

Nagpur Ram Temple Donation Controversy: नागपुर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने अयोध्या राम मंदिर में दान घोटाले को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर घोर विश्वासघात बताते हुए बीजेपी, आरएसएस व संबंधित हिन्दूवादी संगठनों को आड़े हाथ लिया।
नागपुर में आयोजित प्रेस परिषद में उन्होंने सवाल उठाया कि जब ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ तो इस घोटाले की जवाबदेही कौन लेगा। अगर सब कुछ ठीक था तो चंपतराय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों हुए।
अगर कुछ गलत नहीं हुआ, तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच से डर किस बात का है। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं।
देश के कोने-कोने से गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई, अपने गहने, अपनी बचत और अपनी श्रद्धा लेकर राम मंदिर निर्माण के लिए आगे आए। आज इनकी आस्था पर चोट की गई है।
प्रेस परिषद में शहर अध्यक्ष प्रफुल्ल गुडधे, विधायक अभिजीत वंजारी, सुरेश जग्याशी, आकाश तायवाडे, अजीत सरकार, जुल्फिकार भुट्टो, गौतम गाणार सहित अन्य मौजूद थे।
शर्मा ने कहा कि भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार के संगठनों ने लगभग 3 दशकों तक भगवान राम के नाम पर राजनीति की देश के गरीब व मध्यम वर्ग से राम के नाम पर चंदा एकत्र किया और इसी आंदोलन के आधार पर सत्ता प्राप्त की।
आज यही करोड़ों रामभक्त यह पूछने को मजबूर हैं कि भगवान के नाम पर जुटाया गया चंदा और चढ़ावा आखिर किसके सरंक्षण में लूटा गया। यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं है बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भावनाओं के साथ किया गया धोर विश्वासघात है। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।