नागपुर हाई कोर्ट (सौजन्य-सोशल मीडिया)
High Court on Illegal Construction Case: बिनाकी स्थित वैशालीनगर घाट के पास के धोबी घाट के पीछे 24,218 वर्ग फुट जमीन पर अवैध रूप से बिना अधिकार हॉकर्स जोन के लिए आरक्षित जगह पर प्रन्यास द्वारा ईदगाह बनाए जाने का आरोप लगाते हुए नागपुर फेरी वाला फुटपाथ दुकानदार संगठन के महामंत्री अब्दुल रज्जाक कुरैशी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
याचिका पर सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की सहमति के बाद हाई कोर्ट ने जहां सुनवाई स्थगित की वहीं ईदगाह बनने पर लगाई गई रोक जारी रखने का आदेश भी दिया। याचिकाकर्ता की पैरवी कर रहे वकील ने कहा कि मौजा बीना के खसरा नंबर 42 में 24,218 वर्ग फुट जमीन मनपा की है जिसे हॉकर्स नीति के तहत हॉकिंग जोन के लिए आरक्षित किया गया है।
याचिकाकर्ता का मानना था कि अक्टूबर 2001 में ही नागपुर महानगरपालिका ने हॉकिंग और नॉन-हॉकिंग जोन पॉलिसी के तहत इस जमीन को हॉकिंग जोन के रूप में आरक्षित कर दिया था। वर्ष 2003 में हाई कोर्ट में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान इस संदर्भ में कोर्ट के सामने दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए थे।
यहां तक कि 29 दिसंबर 2016 को जारी किए गए नोटिफिकेशन में भी इसे चिह्नांकित किया गया। कोर्ट को बताया गया कि 21 मार्च 2024 को जारी दूसरे नोटिफिकेशन में भी इस आरक्षण पर मुहर लगाई गई किंतु अब आलम यह है कि प्रन्यास ने सम्पत्ति पर अधिकार के बिना ही ईदगाह का निर्माण शुरू कर दिया है जो आरक्षण के विपरीत है।
उल्लेखनीय है कि महानगरपालिका आए दिन कोई न कोई विवादित कार्यप्रणाली के चलते चर्चाओं में है। इसी शृंखला में अब आसीनगर जोन का उदाहरण उजागर हो रहा है। जहां जोनल कार्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित हॉकर्स जोन के लिए आरक्षित जमीन पर अवैध निर्माण जारी होने की शिकायत के बाद भी अफसरों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है जिसके लिए अलबत्ता इसे नजरअंदाज किए जाने के आरोप लगने लगे हैं।
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सूत्रों के अनुसार सिटी में 53 हॉकिंग जोन के लिए जमीनों को चिह्नांकित किया गया था जिसमें से आसीनगर जोन में दहनघाट के पास की जमीन पर हॉकर्स जोन बनाने का निर्णय लिया गया था। अब जमीनें खुली होने के कारण इन पर अवैध कब्जा होने लगा है जहां एनआईटी की निधि से ही ईदगाह निर्मित हो रहा है। सरकारी जमीन पर ही कब्जा होने के कारण अंतत: नागपुर फेरी वाला फुटपाथ दुकानदार संगठन के महामंत्री अब्दुल रज्जाक कुरैशी की ओर से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।