नागपुर जमीन आवंटन घोटाला: हाई कोर्ट का बड़ा कदम, 2007 से लंबित रिट याचिका अब जनहित याचिका (PIL) में तब्दील

Public Land Allotment: नागपुर में सार्वजनिक उपयोग की आरक्षित जमीनों के कथित अवैध आवंटन मामले में हाई कोर्ट ने रिट याचिका को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया। मामले की न्यायिक जांच पहले से जारी है।
Nagpur Land Allotment Scam: High Court's major move; writ petition pending since 2007 converted into a Public Interest Litigation (PIL).
नागपुर, आरक्षित जमीन, जनहित याचिका, हाई कोर्ट,(सोर्स सोशल मीडिया)
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Nagpur Public Land Scam: नागपुर सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित जमीनों के अवैध आवंटन के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने फिर एक बार इस रिट याचिका को जनहित के रूप में स्वीकार करने के आदेश हाई कोर्ट रजिस्ट्री को दिए। इसके पूर्व इसी तरह के मामले को लेकर दायर जनहित याचिका के साथ इस रिट याचिका को जोड़ा गया था किंतु बाद में इसे स्वतंत्र कर दिया गया।

अब इस रिट याचिका को ही जनहित के रूप में स्वीकार करने का निर्णय एचसी ने लिया है। गत समय हाई कोर्ट ने एक उच्च स्तरीय न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। हाई कोर्ट ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए महाघोटाले की तह तक जाने के लिए हाई कोर्ट के ही सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता एक समिति का गठन किया था। 2 दशकों (2007) से चल रही याचिका को अब जनहित के रूप में परिवर्तित किया गया।

आरक्षित जमीनों को मनपा, प्रन्यास ने किया नीलाम

कोर्ट ने 15 सितंबर 2021 को जगजीत सिंह सरदुल सिंह सद्दल की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक आदेश पारित किया था। कोर्ट ने दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद पाया कि N.I.T. और N.M.C. के अधिकारियों ने विकास योजना के नियमों को ताक पर रखकर भारी अनियमितताएं की हैं।

अधिकारियों ने खेल के मैदान, प्राथमिक विद्यालय, खुले स्थानों, पार्कों और बगीचों के लिए आरक्षित जमीनों को अवैध रूप से नीलाम कर दिया और पट्टे पर दे दिया। हद तो तब हो गई जब इन सार्वजनिक जमीनों के आरक्षण को कानूनी प्रक्रिया के तहत हटाए बिना ही वहां विकास कार्यों को मंजूरी भी दे दी गई।

सुको के आदेशों और MRTP एक्ट का खुला उल्लंघन

हाई कोर्ट का मानना था कि अधिकारियों का यह कृत्य महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन (M।R।T।P।) अधिनियम, 1966 की धारा 42 का सीधा उल्लंघन है। अदालत ने 'मनोहर जोशी बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी योजना प्राधिकरण लागू हो चुकी विकास योजना (D.P.Plan) के विपरीत काम नहीं कर सकता और न ही ऐसे विकास की अनुमति दे सकता है जो मूल योजना के प्रावधानों को ही नष्ट कर दे। इन गंभीर अवैध कार्यों की जांच के लिए कोर्ट ने हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस (रिटायर्ड) जेड, ए. हक की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया था।

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