घंटों के भीतर ट्रैफिक दोबारा शुरू कर दिया गया।

आगे की राह: IIT विशेषज्ञों की मदद

भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने IIT के विशेषज्ञों से चर्चा की है। अब नए प्लान के मुताबिक, जिन जगहों से पत्थर गिरने की आशंका है, वहां वायर मेश लगाया जाएगा। फडणवीस ने विश्वास जताया कि आज से 10 साल बाद गालियां देने वाले लोग नहीं दिखेंगे, लेकिन यह कनेक्टिंग लिंक मजबूती से खड़ी रहेगी और इस पर देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे का नाम गर्व से लिया जाएगा।

इस जोशीले भाषण के जरिए फडणवीस ने न केवल अपनी सरकार के विजन को सामने रखा, बल्कि विकास कार्यों पर राजनीति करने वालों को भी आईना दिखाया।

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