सासवड़ से माउली की वारी का प्रस्थान, विठ्ठल भक्ति में सराबोर दिखे बच्चे और बुजुर्ग; देखें PHOTOS
Ashadhi Wari 2026 Photos: विठ्ठल विठ्ठल जय हरी विठ्ठल के जयघोष के साथ आज सासवड़ की गलियां भक्ति के रंग में सराबोर हो उठी हैं। सासवड़ से पंढरपुर की ओर बढ़ते इन वारकरीयों के कदमों में गजब का उत्साह और आंखों में विठ्ठल दर्शन की प्यास साफ झलक रही है।
संत ज्ञानेश्वर महाराज की यह पालखी 8 जुलाई को आलंदी से प्रस्थान कर पुणे होते हुए सासवड पहुंची थी। आज सासवड से निकलकर यह वारी जेजुरी, लोणंद और फलटण जैसे पड़ावों से गुजरते हुए 24 जुलाई को पंढरपुर पहुंचेगी।
वारी में शामिल छोटे बच्चे विठ्ठल की पारंपरिक वेशभूषा, माथे पर तिलक लगा कर साक्षात विठोबा का रूप लगते हैं। उनकी मासूमियत और भक्ति को देख हर कोई मंत्रमुग्ध होकर उन्हें नमन करने लगता है।
वारी की शोभा बढ़ाते सजे हुए बैल और पारंपरिक बैलगाड़ियां ग्रामीण संस्कृति का सुंदर दृश्य प्रस्तुत करती हैं। इनके गले में बंधी घंटियों की मधुर ध्वनि वारी के आध्यात्मिक संगीत में एक अनूठा लय जोड़ देती है।
वारी के केंद्र में संत ज्ञानेश्वर महाराज का भव्य रथ होता है, जिसमें उनके पादुका विराजमान होते हैं। इस रथ के दर्शन मात्र से वारकरी अपनी सारी थकान भूल जाते हैं और वातावरण 'माउली-माउली' के जयकारों से गूंज उठता है।
इस लंबी और कठिन पदयात्रा में महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल होकर अपनी अटूट आस्था का परिचय दे रही हैं। मन में अटूट विश्वास और मुख पर ज्ञानबा-तुकाराम का नाम लिए वे भक्ति की एक अनंत धारा के समान प्रतीत होती हैं।
उम्र की बाधा को पीछे छोड़, सफेद वस्त्रों में लिपटे बुजुर्ग वारकरी मृदंग और ताल की थाप पर झूमते नजर आते हैं। उनकी अटूट निष्ठा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो केवल विठ्ठल के नाम के सहारे मीलों का सफर तय कर रहे हैं।
यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि खुशियों का एक महाकुंभ है जहां वारकरी रास्ते भर फुगड़ी जैसे खेल खेलते और अभंग गाते हुए आनंदपूर्वक आगे बढ़ते हैं। आपसी प्रेम और सेवा भाव इस वारी को दुनिया की सबसे अनूठी पदयात्रा बनाता है।
लाखों वारकरीयों का यह समूह अंततः आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर चंद्रभागा के तट पर पहुंचेगा। अपने आराध्य विठ्ठल माउली के चरणों में सिर झुकाने की प्रतीक्षा ही इस पूरी वारी की ऊर्जा का मुख्य आधार है।