मुंबई में होगा खेला: कैद में छटपटा रहे शिंदे के नगरसेवक! महापौर पद को लेकर भी मचा घमासान

Mumbai Political Drama: मुंबई बीएमसी चुनावों के बाद बीजेपी और शिंदे के गुट के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। शिंदे ने अपने 29 नगरसेवकों को होटल में बंद कर रखा है।
Shinde's councilors
Mumbai Political Drama:मुंबई बीएमसी चुनावों (सोर्सः सोशल मीडिया)
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BMC election 2026: मुंबई महानगरपालिका के बहुप्रतीक्षित चुनावों के परिणामों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया सियासी तूफान उठने के संकेत मिल रहे हैं। 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद बीजेपी पहली बार मुंबई में अपने दम पर महापौर बनाने में असमर्थ हो गई है। बीजेपी की इस मजबूरी का लाभ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

दावा किया जा रहा है कि बीजेपी से बार्गेनिंग करने के लिए शिंदे ने अपने 29 नवनिर्वाचित नगरसेवकों को होटल में बंद कर दिया है। हालांकि, बंदी में रखे गए शिंदे के नवनिर्वाचित नगरसेवक अपने सियासी भविष्य को लेकर चिंतित हैं और वे अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। अंदरखाने यह भी दावा किया जा रहा है कि बीजेपी अब शिंदे से छुटकारा पाने के मूड में है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि मुंबई में एक बार फिर सियासी खेला होगा।

महापौर पद को लेकर काफी घमासान

मुंबई बीएमसी चुनाव प्रचार के दौरान महापौर पद को लेकर काफी घमासान देखने को मिला था। मराठी, हिंदू-मराठी या बुर्के वाली महापौर के नाम पर वोट मांगे गए थे। चुनाव संपन्न होने के बाद मुंबई के अगले महापौर को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्सुकता देखी जा रही है। चुनाव में शिवसेना (शिंदे गुट) को 2,73,326 वोट और 29 सीटें मिलीं, जबकि शिवसेना (यूबीटी) को 7,17,736 वोट और 65 सीटें मिलीं। इस परिणाम से यह स्पष्ट हो गया है कि मुंबई के मराठी वोटर आज भी पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ हैं। इस परिणाम से 'शिवसेना' पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर डीसीएम शिंदे के साथ चल रही अदालती लड़ाई में उद्धव ठाकरे को लाभ मिलने की संभावना बढ़ गई है। इस स्थिति में यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि ठाकरे बंधु फिर से बीजेपी के साथ आ सकते हैं।

कम पावर वाले शिंदे के दबाव से मिलेगा छुटकारा

बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में अपने दम पर सरकार बनाने के बाद भी शिंदे और अजीत पवार को साथ लिया था और शिंदे की सभी जिदें पूरी की हैं। यह कदम लोकसभा चुनाव में बीजेपी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उठाया गया था। लोकसभा चुनाव में बीजेपी 240 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 272 सीटों से काफी पीछे रह गई थी।

सरकार बनाने के लिए उसे सहयोगी दलों की बैसाखी का सहारा लेना पड़ा। इस परिस्थिति को समझते हुए शिंदे ने विधानसभा और बीएमसी चुनावों में बीजेपी की इच्छा के विपरीत ज्यादा सीटें हासिल की हैं और अब वह ढाई साल के लिए मुंबई का महापौर बनने का प्रयास कर रहे हैं।

ठाकरे बंधु बन सकते हैं विकल्प

शिंदे के साथ जाने से बीजेपी को 29 नगरसेवकों का समर्थन मिलेगा, लेकिन अगर ठाकरे बंधुओं को साथ लिया जाता है तो उद्धव ठाकरे के 65 नगरसेवकों के अलावा उनके 9 सांसद और 20 विधायक भी समर्थन में आ सकते हैं। इसके अलावा, राज ठाकरे के 6 नगरसेवक भी बीजेपी के साथ आ सकते हैं। इस स्थिति में शिंदे की शिवसेना में भगदड़ मच सकती है और उनके सांसद, विधायक और नगरसेवक वापस घर लौट सकते हैं। ऐसी स्थिति में किसी को हैरानी नहीं होगी।

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