(प्रतीकात्मक तस्वीर)
MOIL Harassment Case: नागपुर में कार्यालय की ही महिला सहकर्मी द्वारा दर्ज यौन उत्पीड़न की एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने की मांग करते हुए मॉयल (MOIL) के महाप्रबंधक (प्रशासन) त्रिलोचन दास ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। इस पर लंबी सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश एमएम नेरलिकर ने किसी भी तरह की राहत देने से साफ इनकार कर याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप, जिनमें यौन उत्पीड़न और पीछा करने की बात शामिल है, प्रथमदृष्टया सही प्रतीत होते हैं और आवेदक द्वारा भेजे गए वाट्सएप संदेशों से भी इसकी पुष्टि होती है। त्रिलोचन दास के खिलाफ IPC की धारा 354ए, 354डी और 506 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद निचली अदालत में चार्जशीट भी दायर की गई।
शिकायतकर्ता ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि त्रिलोचन दास उन्हें अक्सर अपने चैंबर में बुलाते थे और उनकी नीयत खराब होती थी। उन्होंने दास पर उनकी त्वचा, बालों की तारीफ करने और यह कहने का आरोप लगाया कि वह पश्चिमी कपड़ों में अच्छी लगती है।
शिकायतकर्ता ने कई ऐसी घटनाओं का भी जिक्र किया है जिनसे पता चलता है कि आवेदक उनके करीब आने की कोशिश करता था। यहां तक की वाट्सएप संदेश भी भेजा करता था। एक संदेश में दास ने लिखा था : ‘आई —- यू, फॉर यू ऑलवेज फ्री, यू आर क्वीन ऑफ मॉयल, सिंस यू हैव क्लोज्ड योर आई टुवर्ड्स मी, नीड योर फुल सपोर्ट।’
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एक अन्य संदेश, 5 मई 2023 को भेजा गया जिसमें लिखा था, ‘सिंस यू हैव क्लोज्ड योर आई टुवर्ड्स मी, आई थॉट आई शुड नॉट डिस्टर्ब यू एंड विल रेस्पेक्ट योर डिस्टेंसिंग एटीट्यूड।’ इसी तरह 31 मई 2023 को उन्होंने ‘नाइस डीपी’ का संदेश भी भेजा था।