Gadchiroli Naxal: ‘देवजी’ ने 15 साथियों संग किया सरेंडर, पढ़ें 131 जवानों के हत्यारे की पूरी कहानी

Naxal Leader Devji Surrender: बड़ी नक्सल घटनाओं का मास्टरमाइंड देवजी आत्मसमर्पण। गड़चिरोली और छत्तीसगढ़ में सक्रिय प्रतिबंधित संगठन के सर्वोच्च नेता ने डाले हथियार। पढ़ें पूरा सफर।
Mastermind of major Naxal attacks, Thippari Tirupati alias Devji, surrenders with 15 others. A massive blow to the Maoist movement in Central India.
थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी (सौजन्य-नवभारत)
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Gadchiroli Naxal News: गड़चिरोली जिले में प्रतिबंधित नक्सली संगठन के सर्वोच्च नेता थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी तथा केंद्रीय समिति सदस्य मल्लाराजी रेड्डी उर्फ संग्राम सहित 15 से अधिक सशस्त्र नक्सलियों ने रविवार को तेलंगाना राज्य के आसिफाबाद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार देवजी गड़चिरोली तथा छत्तीसगढ़ क्षेत्र में हुई कई बड़ी नक्सली घटनाओं का मास्टरमाइंड रहा है।

उसके आत्मसमर्पण को नक्सल उन्मूलन अभियान में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ज्ञात हो कि अप्रैल-मई 2025 में छत्तीसगढ़ के करेगुट्टा पहाड़ क्षेत्र में 10 हजार से अधिक पुलिस बल ने संयुक्त अभियान चलाकर नक्सलियों को घेर लिया था। इस अभियान के दौरान 21 मई 2025 को माओवादी संगठन के तत्कालीन सर्वोच्च नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू मारे गए थे।

कमांडर के रूप में किया था काम

इसके बाद थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी को संगठन का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था। बसवराजू की मौत के बाद संगठन के दूसरे नंबर के नेता मल्लोजुल्ला वेणुगोपाल उर्फ भूपति उर्फ सोनू ने 15 अक्टूबर 2025 को गड़चिरोली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में आत्मसमर्पण किया था। 18 नवंबर 2025 को नक्सलियों के सैन्य कमांडर माडवी हिडमा और उसकी पत्नी को छत्तीसगढ़ पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था।

थिप्परी तिरुपति (64) ने तेलंगाना के जगतियाल जिले के कोरुटला गांव के डा. आंबेडकर नगर का निवासी है। वह ‘माडिगा’ दलित समुदाय से संबंध रखता है। वर्ष 1980 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान वह करीमनगर की क्रांतिकारी छात्र आंदोलन से जुड़ा। वर्ष 1983 में उसने पीपुल्स वार ग्रुप में प्रवेश किया। शुरुआत में उसने गड़चिरोली जिले में दलम सदस्य तथा कमांडर के रूप में काम किया।

बाद में वह डिविजनल कमेटी सदस्य बना और उसे दंडकारण्य क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2001 में उसे केंद्रीय समिति सदस्य तथा सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का प्रमुख नियुक्त किया गया। वर्ष 2007 में रानीबोदली हमले में 55 जवान तथा अप्रैल 2010 में दंतेवाड़ा जिले में हुए भूसुरंग विस्फोट में 76 जवान शहीद हुए थे। इन दोनों घटनाओं के पीछे देवजी की भूमिका बताई जाती है।

मल्लाराजी रेड्डी का सफर

देवजी के साथ आत्मसमर्पण करनेवाले मल्लाराजी रेड्डी उर्फ संग्राम उर्फ मुरली भी केंद्रीय समिति का सदस्य था। वह 1975 से माओवादी आंदोलन से जुड़े था। उनका जन्म तेलंगाना के पेद्दापल्ली जिले के शतरंजपल्ली गांव में हुआ था।

उनकी पहली पत्नी रथनम्मा उर्फ राजक्का उर्फ निर्मला 1998 में एक मुठभेड़ में मारी गई थी। बाद में उसने छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले की बिच्चा उर्फ सगुणा से विवाह किया। आत्मसमर्पण के दौरान उसने एके-47 और इंसास राइफल सहित कई हथियार पुलिस के हवाले किए।

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