आनंद साई अर्बन क्रेडिट सोसाइटी मामला: HC ने वसूली अधिकारी को रोका, 5 मार्च को मंत्री के सामने पेश होंगे निदेशक

Bombay High Court Nagpur Bench: आनंद साई अर्बन क्रेडिट सोसाइटी के निदेशकों को हाई कोर्ट से राहत। वसूली पर रोक, सहकार राज्य मंत्री को 8 सप्ताह में अपील पर फैसला लेने का आदेश।
Bombay High Court grants relief to directors of Anand Sai Urban Credit Society.
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Published on: 
Updated on: 

Anand Sai Urban Credit Society: महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, 1960 की धारा 88 के तहत आनंद साई अर्बन क्रेडिट कोआपरेटिव सोसाइटी के विरुद्ध एक जांच शुरू की गई थी। 20 फरवरी, 2024 को प्रस्तुत अंतिम जांच रिपोर्ट में याचिकाकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया गया और उनसे निर्दिष्ट राशि की वसूली का आदेश दिया गया।

इसे चुनौती देते हुए सहकार राज्य मंत्री के पास अपील दायर की गई किंतु अपील पर किसी तरह का निर्णय नहीं लिए जाने के कारण अब निदेशक मिलिंद घोगरे और अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।

याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने सहकारिता राज्य मंत्री को महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए सहकारी संस्था के निदेशकों के खिलाफ चल रही वसूली की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी। न्यायालय ने सहकारिता विभाग के मंत्री को आदेश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर लंबित वैधानिक अपील पर 8 सप्ताह के भीतर निर्णय लें।

डेढ़ साल से लंबित थी अपील

जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ताओं ने 13 अगस्त, 2024 को मंत्रालय, मुंबई में सहकारिता मंत्री के समक्ष अधिनियम की धारा 152 के तहत एक वैधानिक अपील (संख्या 534/15-S) दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि डेढ़ साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मंत्री स्तर पर इस अपील पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। एक ओर जहां मुख्य अपील लंबित थी, वहीं दूसरी ओर वसूली अधिकारी ने कार्यवाही तेज कर दी। 17 दिसंबर, 2025 को एक नोटिस जारी कर याचिकाकर्ताओं की कृषि भूमि और संपत्ति पर कब्जा कर लिया गया। याचिकाकर्ताओं ने इसी दंडात्मक कार्यवाही को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुनवाई का दें उचित अवसर

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्णय लेने से पहले याचिकाकर्ताओं और संबंधित सहकारी संस्था को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाए। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता 5 मार्च, 2026 को सुबह 11:00 बजे मंत्री के समक्ष उपस्थित होंगे। अपील पर लिए गए निर्णय की जानकारी याचिकाकर्ताओं को 2 सप्ताह के भीतर देना अनिवार्य होगा।

कोर्ट ने वसूली अधिकारी को निर्देश दिया कि अपील पर फैसला होने तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ 17 दिसंबर, 2025 के नोटिस के आधार पर कोई भी दंडात्मक कार्यवाही न की जाए। इस आदेश के साथ ही हाई कोर्ट ने रिट याचिका का निपटारा कर दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता एच.एस. चितले और राज्य सरकार की ओर से एजीपी टी.एच. खान ने पैरवी की।

Navbharat Live
navbharatlive.com